करोड़ों की जीएसटी चोरी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए एसआईटी ने मास्टरमाइंड भगवान सिंह उर्फ भूरा और उसके साथी रविंद्र को मथुरा से गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह फर्जी ई-वे बिल और बोगस फर्मों के जरिए कई राज्यों में फैला हुआ था और अब तक ₹989 करोड़ की जीएसटी चोरी का खुलासा हो चुका है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क के जरिए करीब ₹5473 करोड़ का फर्जी टर्नओवर दिखाया गया। इसके लिए 535 से अधिक फर्जी फर्मों का इस्तेमाल किया गया, जिनके जरिए स्क्रैप कारोबार की आड़ में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की जा रही थी।
ट्रक पकड़े जाने पर भी ‘फोन से सेटिंग’
पूछताछ में आरोपी भगवान सिंह ने खुलासा किया कि वह स्क्रैप से भरे ट्रकों को एक राज्य से दूसरे राज्य तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी लेता था। यदि रास्ते में ट्रक जांच के दौरान पकड़े जाते, तो वह फोन के जरिए कथित तौर पर अधिकारियों से संपर्क कर उन्हें छुड़वा देता था।
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस पूरे खेल में कुछ अंदरूनी लोगों की भूमिका हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के दावों के आधार पर इस एंगल की भी गहराई से जांच की जा रही है।
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एक नंबर से दर्जनों फर्म, नेटवर्क की परतें खुलीं
इस रैकेट का खुलासा पिछले साल 24 अक्टूबर को हुआ, जब जीएसटी टीम ने उमरी चौराहे के पास स्क्रैप से लदे दो ट्रकों को पकड़ा था। जांच में सामने आया कि एक मोबाइल नंबर से 60 और दूसरे नंबर से 62 फर्म रजिस्टर्ड थीं। यहीं से पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
अब तक की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी खुद 33 बोगस फर्म बना चुका था और इनके जरिए फर्जी बिलिंग कर टैक्स चोरी को अंजाम दे रहा था।
पांच राज्यों में फैला था जाल
एसआईटी के अनुसार, आरोपी का नेटवर्क उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, झारखंड और पंजाब तक फैला हुआ था। यह गिरोह स्क्रैप से भरे ट्रकों को मुजफ्फरनगर और पंजाब के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचाने का काम करता था, जहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर माल की एंट्री दिखाई जाती थी।
गिरफ्तार आरोपी रविंद्र इस नेटवर्क का तकनीकी हिस्सा संभालता था। वह कंप्यूटराइज्ड बिल्टी, ई-वे बिल और फर्मों के दस्तावेज तैयार करता था और उन्हें व्हाट्सएप के जरिए कारोबारियों तक पहुंचाता था। जांच में यह भी सामने आया कि इसके लिए विदेशी मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
बरामदगी और आगे की कार्रवाई
कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया गया है, जिनमें कई अहम डिजिटल सबूत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
जांच में पंजाब के मंडी गोविंदगढ़ निवासी हेमंत और गुरुग्राम निवासी राहुल के नाम भी सामने आए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी फर्म उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई। एसआईटी की टीम अब इन दोनों की तलाश में जुटी है।
जांच जारी, और खुलासों के संकेत
अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अभी शुरुआती चरण में है और आगे की जांच में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। खासकर, जिन 535 फर्मों के जरिए यह नेटवर्क संचालित हो रहा था, उनकी पूरी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल है।
यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि फर्जी दस्तावेजों और डिजिटल सिस्टम के दुरुपयोग के जरिए टैक्स चोरी के नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। एसआईटी की यह कार्रवाई ऐसे नेटवर्क पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
