मथुरा (उत्तर प्रदेश): जमीन खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में गोवर्धन थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पहले ही बेची जा चुकी जमीन का कथित रूप से फर्जी बैनामा तैयार कर पीड़ित से करीब ₹75 लाख की रकम हड़प ली। जांच में एक आरोपी की भूमिका कथित तौर पर सौदे में मध्यस्थ यानी दलाल के रूप में भी सामने आई है।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ग्राम गांठौली निवासी उम्मेद उर्फ उमेशचंद और दुर्गाप्रसाद के रूप में की है। पुलिस के मुताबिक, उम्मेद को उसके आवास से जबकि दुर्गाप्रसाद को उसकी दुकान से गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पहले बेची गई जमीन का कराया गया दोबारा बैनामा
पुलिस जांच के अनुसार, मामला खसरा संख्या-381 से जुड़ी जमीन का है। आरोप है कि संबंधित भूमि को आरोपी पहले ही अन्य लोगों को बेच चुके थे। इसके बावजूद उन्होंने पीड़ित और उसके भाइयों को करीब 276.46 वर्गमीटर जमीन बेचने का भरोसा दिलाया और कथित रूप से फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बैनामा करा दिया।
जांच में सामने आया कि इस कथित फर्जी बैनामे को 11 सितंबर 2025 को मथुरा के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत भी कराया गया था। पीड़ित पक्ष को बाद में जानकारी मिली कि जिस जमीन के लिए उन्होंने रकम दी थी, वह पहले ही किसी अन्य व्यक्ति को बेची जा चुकी है।
नकद और चेक के जरिए ली गई रकम
पुलिस के अनुसार, जमीन सौदे की कुल कीमत करीब ₹75 लाख तय की गई थी। आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित पक्ष से ₹56.20 लाख नकद और ₹13.80 लाख चेक के माध्यम से प्राप्त किए।
पीड़ित को जब जमीन के वास्तविक स्वामित्व और पहले हुए बिक्री दस्तावेजों की जानकारी मिली, तो उसने पुलिस से शिकायत की। इसके बाद गोवर्धन थाने में 24 जून 2026 को मामला दर्ज किया गया।
जांच में दलाल की भूमिका उजागर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच के दौरान राजस्व रिकॉर्ड, पुराने बैनामों और गवाहों के बयान खंगाले गए। जांच में आरोप है कि दुर्गाप्रसाद ने पूरे जमीन सौदे में मध्यस्थ की भूमिका निभाई और खरीदार तथा विक्रेता के बीच संपर्क स्थापित कराया।
पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है।
फर्जी दस्तावेजों से जमीन धोखाधड़ी पर पुलिस की नजर
जमीन से जुड़े अपराधों में फर्जी दस्तावेज, गलत स्वामित्व जानकारी और एक ही संपत्ति को कई बार बेचने जैसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि ऐसे मामलों में राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज और भुगतान से जुड़े साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होती है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी संपत्ति को गलत जानकारी देकर बेचने या फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामलों में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
आगे की जांच जारी
गोवर्धन पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर मामले से जुड़े अन्य लोगों और संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह की अन्य जमीन धोखाधड़ी की घटनाओं में भी आरोपियों की भूमिका रही है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि जमीन खरीदने से पहले स्वामित्व रिकॉर्ड, पुराने बैनामे और राजस्व दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करें, ताकि फर्जीवाड़े से बचा जा सके।
