सेक्शन 155 के दुरुपयोग से नाम, क्षेत्रफल और श्रेणी में बदलाव; महाराष्ट्र सरकार ने 5 साल के रिकॉर्ड की राज्यव्यापी जांच के दिए आदेश

‘जमीन पर फर्जीवाड़े का महाघोटाला’: 2 लाख परिवारों पर असर, रिकॉर्ड में हेरफेर से मालिकाना हक बदला

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By Roopa
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मुंबई। महाराष्ट्र में जमीन के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जिसने राज्यभर में हड़कंप मचा दिया है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस घोटाले से 1.5 लाख से 2 लाख परिवारों के प्रभावित होने की आशंका है। जमीन के दस्तावेजों में हेरफेर कर मालिकाना हक बदलने और क्षेत्रफल बढ़ाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।

राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे महाराष्ट्र में पिछले पांच वर्षों के सभी रिकॉर्ड की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। शुरुआती जांच में गड़बड़ियां मुख्य रूप से पुणे डिवीजन में सामने आई हैं, लेकिन अब सभी जिलों में इसकी पड़ताल की जाएगी।

‘क्लेरिकल एरर’ के नाम पर खेला गया बड़ा खेल

जांच में सामने आया है कि महाराष्ट्र लैंड रेवेन्यू कोड, 1966 के सेक्शन 155 का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। यह प्रावधान केवल टाइपिंग या मामूली त्रुटियों को सुधारने के लिए बनाया गया था, लेकिन इसका इस्तेमाल जमीन के मालिकाना हक बदलने तक के लिए किया गया।

इस प्रावधान के जरिए रिकॉर्ड में नाम जोड़ना-हटाना, जमीन का क्षेत्रफल बढ़ाना और जमीन की श्रेणी बदलना जैसे गंभीर बदलाव किए गए। कई मामलों में प्रभावित पक्षों को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।

जांच में सामने आईं चौंकाने वाली अनियमितताएं

पुणे जिले में की गई जांच के दौरान 38,000 से ज्यादा मामलों में से 2,383 मामलों की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं।

इनमें ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करना, जबकि प्रक्रिया ऑनलाइन अनिवार्य थी; संबंधित पक्षों को नोटिस न देना; ‘ऑक्यूपेंट क्लास-II’ जमीन को ‘क्लास-I’ में बदलना; और ‘अन्य अधिकार’ कॉलम से नाम हटाना शामिल है।

जांच में अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 15 अधिकारियों पर बेहद गंभीर आरोप, 82 पर गंभीर अनियमितताओं और 55 पर मध्यम स्तर के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं।

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सरकार का एक्शन प्लान: सस्पेंशन से लेकर आपराधिक केस तक

सरकार ने इस घोटाले पर सख्त रुख अपनाते हुए कई स्तरों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। गंभीर मामलों में आपराधिक केस दर्ज करने और विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

जिन अधिकारियों पर सबसे ज्यादा आरोप हैं या 30 से ज्यादा मामलों में संलिप्तता पाई गई है, उनके खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जा रही है। वहीं, अन्य मामलों में ट्रांसफर और अनुशासनात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

यदि किसी मामले में रिकॉर्ड या फाइल गायब पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट, 2005 के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।

राज्यव्यापी ऑडिट और कानून में बदलाव की तैयारी

सरकार ने 13 फरवरी 2026 तक के सभी सेक्शन 155 मामलों की राज्यव्यापी समीक्षा के आदेश दिए हैं। सभी डिविजनल कमिश्नरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में हर केस की जांच कर रिपोर्ट सौंपें।

इसके साथ ही, भविष्य में इस तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए कानून में संशोधन की भी तैयारी की जा रही है। पुणे में सामने आए मामलों में गलत म्यूटेशन एंट्री को तुरंत सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।

आम नागरिकों पर सीधा असर, भरोसे पर चोट

यह घोटाला सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि आम लोगों के भरोसे पर सीधा प्रहार है। जिन परिवारों की जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव किया गया, उन्हें कानूनी और आर्थिक दोनों तरह के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की अनियमितताएं न सिर्फ विवाद बढ़ाती हैं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव डालती हैं।

सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रभावित परिवारों को जल्द न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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