₹172 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन से जुड़े मनी म्यूल, फर्जी चेक और ATM निकासी के नेटवर्क का खुलासा; ‘ऑपरेशन 1930’ के तहत 803 FIR, ₹514 करोड़ से अधिक की रकम बचाई गई

महाराष्ट्र में साइबर ठगी के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार, 23,328 बैंक खाते जांच के घेरे में

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By Roopa
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मुंबई: महाराष्ट्र में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे राज्यव्यापी अभियान में बड़े पैमाने पर वित्तीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। महाराष्ट्र साइबर ने 23,328 बैंक खातों की पहचान की है, जिनका कथित तौर पर मनी म्यूल गतिविधियों, फर्जी चेक से निकासी और ATM के जरिए रकम निकालने वाले साइबर अपराध नेटवर्क से संबंध है। इन खातों से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की कुल राशि करीब ₹172 करोड़ बताई गई है।

राज्य में यह कार्रवाई 1 जुलाई से शुरू किए गए ‘ऑपरेशन 1930: साइबर सेफ्टी’ के तहत की जा रही है। अभियान का फोकस केवल साइबर ठगी के पीड़ितों की शिकायतों पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है। पुलिस ने डेटा और खुफिया विश्लेषण के आधार पर उन वित्तीय और संचार माध्यमों को निशाना बनाना शुरू किया है, जिनका इस्तेमाल साइबर ठग रकम इधर-उधर करने और निकालने के लिए करते हैं।

महाराष्ट्र साइबर के विश्लेषण के आधार पर अब तक 803 सक्रिय FIR दर्ज की गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस रणनीति के तहत पुलिस अपराध होने के बाद केवल आरोपी तक पहुंचने के बजाय ठगी को संभव बनाने वाले पूरे नेटवर्क और उसकी बुनियादी संरचना तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

57 बैंकों के 2,717 मनी म्यूल खाते

जांच में मनी म्यूल खातों की बड़ी संख्या सामने आई है। साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 2,717 लेयर-1 खातों की पहचान की गई है। ये खाते 57 बैंकों से जुड़े हैं और इनमें करीब ₹12.57 करोड़ की संदिग्ध रकम शामिल बताई गई है।

फर्जी चेक से रकम निकालने के मामलों में 3,597 बैंक खाते और 2,171 बैंक शाखाएं जांच के दायरे में आई हैं। इन खातों से जुड़े लेनदेन में करीब ₹89.30 करोड़ की राशि शामिल होने का अनुमान है। इसी तरह ATM के जरिए रकम निकालने वाले नेटवर्क में 17,014 बैंक खातों और 10,075 ATM आईडी की पहचान की गई है। इनसे जुड़े मामलों में करीब ₹70.14 करोड़ की रकम सामने आई है।

पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा रहे 5,684 SIM कार्ड भी चिन्हित किए हैं। इन SIM कार्ड का संबंध 7,312 साइबर अपराध शिकायतों से बताया गया है। पुलिस अब इनके उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ ऐसे SIM उपलब्ध कराने वाले विक्रेताओं की भी जांच कर रही है।

रोज 8,000 से 10,000 कॉल संभाल रही हेल्पलाइन

साइबर वित्तीय अपराधों की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 की भूमिका भी अभियान में महत्वपूर्ण बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार, हेल्पलाइन पर प्रतिदिन 8,000 से 10,000 कॉल आ रही हैं और सभी कॉल का जवाब दिया जा रहा है। वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में राज्य में दो लाख से अधिक शिकायतों को इस व्यवस्था के माध्यम से संभाला गया है।

ठगी के मामलों में FIR की प्रक्रिया तेज करने के लिए महाराष्ट्र ने 10 जुलाई को E-Zero FIR प्रणाली शुरू की। राष्ट्रीय पोर्टल पर ₹5 लाख से अधिक की धोखाधड़ी की रिपोर्ट मिलने पर मामला स्वत: E-Zero FIR में परिवर्तित होकर संबंधित स्थानीय पुलिस इकाई को भेजा जाता है। इसके बाद पीड़ित को 72 घंटे के भीतर संबंधित थाने में जाकर E-FIR पर हस्ताक्षर करने होते हैं।

₹514 करोड़ से अधिक की रकम बचाई

संदिग्ध लेनदेन पर समय रहते रोक लगाने और बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई से नागरिकों की ₹514.36 करोड़ की रकम सुरक्षित की गई है। इसके साथ ही 2026 में अब तक बचाई गई कुल नागरिक राशि ₹1,700 करोड़ से अधिक पहुंच गई है।

गलत तरीके से बैंक खाते पर डेबिट फ्रीज या लियन लगाए जाने की शिकायतों के समाधान के लिए Grievance Redressal Module (GRM) भी इस्तेमाल किया जा रहा है। नागरिक अपने बैंक की शाखा के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिसे संबंधित पुलिस इकाई को सत्यापन के लिए भेजा जाता है। विभाग के अनुसार, इस व्यवस्था से अब तक 5,800 से अधिक शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है।

पीड़ितों को ₹25.46 करोड़ वापस

साइबर ठगी के पीड़ितों को रकम वापस दिलाने के लिए Money Restoration Module (MRM) के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। इस व्यवस्था में प्रति खाते ₹50,000 तक की रकम अदालत के आदेश के बिना वापस कराने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। 1 जुलाई से अब तक इस मॉड्यूल के जरिए महाराष्ट्र के विभिन्न पुलिस इकाइयों के समन्वित प्रयास से पीड़ितों को ₹25.46 करोड़ वापस कराए जा चुके हैं।

महाराष्ट्र साइबर के अनुसार, अभियान का उद्देश्य केवल ठगी की रकम रोकना नहीं, बल्कि मनी म्यूल खातों, संदिग्ध SIM, ATM नेटवर्क और अन्य सहायक माध्यमों को एक साथ चिन्हित कर साइबर अपराध की पूरी वित्तीय श्रृंखला को कमजोर करना है।

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