“हैदराबाद साइबराबाद EOW की बड़ी कार्रवाई: ‘Subhakshetra Projects’ के नाम पर चला फर्जी रियल एस्टेट रैकेट, निवेशकों को लोन और सोना गिरवी रखने पर मजबूर किया”

₹8.71 करोड़ की ठगी का आरोपी पुणे से गिरफ्तार, मास्टरमाइंड निकला बोगस कंपनी नेटवर्क का प्रमुख

Roopa
By Roopa
4 Min Read

लखनऊ। बोगस कंपनियों के जरिए फर्जी बिल बनाकर ₹8.71 करोड़ की आईटीसी पास करने के मामले में लखनऊ पुलिस ने पुणे से आरोपी केशवानी अब्बास हुसैन रमजान अली को गिरफ्तार किया है। यह मामला पिछले साल सितंबर में सामने आया था, जब इंदिरानगर थाने में आराध्या इंटरप्राइजेज के खिलाफ फर्जी तरीके से आईटीसी पास करने की शिकायत दर्ज की गई थी।

राज्यकर विभाग खंड 21 के सहायक आयुक्त गौरव कुमार राजपूत ने बताया कि आराध्या इंटरप्राइजेज का पंजीकरण अहमदाबाद स्थित नवीनचंद्र केशवलाल सोलंकी के दस्तावेजों का इस्तेमाल करके केंद्रीय क्षेत्राधिकार में कराया गया था। हालांकि, फर्म का वास्तविक संचालन अन्य लोगों द्वारा किया जा रहा था। जांच के दौरान एसआईटी गठित की गई और आरोपी की लोकेशन ट्रेस की गई। इसके बाद 22 मार्च को लखनऊ पुलिस ने आरोपी को पुणे से दबोच लिया।

जांच में सामने आया कि केशवानी अब्बास हुसैन रमजान अली केवल आराध्या इंटरप्राइजेज से ही नहीं, बल्कि एसएम ट्रेडर्स, राठौर इंटरप्राइजेज और गौड़ ट्रेडिंग जैसी अन्य फर्मों से जुड़े मामलों का भी मास्टरमाइंड निकला। इससे स्पष्ट होता है कि पूरे नेटवर्क में कई लोग और फर्म शामिल थे, जो विभिन्न राज्यों में करोड़ों रुपये की आईटीसी और GST घोटाले में लिप्त थे।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने फर्जी बिल तैयार कर उन्हें बैंकों और कर विभाग में प्रस्तुत किया, जिससे बड़े पैमाने पर आईटीसी क्लेम किए गए। इसके अलावा अन्य फर्मों के नाम पर भी फर्जी लेन‑देन और दस्तावेज तैयार किए गए थे, जो जांच में धीरे‑धीरे सामने आए।

FutureCrime Summit 2026 Calls for Speakers From Government, Industry and Academia

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामले केवल वित्तीय धोखाधड़ी ही नहीं, बल्कि जालसाजी और फर्जीवाड़े के व्यापक नेटवर्क का उदाहरण हैं। इस तरह के घोटालों में अक्सर मास्टरमाइंड शहरी और ग्रामीण दोनों स्तरों पर कंपनियों और व्यक्तियों के नाम का दुरुपयोग करते हैं।

पुलिस ने बताया कि जल्द ही अन्य आरोपियों को भी पकड़ने की कार्रवाई की जाएगी। पिछले कुछ महीनों में यह पहला मौका नहीं है जब ऐसे फर्जी फर्मों और बिलिंग नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, लेकिन इस गिरफ्तारी से पूरे मामले की जांच को और गति मिलेगी।

राज्यकर अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के घोटाले रोकने के लिए फर्मों और उनके दस्तावेजों की नियमित जांच और सत्यापन आवश्यक है। साथ ही, बड़े वित्तीय लेन‑देन के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग सिस्टम की सख्त निगरानी भी जरूरी है।

लखनऊ पुलिस ने कहा कि इस मामले में आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा और मामले की पूरी पड़ताल के बाद अन्य जुड़े लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इससे यह संदेश जाता है कि वित्तीय और कर संबंधी धोखाधड़ी के खिलाफ कानून सख्ती से लागू किया जा रहा है।

इस गिरफ्तारी के साथ ही राज्य और केंद्र की एजेंसियों की सहयोगी जांच प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है, ताकि बोगस कंपनियों के नेटवर्क और उनके मास्टरमाइंड को पूरी तरह से बेनकाब किया जा सके।

हमसे जुड़ें

Share This Article