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अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, सात गिरफ्तार

Team The420
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लखनऊ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश पुलिस की क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र में संचालित एक कथित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर तकनीकी सहायता और साइबर सुरक्षा के नाम पर ठगी करता था। प्रारंभिक जांच में गिरोह पर करीब ₹150 करोड़ की कथित साइबर धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

पुलिस के अनुसार, यह फर्जी कॉल सेंटर ओमेक्स आर-2 रेजिडेंशियल अपार्टमेंट से संचालित किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान गिरोह के कथित संचालक अहमदाबाद निवासी पुनीत वर्मा और दीपेन चंद्रकांत पटेल समेत मो. सोहेल, मो. सहनवाज, मो. इमरान, मो. रियाज और सज्जाद हुसैन को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियां अब गिरोह के अन्य सदस्यों, विदेशी संपर्कों और वित्तीय नेटवर्क की जानकारी जुटा रही हैं।

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जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट और साइबर सिक्योरिटी कंपनियों के प्रतिनिधि बताकर अमेरिकी नागरिकों से संपर्क करते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी पीड़ितों के कंप्यूटर सिस्टम में कथित रूप से वायरस या संदिग्ध गतिविधि का डर पैदा करते थे और स्क्रीन पर फर्जी टोल-फ्री नंबर प्रदर्शित कराते थे। इसके बाद कॉल सेंटर कर्मचारी पीड़ितों को बताते थे कि उनके बैंक खातों में छेड़छाड़ हुई है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

पुलिस का आरोप है कि डर का माहौल बनाने के बाद आरोपी खुद को अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ितों से संपर्क करते थे। इसके बाद कथित रूप से फर्जी सरकारी दस्तावेज और आधिकारिक दिखने वाले ईमेल भेजकर उनसे पैसे ऐंठे जाते थे।

पुलिस के अनुसार, गिरोह ने काम को अलग-अलग हिस्सों में बांट रखा था। एक टीम पीड़ितों के लैपटॉप और कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस लेने का काम करती थी, जबकि दूसरी टीम बैंकिंग जानकारी जुटाकर ठगी को अंजाम देती थी। जांच में सामने आया है कि कई मामलों में वॉलमार्ट और अमेजन के गिफ्ट कार्ड के माध्यम से भुगतान कराया जाता था, जिससे रकम को सीधे ट्रेस करना मुश्किल हो सके।

जांच अधिकारियों के अनुसार, गिरोह में काम करने वाले कर्मचारियों को अंग्रेजी बोलने की क्षमता के आधार पर चुना जाता था। पुलिस का कहना है कि आरोपी ऐसे युवाओं को भर्ती करते थे जो पहले बीपीओ सेक्टर में काम कर चुके हों और विदेशी ग्राहकों से बातचीत कर सकें। कथित रूप से कर्मचारियों को करीब ₹35 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था, लेकिन उन्हें कोई औपचारिक नियुक्ति पत्र नहीं दिया जाता था।

पुलिस के मुताबिक, गिरोह का कथित संचालक पुनीत वर्मा केवल छठी कक्षा तक शिक्षित है, जबकि गिरोह में शामिल अन्य कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता भी सीमित बताई गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि कम शैक्षणिक योग्यता वाले लोगों को किस प्रकार प्रशिक्षण देकर साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

जांच में हवाला नेटवर्क के इस्तेमाल के भी संकेत मिले हैं। पुलिस के अनुसार, ठगी की कथित रकम का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा हवाला माध्यम से विदेशों में बैठे अन्य साइबर अपराधियों तक भेजा जाता था, जबकि शेष रकम गिरोह अपने पास रखता था। पुलिस अब इस वित्तीय नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच कर रही है।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने इंटरनेट आधारित कॉलिंग सॉफ्टवेयर, आईबीएम डायलर, कॉलिंग स्क्रिप्ट, ईमेल टेम्पलेट, कथित फर्जी सरकारी दस्तावेज, कई लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जब्त डिजिटल उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि कॉल रिकॉर्ड, डेटा ट्रांसफर और अन्य गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

Future Crime Research Foundation से जुड़े साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर आधारित ठगी में अपराधी सोशल इंजीनियरिंग, डर पैदा करने वाली तकनीक और डिजिटल पहचान की नकल का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों में कॉल डेटा, डिजिटल डिवाइस, भुगतान ट्रेल और संचार रिकॉर्ड की जांच से पूरे नेटवर्क की पहचान करने में मदद मिलती है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि गिरफ्तारी या पुलिस के आरोप मात्र से अपराध सिद्ध नहीं होता। अभियोजन पक्ष को अदालत में डिजिटल साक्ष्य, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य प्रमाणों के आधार पर आरोप साबित करने होंगे। सभी आरोपियों को कानून के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।

पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। यदि जांच में अन्य आरोपी, विदेशी साइबर अपराधियों की भूमिका या बड़े वित्तीय नेटवर्क का खुलासा होता है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। गिरोह का पर्दाफाश करने वाली टीम को डीसीपी क्राइम की ओर से ₹25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की गई है।

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