इंग्लैंड की महिला बनकर दोस्ती, महंगे गिफ्ट और विदेशी मुद्रा भेजने का झांसा; फिर Customs और Income Tax अधिकारी बनकर वसूली, STF ने 11 मोबाइल, लैपटॉप समेत डिजिटल सबूत किए बरामद

फर्जी Facebook दोस्ती ने लखनऊ के व्यक्ति को लगाया ₹68 लाख का चूना, Nigerian आरोपी गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
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लखनऊ: इंग्लैंड की रहने वाली महिला के नाम से बनाई गई फर्जी Facebook प्रोफाइल के जरिए दोस्ती और फिर महंगे गिफ्ट व विदेशी मुद्रा भेजने का झांसा देकर लखनऊ के एक व्यक्ति से कथित तौर पर करीब ₹68 लाख की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इस मामले में कथित गिरोह के एक प्रमुख सदस्य 37 वर्षीय Nigerian नागरिक Nwogu Obed Osinachi को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले विदेशी पहचान वाली फर्जी महिला प्रोफाइल बनाई, फिर पीड़ित से भावनात्मक संबंध स्थापित किया और इसके बाद Customs, Income Tax तथा अन्य अधिकारियों की भूमिका निभाकर लगातार रकम वसूली।

आरोपी Nwogu Obed Osinachi मूल रूप से Nigeria के Imo State का रहने वाला है। उसे 11 अगस्त को दोपहर करीब 1.50 बजे दिल्ली के Burari स्थित Kamal Vihar के एक मकान से गिरफ्तार किया गया। वह Lucknow Commissionerate के Madeyganj थाने में दर्ज FIR No. 33/2026 में वांछित था।

जांच के अनुसार, Daliganj निवासी पीड़ित से Facebook पर “Doris William” नाम की प्रोफाइल के जरिए संपर्क किया गया था। प्रोफाइल में महिला के इंग्लैंड से होने का दावा किया गया। शुरुआत में बातचीत सामान्य दोस्ती की तरह आगे बढ़ी। धीरे-धीरे कथित जालसाजों ने पीड़ित का भरोसा हासिल किया और उसे विश्वास दिलाया कि वह विदेश में रहने वाली एक वास्तविक महिला से बातचीत कर रहा है।

कुछ समय बाद कथित महिला ने पीड़ित को महंगे गिफ्ट, डॉलर और पाउंड भेजने की बात कही। पीड़ित को बताया गया कि उसके लिए एक पार्सल भेजा जा रहा है, जिसमें कीमती सामान और विदेशी मुद्रा है। इसके बाद ठगी की अगली परत शुरू हुई। जालसाजों ने दावा किया कि एयरपोर्ट पर Customs अधिकारियों ने पार्सल रोक लिया है क्योंकि उसमें महंगे गिफ्ट और विदेशी मुद्रा मिली है।

इसके बाद आरोपियों ने अपनी पहचान बदल ली और पीड़ित से Customs तथा Income Tax अधिकारियों के रूप में संपर्क करना शुरू किया। उसे बताया गया कि पार्सल छुड़ाने के लिए अलग-अलग शुल्क जमा करने होंगे। कथित तौर पर Customs Duty, Income Tax, GST और अन्य शुल्क के नाम पर बार-बार भुगतान करने के लिए कहा गया। पीड़ित धीरे-धीरे इस फर्जी प्रक्रिया में फंसता गया और रकम ट्रांसफर करता रहा।

ठगी को वास्तविक दिखाने के लिए गिरोह ने कथित तौर पर ब्रिटेन में जारी होने वाले RBS प्रमाणपत्र की एक फर्जी कॉपी भी पीड़ित को भेजी। इससे उसे विश्वास हुआ कि पूरा मामला किसी वास्तविक बैंकिंग या कस्टम प्रक्रिया से जुड़ा है। STF के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान लखनऊ निवासी ने करीब ₹68 लाख ट्रांसफर कर दिए।

मामले की जांच आगे बढ़ी तो STF की टीम दिल्ली में सक्रिय Nigerian नागरिकों के एक कथित नेटवर्क तक पहुंची। इसी मामले में STF पहले Uchenwa को 15 मई और Obase Prosper को 18 जुलाई को गिरफ्तार कर चुकी थी। Osinachi लगातार फरार था। तकनीकी विश्लेषण और खुफिया इनपुट के आधार पर STF की साइबर टीम को उसके Kamal Vihar में छिपे होने की जानकारी मिली, जिसके बाद वहां छापा मारकर उसे गिरफ्तार किया गया।

तलाशी के दौरान STF ने 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पासपोर्ट, चार ATM कार्ड और 34 स्क्रीनशॉट बरामद किए। इन स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर विदेशी महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो मिले, जिनका इस्तेमाल फर्जी Facebook और Instagram प्रोफाइल बनाने में किया जाता था। जांचकर्ताओं को Customs अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल करने से संबंधित सामग्री भी मिली।

पूछताछ में Osinachi ने कथित तौर पर बताया कि वह 2022 में Business Visa पर भारत आया था, लेकिन वीजा समाप्त होने के बाद भी दिल्ली में रह रहा था। STF के मुताबिक, दिल्ली में रहने वाले अन्य Nigerian नागरिकों ने उसे इस कथित साइबर ठगी नेटवर्क से जोड़ा था।

STF के अनुसार, गिरोह US और UK नागरिकों के नाम पर फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर भारतीय पुरुषों और महिलाओं से दोस्ती करता था। भावनात्मक भरोसा कायम होने के बाद महंगे गिफ्ट और विदेशी मुद्रा भेजने की कहानी शुरू की जाती थी। इसके बाद एयरपोर्ट पर पार्सल रोके जाने और Customs या Tax भुगतान की जरूरत बताकर रकम मांगी जाती थी।

आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि लखनऊ के व्यक्ति से हुई ₹68 लाख की ठगी Uchenwa और Prosper के साथ मिलकर की गई थी। जांचकर्ताओं को संदेह है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में लोगों को निशाना बना चुका है। पीड़ितों से रकम हासिल करने के लिए किराए पर लिए गए भारतीय बैंक खातों का इस्तेमाल किए जाने की भी आशंका है।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, ऐसे मामलों में अपराधी पहले भावनात्मक भरोसा बनाते हैं और फिर उसी भरोसे को आर्थिक ठगी में बदल देते हैं। विदेशी पहचान, रिश्ते, महंगे गिफ्ट और फर्जी सरकारी दस्तावेजों का इस्तेमाल पीड़ित को यह विश्वास दिलाने के लिए किया जाता है कि सामने वाला व्यक्ति वास्तविक है।

STF अब आरोपी के बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है। बरामद उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी कराई जाएगी। जांच का उद्देश्य ठगी की रकम का प्रवाह पता लगाने के साथ गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित पीड़ितों की पहचान करना है। मामला दिखाता है कि सोशल मीडिया पर शुरू हुई एक सामान्य दिखने वाली दोस्ती किस तरह सुनियोजित डिजिटल धोखाधड़ी में बदल सकती है।

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