लखनऊ: राजधानी लखनऊ में एक चिंताजनक साइबर अपराध मामले में 78 वर्षीय समाजसेवी वीना खुराना (कृष्णानगर सेक्टर-4) को चार दिन तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखा गया और उनसे आठ लाख रुपये वसूले गए। सौभाग्य से, सतर्क बैंक कर्मचारी ने उनके खाते से अतिरिक्त पांच लाख रुपये निकालने के प्रयास को विफल कर दिया। खुराना ने 31 मार्च को दो ठगों के खिलाफ साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज कराई।
खुराना के अनुसार, उन्हें 4 मार्च की दोपहर 1:40 बजे एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को लखनऊ पुलिस हेडक्वार्टर का सब-इंस्पेक्टर विवेक चौहान बताया। उन्होंने खुराना से पूछा कि क्या वे अपने मोबाइल नंबर का उपयोग कर रही हैं। खुराना ने हां कहा, तो कॉल करने वाले ने उनके परिवार की जानकारी जुटाई और दावा किया कि 25 मार्च 2025 को उनके आधार कार्ड से दो सिम कार्ड खरीदे गए हैं।
इसके बाद ठग ने खुराना को धमकी दी कि महाराष्ट्र एटीएस ने आतंकी अफजल खान को गिरफ्तार किया है और उनके नाम पर दो सिम आईएसआई के आतंकी कार्यों में इस्तेमाल हो रही हैं। उन्होंने कहा कि खुराना को मुंबई एटीएस में बयान दर्ज कराना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होगी। डर के मारे खुराना ने उनकी बात मान ली।
कुछ ही देर बाद, खुराना के व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आई, जिसमें खुद को एटीएस अधिकारी प्रवीण सूद बताने वाले ठग ने कहा कि उनसे पूछताछ होगी और किसी को कुछ बताए बिना पालन करना होगा। डर से खुराना ने उनकी बात मानी। 4 मार्च दोपहर 2 बजे से 7 मार्च की सुबह तक ठगों ने उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और सुरक्षा का हवाला देते हुए आरटीजीएस के माध्यम से आठ लाख रुपये वसूले।
प्रारंभिक ठगी के बाद, ठगों ने खुराना से अतिरिक्त पांच लाख रुपये देने का दबाव बनाया। जब वे आलमबाग स्थित आईसीआईसीआई बैंक शाखा में उक्त राशि निकालने पहुंचीं, तो बैंककर्मी को संदेह हुआ। खुराना ने पूरी घटना बताई और बैंककर्मी की सतर्कता के कारण उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज कराई, जिससे और बड़ी हानि रोकी गई।
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साइबर क्राइम अधिकारियों ने बताया कि पीड़िता द्वारा ट्रांसफर की गई राशि के स्रोत अकाउंट्स की जांच की जा रही है। समय की देरी के कारण तत्काल फ्रीजिंग संभव नहीं थी, लेकिन जांच तेजी से जारी है।
विशेषज्ञ की सलाह: “साइबर ठग बुजुर्गों और समाजसेवियों के डर और संवेदनशीलता का फायदा उठाते हैं। ऐसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों में सतर्कता, तुरंत पुलिस रिपोर्ट और बैंक में सावधानी सबसे प्रभावी उपाय हैं,” बताते हैं renowned cyber crime expert and former IPS officer Prof. Triveni Singh। वे कहते हैं कि डिजिटल और बैंक सुरक्षा की जागरूकता से ही बड़े वित्तीय नुकसान से बचा जा सकता है।
ठगी से बचाव के उपाय:
1. अनजान नंबर से आने वाली कॉल पर हमेशा सतर्क रहें।
2. यदि कोई आपके नाम से सिम या पार्सल बुक होने का दावा करे, तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
3. किसी भी डिजिटल या बैंक लेनदेन में साइबर क्राइम थाना या स्थानीय पुलिस से सत्यापन कराएं।
4. ठगी की स्थिति में टोल फ्री नंबर 1930 या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
वीना खुराना का मामला एक बार फिर स्पष्ट करता है कि साइबर ठगी किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। सतर्कता और समय पर कार्रवाई से बड़े वित्तीय नुकसान से बचा जा सकता है।
