ऑनलाइन भर्ती में बढ़ता खतरा; ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सहारे रच रहे भरोसेमंद जाल, विशेषज्ञों ने दी सख्त चेतावनी

फोनपे हैक से ₹38,900 साफ, ‘ऑर्डर रिफंड’ के नाम पर ₹95,999 की ठगी: लखनऊ में साइबर जाल के दो चेहरे उजागर

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By Roopa
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लखनऊ: राजधानी में साइबर अपराधियों के बदलते तौर-तरीकों ने एक बार फिर लोगों की डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आशियाना थाना क्षेत्र में सामने आए दो अलग-अलग मामलों में ठगों ने एक ओर डिजिटल वॉलेट को हैक कर रकम उड़ाई, तो दूसरी ओर फूड डिलीवरी ऑर्डर कैंसिल कराने के बहाने बैंक खाते को खाली कर दिया। दोनों घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि साइबर अपराधी अब तकनीक के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक चालों का भी तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं।

पहला मामला मोहनलालगंज क्षेत्र से जुड़ा है, जहां भूपेन्द्र कुमार नाम के युवक के साथ डिजिटल वॉलेट फ्रॉड हुआ। पीड़ित के मुताबिक 30 मार्च 2026 को उनके मोबाइल पर अचानक OTP आने शुरू हो गए। इसके साथ ही आधार बायोमेट्रिक और ईमेल पर दूसरे डिवाइस से लॉगिन का अलर्ट भी मिला। जब तक वह कुछ समझ पाते, उनके फोनपे अकाउंट से चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल ₹38,900 निकाल लिए गए।

ट्रांजैक्शन में ₹15,000, ₹8,000, ₹10,000 और ₹5,900 की रकम शामिल थी। पीड़ित ने तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई और ऑनलाइन पोर्टल पर भी पूरी जानकारी अपलोड की। इसके साथ ही बैंक से संपर्क कर अपने खाते की गतिविधियों को तत्काल रोकने की कार्रवाई की। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि किसी तरह से उनके अकाउंट की लॉगिन डिटेल्स या OTP तक साइबर अपराधियों की पहुंच बन गई थी।

दूसरा मामला और भी ज्यादा खतरनाक ट्रेंड की ओर इशारा करता है, जिसमें ठग ऑनलाइन सर्विस प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर लोगों को फंसा रहे हैं। सेक्टर-आई, एल्डिको उद्यान-1 निवासी निगम कुमार ने बताया कि उन्होंने 8 मार्च को एक फूड डिलीवरी ऐप के जरिए ऑर्डर किया था। डिलीवरी में देरी होने पर उन्होंने ऑर्डर कैंसिल कर दिया और इंटरनेट पर कस्टमर केयर नंबर सर्च किया।

यहीं से ठगी का जाल शुरू हुआ। कॉल का जवाब न मिलने के कुछ देर बाद उन्हें एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को कस्टमर सपोर्ट एग्जीक्यूटिव बताते हुए एक फाइल भेजी और कहा कि इसे ओपन करते ही रिफंड प्रोसेस हो जाएगा। जैसे ही पीड़ित ने फाइल खोली, उनके मोबाइल में मैलवेयर सक्रिय हो गया और कुछ ही मिनटों में दो ट्रांजैक्शन के जरिए ₹95,999 उनके खाते से निकाल लिए गए।

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इस तरह के मामलों में साइबर अपराधी ‘रिमोट एक्सेस’ या ‘मैलिशियस APK फाइल’ का इस्तेमाल कर मोबाइल डिवाइस पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं। इसके बाद वे OTP, बैंकिंग ऐप और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाकर खाते से रकम साफ कर देते हैं।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि ठग अक्सर गूगल सर्च रिजल्ट में फर्जी कस्टमर केयर नंबर डाल देते हैं, जिससे लोग सीधे उनके जाल में फंस जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की ठगी में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ सबसे बड़ा हथियार बन चुका है, जहां भरोसा जीतकर यूजर से खुद ही गलती करवाई जाती है।

प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “साइबर अपराधी अब तकनीकी हैकिंग से ज्यादा मानव व्यवहार का फायदा उठा रहे हैं। OTP, लिंक, APK फाइल और फर्जी कॉल के जरिए वे यूजर को मानसिक रूप से भ्रमित कर देते हैं, जिससे वह खुद ही अपनी सुरक्षा तोड़ देता है।”

दोनों मामलों में पीड़ितों की शिकायत पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। साइबर टीम ट्रांजैक्शन की डिटेल्स, बैंक खातों और संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान लिंक या फाइल को ओपन न करें, गूगल से मिले कस्टमर केयर नंबर की सत्यता की जांच करें और कभी भी OTP या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। थोड़ी सी सावधानी ही बड़े नुकसान से बचा सकती है।

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