LIC पर ₹7,000 करोड़ टैक्स नोटिस, अपील की तैयारी

LIC को झटका: असेसमेंट बदलावों के बाद ₹7,000 करोड़ की टैक्स देनदारी, कंपनी करेगी अपील

Team The420
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देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India (LIC) को आयकर विभाग से बड़ा झटका लगा है। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए विभाग ने कंपनी पर ₹7,000 करोड़ से अधिक की टैक्स देनदारी का डिमांड ऑर्डर जारी किया है। इस डिमांड में ₹6,146 करोड़ आयकर और ₹953 करोड़ ब्याज शामिल है। यह मांग असेसमेंट प्रक्रिया के दौरान किए गए विभिन्न समायोजनों और गणनाओं के आधार पर सामने आई है।

कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में स्पष्ट किया है कि वह इस आदेश को चुनौती देगी और उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग करते हुए अपील दायर करेगी। LIC के मुताबिक, यह मामला अभी अंतिम नहीं है और अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष सुनवाई के बाद ही इसका अंतिम निपटारा होगा।

मामले की पृष्ठभूमि में आयकर विभाग द्वारा असेसमेंट के दौरान किए गए कई अहम बदलाव शामिल हैं, जिनके चलते कंपनी की कुल टैक्स देनदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इनमें अंतरिम बोनस को आय में जोड़ना, जीवन सुरक्षा फंड से जुड़े घाटे को आय के रूप में शामिल करना और तथाकथित ‘नेगेटिव रिजर्व्स’ को भी आय मानना प्रमुख हैं। इन समायोजनों के कारण कंपनी की कर योग्य आय बढ़ गई, जिससे टैक्स मांग में तेज उछाल आया।

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इसके अलावा, विभाग ने आयकर अधिनियम की धारा 80M के तहत लिए गए कुछ डिडक्शनों को अस्वीकार कर दिया है। यह डिडक्शन आमतौर पर डिविडेंड आय पर राहत के रूप में लिया जाता है। साथ ही, स्रोत पर कर कटौती (TDS) जमा करने में देरी से जुड़े ब्याज को भी मान्य नहीं माना गया। इन सभी कारकों का संयुक्त प्रभाव LIC की टैक्स देनदारी पर पड़ा है।

हालांकि, कंपनी ने अपने बयान में यह भी साफ किया है कि इस टैक्स डिमांड का असर केवल मांगी गई राशि तक सीमित रहेगा और इससे उसके दैनिक संचालन या व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा। कंपनी ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि उसका कारोबार सामान्य रूप से जारी रहेगा और वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के टैक्स विवाद बड़ी कंपनियों के लिए असामान्य नहीं हैं, खासकर तब जब असेसमेंट के दौरान नियमों की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आती हैं। बीमा क्षेत्र में लेखांकन और कराधान से जुड़े नियम अपेक्षाकृत जटिल होते हैं, जहां विभिन्न मदों को लेकर मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं। ऐसे मामलों में कंपनियां आमतौर पर अपीलीय मंच का सहारा लेती हैं और अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होता है।

निवेशकों के नजरिए से देखा जाए तो इस खबर का अल्पकालिक असर शेयर पर दबाव के रूप में दिखाई दे सकता है। हालांकि, दीर्घकालिक प्रभाव काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी की अपील पर क्या फैसला आता है। यदि अपीलीय प्राधिकरण LIC के पक्ष में निर्णय देता है, तो टैक्स देनदारी में कमी आ सकती है। वहीं, यदि फैसला कंपनी के खिलाफ जाता है, तो उसे यह राशि चुकानी पड़ सकती है, जिससे नकदी प्रवाह पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल, बाजार की नजर इस बात पर बनी हुई है कि कंपनी कब अपील दाखिल करती है और इस मामले में उसकी कानूनी रणनीति क्या रहती है। आने वाले समय में यह विवाद LIC के शेयर प्रदर्शन और निवेशकों के भरोसे पर भी असर डाल सकता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बाजार पहले से ही वैश्विक अनिश्चितताओं और उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में किसी भी बड़े टैक्स विवाद का प्रभाव निवेशकों की धारणा पर पड़ना स्वाभाविक है।

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