कुरुक्षेत्र: हरियाणा के कुरुक्षेत्र में सरकारी धान के बड़े गबन का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है। एक राइस मिल में भौतिक सत्यापन के दौरान करीब ₹11.25 करोड़ मूल्य का धान और संबंधित सामग्री गायब पाई गई। इस मामले में चार लोगों के खिलाफ गबन और आपराधिक विश्वासघात का मामला दर्ज किया गया है।
जांच के अनुसार, संबंधित राइस मिल को खरीफ विपणन सत्र 2025–26 के दौरान सरकारी एजेंसी द्वारा बड़ी मात्रा में धान मिलिंग के लिए आवंटित किया गया था। लेकिन हालिया निरीक्षण में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर सामने आया, जिससे पूरे घोटाले का खुलासा हुआ।
भौतिक सत्यापन में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
अधिकारियों द्वारा कराए गए भौतिक सत्यापन में पाया गया कि राइस मिल में 38,894.92 क्विंटल धान की कमी है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹11.11 करोड़ है। इसके अलावा, लगभग 17,860 नए बोरे (बारदाना) भी गायब पाए गए, जिनकी कीमत करीब ₹14.24 लाख आंकी गई है।
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इस तरह कुल मिलाकर सरकार को लगभग ₹11.25 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। यह गड़बड़ी सामान्य लेखा त्रुटि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आर्थिक अनियमितता की ओर इशारा करती है।
सरकारी आवंटन के बावजूद नहीं मिला पूरा स्टॉक
जांच में यह भी सामने आया कि राइस मिल को कुल 59,115 क्विंटल धान मिलिंग के लिए दिया गया था। लेकिन निरीक्षण के दौरान उपलब्ध स्टॉक इस आंकड़े से काफी कम पाया गया।
रिकॉर्ड में दर्शाए गए आंकड़ों और वास्तविक भंडारण के बीच इस बड़े अंतर ने अधिकारियों को सतर्क कर दिया, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू की गई।
मिल संचालकों और गारंटरों पर शिकंजा
इस मामले में राइस मिल के दो साझेदारों और दो गारंटरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर सरकारी धान और संसाधनों का दुरुपयोग किया और उसे गबन कर लिया।
शिकायत के आधार पर दर्ज मामले में धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गबन में और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का गंभीर मामला
प्राथमिक जांच में इस पूरे घटनाक्रम को सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल सरकारी संसाधनों को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली और कृषि आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर डालती हैं।
यह भी आशंका जताई जा रही है कि धान को अवैध रूप से बाजार में बेचा गया हो या अन्य तरीकों से इसका उपयोग किया गया हो।
जांच जारी, वित्तीय लेनदेन खंगाले जा रहे
मामले की जांच जारी है और संबंधित वित्तीय लेनदेन, भंडारण रिकॉर्ड और सप्लाई चेन की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का फोकस अब इस बात पर है कि गबन की गई सामग्री कहां गई और इससे किसे लाभ पहुंचा।
जांच के दायरे को बढ़ाते हुए अन्य संभावित कड़ियों और नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि पूरे घोटाले का खुलासा किया जा सके।
विशेषज्ञों ने जताई कड़ी निगरानी की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए सरकारी गोदामों और मिलिंग यूनिट्स पर नियमित और पारदर्शी निगरानी जरूरी है।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार,
“आर्थिक अपराध अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर संगठित रूप ले रहे हैं। ऐसे मामलों में तकनीकी निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।”
सिस्टम सुधार की उठी मांग
यह मामला एक बार फिर सरकारी आपूर्ति प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर ऑडिट, डिजिटल रिकॉर्डिंग और सख्त निगरानी तंत्र से ही इस तरह के घोटालों पर रोक लगाई जा सकती है।
सरकारी धान के इस बड़े गबन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लापरवाही और मिलीभगत से सार्वजनिक संसाधनों को भारी नुकसान हो सकता है—जिसकी भरपाई अंततः आम जनता को ही करनी पड़ती है।
