खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में जिला सहकारी बैंक की ठीबगांव शाखा से ₹41.58 लाख के कथित गबन के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लगभग दो महीने से फरार चल रहे शाखा प्रबंधक राजेश राठौड़ को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी को सोमवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। अब जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर गबन की गई राशि की बरामदगी और पूरे वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करेंगी।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में अभी तक गबन की गई पूरी राशि बरामद नहीं हो सकी है। ऐसे में शाखा प्रबंधक से पूछताछ को जांच का सबसे अहम चरण माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि रिमांड के दौरान आरोपी से प्राप्त जानकारी के आधार पर धन के इस्तेमाल, संभावित ठिकानों और मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका का भी पता लगाया जा सकेगा।
इस बहुचर्चित गबन प्रकरण में इससे पहले बैंक की कैशियर रितु गोयल और सहायक गणक त्रयंबक वाणी को 15 जून को गिरफ्तार किया जा चुका है। दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था और वे फिलहाल जेल में हैं। पुलिस अब तीनों आरोपियों के बीच कथित मिलीभगत, बैंक रिकॉर्ड में की गई हेराफेरी और धन के प्रवाह की जांच कर रही है।
जैतापुर थाना पुलिस के अनुसार, शाखा प्रबंधक राजेश राठौड़ को पुलिस रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ की जाएगी। जांच का प्रमुख उद्देश्य गबन की गई ₹41.58 लाख की राशि की बरामदगी करना है। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि धन का उपयोग कहां और किस उद्देश्य से किया गया तथा क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भी संलिप्तता रही है।
मामले का खुलासा मई के अंतिम सप्ताह में हुआ था, जब बैंक की कैशियर रितु गोयल 25 और 26 मई के बीच अचानक बैंक से अनुपस्थित हो गई। उसके बाद बैंक प्रबंधन ने शाखा के वित्तीय अभिलेखों और नकदी का मिलान कराया। प्रारंभिक जांच में बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आने पर बैंक ने तत्काल आंतरिक जांच शुरू कर दी।
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बैंक द्वारा गठित जांच समिति ने लगातार पांच दिनों तक खातों, नकदी, दस्तावेजों और लेनदेन का विस्तृत सत्यापन किया। जांच के दौरान ₹41.58 लाख के कथित गबन की पुष्टि होने पर समिति ने अपनी रिपोर्ट बैंक प्रबंधन को सौंपी। इसके बाद बैंक ने कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर 29 मई को वर्तमान शाखा प्रबंधक राजेश गुप्ता की शिकायत पर जैतापुर थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(5) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने साक्ष्य एकत्र करने, बैंक रिकॉर्ड की जांच और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ के बाद पहले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि शाखा प्रबंधक राजेश राठौड़ घटना के बाद से फरार चल रहा था। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच को महत्वपूर्ण बढ़त मिली है।
जांच एजेंसियां बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड, खातों के संचालन, नकदी के आवागमन और संभावित वित्तीय लाभार्थियों की भी जांच कर रही हैं। यदि पूछताछ के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच जारी है तथा बरामदगी और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि बैंकिंग संस्थानों में वित्तीय गबन के मामलों में केवल धन की बरामदगी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि पूरे लेनदेन की श्रृंखला और धन के अंतिम लाभार्थियों की पहचान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मजबूत आंतरिक ऑडिट प्रणाली, नियमित वित्तीय निगरानी, डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण और समय पर जांच से ऐसे मामलों का शीघ्र खुलासा किया जा सकता है तथा भविष्य में इस प्रकार की वित्तीय अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
