तिरुवनंतपुरम: केरल सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एम. आर. अजीत कुमार को यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर कथित हमले के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित रहने तक निलंबित कर दिया है। सरकार का यह निर्णय राज्य पुलिस प्रमुख द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया गया। इस कार्रवाई के साथ ही अजीत कुमार की पुलिस महानिदेशक (DGP) पद पर प्रस्तावित पदोन्नति भी अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई है। राज्य सरकार का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष अनुशासनात्मक प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार राज्य पुलिस प्रमुख ने जांच रिपोर्ट गृह विभाग को भेजी थी, जहां उसका विस्तृत परीक्षण किया गया। इसके बाद रिपोर्ट गृह मंत्री के समक्ष रखी गई। गृह मंत्री की अनुशंसा पर मुख्यमंत्री ने अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने को मंजूरी दे दी। आदेश जारी होने के साथ ही अजीत कुमार की सेवा संबंधी पदोन्नति प्रक्रिया भी रोक दी गई।
यह मामला उस घटना से जुड़ा है जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की सुरक्षा में तैनात कर्मियों पर अलप्पुझा में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट करने का आरोप लगा था। इस घटना की जांच के दौरान अजीत कुमार की भूमिका की भी समीक्षा की गई। जांच रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर सरकार ने आगे की विभागीय कार्रवाई आवश्यक मानी।
सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया था जिनमें कहा गया था कि सरकार जानबूझकर जांच रिपोर्ट पर निर्णय लेने में देरी कर रही है ताकि संबंधित अधिकारी की पदोन्नति सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में स्पष्ट कहा था कि जांच रिपोर्ट पर प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार चल रही है और किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं किया गया।
सरकारी प्रक्रिया के अनुसार जांच रिपोर्ट पहले राज्य पुलिस प्रमुख को सौंपी गई थी। इसके बाद इसे गृह विभाग भेजा गया, जहां अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं सतर्कता) ने इसका परीक्षण किया। सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रिपोर्ट गृह मंत्री के समक्ष प्रस्तुत की गई, जिसके आधार पर निलंबन और विभागीय कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
राज्य सरकार के आदेश के अनुसार अनुशासनात्मक जांच पूरी होने तक अजीत कुमार निलंबित रहेंगे। इस दौरान विभागीय नियमों के तहत उनके विरुद्ध आरोपों की विस्तृत जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों तथा संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विभागीय प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और सेवा नियमों के अनुरूप संचालित की जाएगी।
प्रशासनिक मामलों के जानकारों का कहना है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी के विरुद्ध जांच लंबित रहने के दौरान निलंबन और पदोन्नति पर रोक लगाना एक स्थापित प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य जांच को प्रभावित होने से बचाना और निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित करना होता है। अंतिम कार्रवाई जांच रिपोर्ट, साक्ष्यों और विभागीय सुनवाई के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाती है।
इस घटनाक्रम ने राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है। विपक्ष ने सरकार के फैसले को देर से उठाया गया कदम बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि उसने पूरी प्रक्रिया कानून और सेवा नियमों के अनुरूप अपनाई है। अब विभागीय जांच के परिणाम पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि उसी के आधार पर यह तय होगा कि अधिकारी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी और उनकी पदोन्नति से संबंधित निर्णय कब और किस रूप में लिया जाएगा।
