इडुक्की (केरल): केरल के इडुक्की जिले में चेरुथोनी के पास स्थित थोप्रामकुडी को-ऑपरेटिव बैंक में कथित तौर पर ₹10 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। को-ऑपरेशन विभाग की जांच के बाद इडुक्की ज्वाइंट रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज की शिकायत पर मुरिक्कस्सेरी पुलिस ने बैंक के पूर्व पदाधिकारियों और कर्मचारियों समेत 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपों की जांच जारी है और जिम्मेदारी साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय की जाएगी।
मामले की जांच को-ऑपरेशन विभाग के यूनिट इंस्पेक्टर जैमोन ए.वी. द्वारा की गई। एफआईआर में बैंक के पूर्व अध्यक्ष शाइन थॉमस, सचिव सुनीता कुमारी, जूनियर क्लर्क अम्मिनी माधवन, सीनियर क्लर्क विष्णु मोहन और बैंक से जुड़े नौ अस्थायी कर्मचारियों के नाम शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, कथित अनियमितताएं वर्ष 2021 से 2026 के बीच हुईं। जांच अधिकारियों का आरोप है कि बैंक की ओर से कुछ ऋण रिश्तेदारों, ज्वाइंट लायबिलिटी ग्रुप (JLG) और सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) के नाम पर स्वीकृत किए गए। जांच में कुछ ऋणों को कथित रूप से फर्जी पहचान के आधार पर जारी किए जाने की बात भी सामने आई है।
को-ऑपरेशन विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं की कुल राशि ₹10.42 करोड़ आंकी गई है। जांच निष्कर्षों के अनुसार, बैंक सचिव पर लगभग ₹3.17 करोड़ की राशि की जिम्मेदारी बताई गई है, जबकि पूर्व अध्यक्ष से करीब ₹82 लाख की राशि जुड़ी होने का दावा किया गया है। जांच में यह आरोप भी लगाया गया है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने बैंक से एडवांस के रूप में बड़ी रकम निकाली, लेकिन उसका भुगतान नहीं किया।
जांच रिपोर्ट के बाद बैंक के तीन स्थायी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। बैंक की वित्तीय स्थिति भी जांच के दायरे में आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक पर केरल बैंक का लगभग ₹20 करोड़ और जमाकर्ताओं का करीब ₹10 करोड़ बकाया है। वहीं, बैंक के पास लगभग ₹13 करोड़ के ऋणों की वसूली लंबित बताई जा रही है।
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बैंक ने ग्राहकों से बड़ी मात्रा में जमा राशि जुटाई थी, लेकिन अब जमाकर्ताओं को भुगतान करने में वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है। जांच एजेंसियां ऋण रिकॉर्ड, बैंक खाते, वित्तीय दस्तावेज और अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच कर रही हैं, ताकि कथित अनियमितताओं की वास्तविक सीमा का पता लगाया जा सके।
इस मामले ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है, क्योंकि बैंक का नियंत्रण कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) से जुड़े प्रतिनिधियों के पास रहा है। वर्ष 2025 के चुनावों के बाद लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) ने सत्ता बरकरार रखी और बैंक में 11 सदस्यीय निदेशक मंडल का गठन किया गया, जिसमें नौ सदस्य CPI(M) और दो सदस्य केरल कांग्रेस (एम) से जुड़े थे।
आरोपों के बाद केरल कांग्रेस (एम) के प्रतिनिधि जॉर्ज अंबाझम और साजी पुन्नावेलिकुन्नेल ने निदेशक मंडल से इस्तीफा दे दिया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि उनके प्रतिनिधि हाल ही में बोर्ड में शामिल हुए थे और उन्हें कथित वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी नहीं थी।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित गड़बड़ी केवल कुछ अधिकारियों तक सीमित थी या बैंक के संचालन में किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका थी। जांच के दौरान ऋण स्वीकृति प्रक्रिया, लाभार्थियों का विवरण, भुगतान रिकॉर्ड और आंतरिक प्रशासनिक निर्णयों की भी समीक्षा की जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी मामले में एफआईआर दर्ज होना या जांच के दौरान लगे आरोप अपने आप में अपराध साबित नहीं करते। अभियोजन पक्ष को अदालत में दस्तावेजी साक्ष्य, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य कानूनी प्रमाणों के आधार पर आरोप साबित करने होंगे।
अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कथित वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
