छत्तीसगढ़ की राज्य ऑडिट रिपोर्ट में 11 नगरीय निकायों में राजस्व वसूली की चूक से करीब ₹10 करोड़ के नुकसान का खुलासा हुआ है।

100 किलो क्विनोआ बीज का भुगतान, मिली सिर्फ 10 किलो खेप; उपभोक्ता आयोग ने विक्रेता को ₹25,213 लौटाने का दिया आदेश

Team The420
5 Min Read

नई दिल्ली: केरल के एक जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक ऑर्गेनिक खाद्य विक्रेता को आदेश दिया है कि वह एक ग्राहक को कुल ₹25,213 का भुगतान करे। आयोग ने पाया कि विक्रेता ने 100 किलोग्राम क्विनोआ बीज सहित अन्य कृषि उत्पादों का पूरा भुगतान लेने के बावजूद अधिकांश सामान की आपूर्ति नहीं की और बाद में धन भी वापस नहीं किया। आयोग ने इसे सेवा में स्पष्ट कमी (Deficiency in Service) माना।

आयोग की अध्यक्ष बिंदु आर तथा सदस्य बीना एम और ए.एस. सुभगन की पीठ ने 8 जुलाई को पारित आदेश में कहा कि किसी उपभोक्ता से भुगतान प्राप्त करने के बाद सामान की आपूर्ति न करना और राशि वापस न करना उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सेवा में गंभीर कमी है। ऐसे मामलों में उपभोक्ता धनवापसी, मुआवजे और मुकदमे के खर्च का हकदार होता है।

India’s Largest Cybercrime Conference Nears: FutureCrime Summit 2026 Set for 6–7 August at Bharat Mandapam

मामले के अनुसार शिकायतकर्ता ने 26 अप्रैल 2025 को 100 किलोग्राम क्विनोआ बीज, 25 किलोग्राम तिल, 1 किलोग्राम अमरंथा चावल (नमूना) और 1 किलोग्राम अलसी के बीज का ऑर्डर दिया था। इन वस्तुओं के लिए उसने विभिन्न ऑनलाइन लेनदेन के माध्यम से कुल ₹13,063 का भुगतान किया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि कई बार संपर्क करने के बावजूद समय पर सामान नहीं भेजा गया। पहले विक्रेता ने स्टॉक उपलब्ध न होने की बात कही और बाद में दावा किया कि पार्सल गलत पते पर भेज दिया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार 30 मई 2025 को जब एक पार्सल मिला तो उसमें 100 किलोग्राम के बजाय केवल 10 किलोग्राम क्विनोआ बीज थे। विक्रेता ने शेष सामान कुछ घंटों में भेजने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में न तो कोई अतिरिक्त खेप भेजी गई और न ही फोन या संदेशों का जवाब दिया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और धनवापसी के साथ मुआवजे की मांग की।

विक्रेता ने आयोग के समक्ष आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत “उपभोक्ता” की श्रेणी में नहीं आता। उसका दावा था कि वास्तविक ऑर्डर केवल 20 किलोग्राम अलसी के बीज और 10 किलोग्राम क्विनोआ बीज का था, जिसकी कुल कीमत ₹2,583 थी और वह लॉजिस्टिक कंपनी के माध्यम से भेज दिया गया था।

हालांकि आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता ने ₹13,063 का भुगतान किया था, जबकि विक्रेता अपने दावों के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। आयोग ने यह भी माना कि बीज आजीविका और स्वरोजगार के उद्देश्य से खरीदे गए थे, न कि बड़े पैमाने के व्यावसायिक उपयोग के लिए। इसलिए शिकायतकर्ता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ता की परिभाषा में आता है।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि भुगतान लेने के बावजूद सामान की आपूर्ति न करना और धन वापस न करना सेवा में स्पष्ट कमी है। इसी आधार पर विक्रेता को ₹12,213 की धनवापसी, ₹8,000 मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए मुआवजा तथा ₹5,000 मुकदमे के खर्च के रूप में देने का निर्देश दिया गया। आयोग ने आदेश दिया कि यह पूरी राशि 30 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को अदा की जाए।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला ऑनलाइन खरीदारी और कृषि उत्पादों की आपूर्ति से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण है। यह स्पष्ट करता है कि यदि कोई विक्रेता भुगतान प्राप्त करने के बाद स्टॉक की कमी, गलत डिलीवरी या अन्य कारणों का हवाला देकर सामान नहीं देता और धन भी वापस नहीं करता, तो उसे उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जा सकता है। साथ ही, यदि कोई व्यक्ति स्वरोजगार या आजीविका के उद्देश्य से सामान खरीदता है और वह बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधि का हिस्सा नहीं है, तो उसे भी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा।

हमसे जुड़ें

Share This Article