केजरीवाल 'शीशमहल': CAG ने खोली पोल

CAG रिपोर्ट में केजरीवाल के आधिकारिक आवास का खर्च 342% बढ़कर ₹33.66 करोड़ पहुंचा

Team The420
4 Min Read

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास के नवीनीकरण को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में बड़ी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 6 फ्लैगस्टाफ रोड स्थित इस आवास के नवीनीकरण पर कुल ₹33.66 करोड़ खर्च हुए, जो प्रारंभिक अनुमान ₹7.91 करोड़ से 342% अधिक हैं। यह रिपोर्ट विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा पेश की गई।

ऑडिट में यह भी बताया गया कि कुल खर्च में से ₹18.88 करोड़ “उच्च गुणवत्ता, कलात्मक, एंटीक और सजावटी” वस्तुओं पर किए गए। रिपोर्ट में सवाल उठाया गया कि क्या इस तरह के खर्च सरकारी आवास के लिए आवश्यक थे।

प्रशासनिक मंजूरी से पहले ही हुआ खर्च

रिपोर्ट में बताया गया कि कई कार्यों के पूरा होने के बाद ही प्रशासनिक मंजूरी और व्यय स्वीकृति दी गई। लगभग ₹9.34 करोड़ ऐसे कार्यों पर खर्च किए गए, जिनकी मंजूरी दो महीने बाद दी गई, जिससे बिना पूर्व स्वीकृति वित्तीय दायित्व खड़ा हो गया।

इसके अलावा, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) ने परियोजना में कई बदलाव किए। स्टाफ ब्लॉक के निर्माण की योजना थी, लेकिन इसके बजाय सात सर्वेंट क्वार्टर किसी अन्य स्थान पर बनाए गए। वहीं, कैंप ऑफिस की संरचना स्थायी से अर्ध-स्थायी में बदल दी गई।

FCRF Launches Premier CISO Certification Amid Rising Demand for Cybersecurity Leadership

बढ़ाया गया क्षेत्रफल और बदलें मानक

CAG ने पाया कि निर्माण के दौरान भवन का क्षेत्रफल 1,397 वर्गमीटर से बढ़ाकर 1,905 वर्गमीटर कर दिया गया, यानी लगभग 36% की वृद्धि। इसके साथ ही निर्माण में प्रयुक्त सामग्री और डिजाइन को उच्च श्रेणी के कलात्मक और एंटीक मटेरियल में बदल दिया गया।

इन बदलावों से लागत में वृद्धि हुई और PWD को प्रारंभिक अनुमान चार बार संशोधित करने पड़े। इसके बावजूद अतिरिक्त कार्यों के लिए अलग से टेंडर नहीं निकाला गया और एक ही ठेकेदार को ₹25.80 करोड़ के काम दिए गए।

‘शीशमहल’ बना राजनीतिक मुद्दा

इस नवीनीकरण को लेकर पहले भी राजनीतिक विवाद होते रहे हैं। विपक्षी दलों ने इसे “शीशमहल” कहकर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। यह मुद्दा 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी प्रमुख रूप से उठाया गया था।

AAP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह सरकारी आवास है, जिसे मुख्यमंत्री के उपयोग के लिए तैयार किया गया था, और इसमें कोई व्यक्तिगत अनियमितता नहीं है।

बार-बार नियम उल्लंघन के संकेत

CAG ने कहा कि मामला केवल लागत बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि कई प्रक्रियात्मक उल्लंघन भी सामने आए हैं। परियोजना को “अत्यावश्यक” बताकर तेजी से मंजूरी दी गई, लेकिन बाद में ऑडिट में कई खामियां उजागर हुईं।

विशेष रूप से, अतिरिक्त कार्यों के लिए प्रतिस्पर्धी टेंडरिंग नहीं की गई, जिससे सार्वजनिक धन के पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठते हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक बहस संभव

रिपोर्ट जारी होने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बहस बढ़ने की संभावना है। विपक्ष इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बता रहा है, जबकि AAP इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई करार दे रही है।

यह ऑडिट सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन पर बहस को फिर से जीवित कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक टकराव और संभावित जांच या कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

हमसे जुड़ें

Share This Article