टोडरपुर की शाकुंबरी शुगर एंड एलाइड इंडस्ट्रीज में वित्तीय अनियमितता के आरोप; करीब 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण मिल के बजाय निजी कंपनी में लगाने का दावा, किसानों का 20 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया

SIR के नाम पर फर्जी ऐप और ठगी की कॉल का खतरा, मतदाताओं की बैंकिंग जानकारी निशाने पर

Roopa
By Roopa
6 Min Read

बेंगलुरु: कर्नाटक में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच मतदाताओं को निशाना बनाने वाले फर्जी ऐप और संदिग्ध फोन कॉल सामने आने से साइबर ठगी का खतरा बढ़ गया है। अनुपस्थित, स्थानांतरित, दोहराव, मृत और अन्य (ASDDO) मतदाताओं की सूची सार्वजनिक होने के बाद कई अनधिकृत वेबसाइट और मोबाइल ऐप सामने आए हैं। इन पर लोग यह जांचने का दावा कर रहे हैं कि उनका नाम सूची में शामिल है या नहीं। कुछ ऐप यह भी दिखाने का दावा कर रहे हैं कि किसी मतदाता का गणना प्रपत्र ‘तार्किक विसंगति’ के कारण चिह्नित किया गया है।

इन अनधिकृत मंचों पर चुनावी जानकारी उपलब्ध होने से व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। कुछ वेबसाइट और ऐप मतदाताओं के नाम के साथ ईपीआईसी से जुड़ी जानकारी भी दिखा रहे हैं। चिंता इसलिए बढ़ी है क्योंकि कुछ मामलों में ऐसे प्लेटफॉर्म उन लोगों के नाम भी ASDDO सूची में दिखा रहे हैं, जिनका नाम मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित सूची में मौजूद नहीं है।

अनधिकृत ऐप और वेबसाइटों के बारे में पूछे जाने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नागरिकों से केवल आधिकारिक मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट के जरिए अपनी स्थिति जांचने को कहा है। अधिकारियों ने अनधिकृत मंचों पर दिखाई जा रही जानकारी पर भरोसा नहीं करने की सलाह दी है।

SIR के नाम पर संदिग्ध फोन और संदेश

इसी बीच SIR के नाम पर मतदाताओं को किए जा रहे संदिग्ध फोन और संदेशों की शिकायतें भी सामने आई हैं। कई लोगों को फोन कर बताया जा रहा है कि उनके चुनाव पहचान पत्र और SIR प्रपत्र में नाम या अन्य विवरण का मिलान नहीं हो रहा है। कुछ मामलों में यह दावा किया जा रहा है कि उनका गणना प्रपत्र अस्वीकार कर दिया गया है और समस्या दूर करने के लिए उन्हें एक विशेष नंबर पर संपर्क करना होगा।

इसके बाद कथित ठग खुद को निर्वाचन आयोग का कर्मचारी बताकर व्हाट्सऐप पर एक लिंक भेजते हैं। लिंक खोलने पर मतदाता से ऑनलाइन प्रपत्र भरने के लिए कहा जाता है, जिसमें नाम, पहचान और अन्य व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाती है।

इसके बाद प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर महज ₹5 का भुगतान करने को कहा जाता है। भुगतान के लिए नेट बैंकिंग या क्रेडिट और डेबिट कार्ड का विकल्प दिया जाता है। कुछ मामलों में भुगतान पृष्ठ पर बैंक लॉगिन विवरण, कार्ड नंबर, सीवीवी और अंत में एटीएम पिन तक दर्ज करने के लिए कहा जाता है।

साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने ऐसे मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि साइबर अपराधी अक्सर किसी वास्तविक सरकारी प्रक्रिया या अभियान को आधार बनाकर लोगों के बीच भरोसा पैदा करते हैं। उनके मुताबिक, छोटी राशि के भुगतान का बहाना बनाकर बैंकिंग जानकारी हासिल करना ठगी का शुरुआती चरण हो सकता है। मतदाताओं को यह समझना जरूरी है कि किसी सरकारी प्रक्रिया के नाम पर बैंक पासवर्ड, ओटीपी, सीवीवी या एटीएम पिन मांगना गंभीर चेतावनी का संकेत है।

आधिकारिक माध्यमों से ही स्थिति जांचने की सलाह

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने मतदाताओं को सलाह दी है कि वे अपने नाम और चुनावी स्थिति की जांच केवल आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से करें। किसी अनजान वेबसाइट, मोबाइल ऐप, व्हाट्सऐप संदेश या फोन पर भेजे गए लिंक के आधार पर व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

SIR से संबंधित संदिग्ध फोन आने पर नागरिक पुलिस से संपर्क कर सकते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि किसी कॉल के वास्तविक होने की पुष्टि तभी की जा सकती है जब वह मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से किया गया हो।

बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें

मतदाताओं को फोन पर किसी व्यक्ति के कहने पर बैंक लॉगिन, पासवर्ड, कार्ड नंबर, सीवीवी, ओटीपी या एटीएम पिन साझा नहीं करना चाहिए। सरकारी प्रक्रिया के नाम पर भेजे गए अनजान लिंक पर भुगतान करने या मोबाइल में एपीके फाइल स्थापित करने से भी बचना चाहिए।

SIR के दौरान मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी की जरूरत होने पर आधिकारिक चुनावी माध्यमों का इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित विकल्प है। किसी ऐप या वेबसाइट पर नाम दिखाई देने मात्र से यह नहीं माना जाना चाहिए कि वह जानकारी निर्वाचन विभाग की आधिकारिक सूची से ली गई है। संदिग्ध कॉल, संदेश, वेबसाइट या ऐप की जानकारी संबंधित अधिकारियों और पुलिस को देकर दूसरे मतदाताओं को संभावित साइबर ठगी से बचाया जा सकता है।

हमसे जुड़ें

Share This Article