ईओडब्ल्यू का आरोप—सरकारी धन के उपयोग, रिकॉर्ड प्रबंधन और वित्तीय प्रक्रियाओं में मिलीं कथित गड़बड़ियां; 20 अन्य लोगों को भी बयान के लिए नोटिस

₹30 करोड़ के सरकारी धन में कथित अनियमितता की आपराधिक जांच तेज, STEP-HBTI सोसाइटी मामले में दो पूर्व अधिकारियों पर FIR

Roopa
By Roopa
5 Min Read

कानपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय (HBTU) परिसर में संचालित साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योर्स पार्क (STEP-HBTI) सोसाइटी में लगभग ₹30 करोड़ के सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने आपराधिक जांच तेज कर दी है। लंबी जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन निदेशक प्रो. राकेश कुमार त्रिवेदी और तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक गोपाल मेहरोत्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता/पूर्व भारतीय दंड संहिता के आपराधिक विश्वासघात से संबंधित प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। मामले में आरोपों की जांच जारी है और दोष का अंतिम निर्धारण न्यायालय करेगा।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, वर्ष 2010 से 2017 के बीच STEP-HBTI सोसाइटी को विभिन्न सरकारी योजनाओं के संचालन के लिए लगभग ₹30 करोड़ की धनराशि प्राप्त हुई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस अवधि में धनराशि का उपयोग निर्धारित नियमों और स्वीकृत प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं किया गया। साथ ही कई महत्वपूर्ण वित्तीय अभिलेख, व्यय संबंधी दस्तावेज और मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे धन के उपयोग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए।

जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों, अभिलेखों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर तत्कालीन निदेशक और वरिष्ठ प्रबंधक की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाई गई। ईओडब्ल्यू ने अपनी अंतिम प्रगति रिपोर्ट दिसंबर 2025 में राज्य सरकार को भेजी थी। रिपोर्ट के परीक्षण के बाद फरवरी 2026 में सरकार ने आपराधिक मामला दर्ज कर विस्तृत विवेचना की अनुमति प्रदान की।

जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं के चयन, अनुबंध प्रक्रिया, भुगतान स्वीकृति और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन नहीं किया गया। ईओडब्ल्यू यह भी जांच कर रही है कि क्या सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना वित्तीय निर्णय लिए गए और क्या इससे सरकारी धन के उपयोग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference

एजेंसी के अनुसार, संस्था में कार्यकाल समाप्त होने के बाद कई महत्वपूर्ण मूल अभिलेख उत्तराधिकारी अधिकारियों को विधिवत हस्तांतरित नहीं किए गए। जांच के दौरान भी कुछ आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने का आरोप है। ईओडब्ल्यू का मानना है कि इन रिकॉर्ड की अनुपलब्धता से वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक निर्णयों के सत्यापन में कठिनाई आई है। इन पहलुओं की विस्तृत जांच की जा रही है।

जांच अधिकारियों ने बताया कि मामले में प्रो. राकेश कुमार त्रिवेदी का बयान दर्ज किया जा चुका है, जबकि लगभग 20 अन्य व्यक्तियों को भी बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। जांच एजेंसी दस्तावेजी साक्ष्यों, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयानों का मिलान कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित अनियमितताओं के लिए कौन-कौन जिम्मेदार था और क्या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी सामने आती है।

STEP-HBTI की स्थापना वर्ष 1986 में युवाओं को उद्यमिता, तकनीकी प्रशिक्षण, स्वरोजगार और कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। संस्था के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते रहे हैं, जिनके लिए समय-समय पर राज्य सरकार से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती थी। इसी धनराशि के उपयोग को लेकर अब जांच एजेंसियां विस्तृत पड़ताल कर रही हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में दस्तावेजी साक्ष्य, लेखा अभिलेख, स्वीकृति फाइलें और गवाहों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। केवल प्राथमिकी दर्ज होने या आरोप लगाए जाने से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं माना जाता। अंतिम निर्णय न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों और विधिक प्रक्रिया के आधार पर करेगा।

ईओडब्ल्यू का कहना है कि विवेचना अभी जारी है। यदि जांच के दौरान नए साक्ष्य, अतिरिक्त वित्तीय अनियमितताएं या अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल एजेंसी पूरे वित्तीय और प्रशासनिक रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है।

हमसे जुड़ें

Share This Article