स्वरूपनगर शाखा में 2003 से लॉकर था; पति की मौत के बाद लखनऊ में रह रही महिला को चार महीने पहले बैंक के विलय की जानकारी मिली, 27 जुलाई को लॉकर खोला तो जेवर गायब मिले

एसबीआई लॉकर से ₹50 लाख के जेवर गायब होने का आरोप, बैंक प्रबंधक-कर्मचारियों पर FIR

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By Roopa
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कानपुर: स्वरूपनगर स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखा में महिला के लॉकर से करीब ₹50 लाख के जेवर गायब होने का मामला सामने आया है। कौशलपुरी निवासी रश्मि अरोड़ा ने बैंक प्रबंधन और कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्होंने वर्ष 2003 में तत्कालीन स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर की शाखा में बचत खाता खुलवाया था और इसी शाखा में लॉकर नंबर 23 आवंटित कराया था। लॉकर में उन्होंने करीब ₹50 लाख कीमत के जेवर रखे थे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर बैंक प्रबंधक और कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

रश्मि अरोड़ा के पति की मृत्यु के बाद वह लखनऊ में अपनी बेटी के साथ रहने लगी थीं। इस दौरान लंबे समय तक वह बैंक स्थित अपने लॉकर को देखने नहीं जा सकीं। करीब चार महीने पहले वह अपनी बेटी के साथ बैंक पहुंचीं। वहां उन्हें जानकारी मिली कि जिस स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर की शाखा में उनका खाता और लॉकर था, उसका भारतीय स्टेट बैंक में विलय हो चुका है। बैंक रिकॉर्ड में लॉकर का शुल्क भी उनके खाते से लगातार काटे जाने की जानकारी सामने आई।

खाते में रकम जमा करने के बाद मिला लॉकर नंबर

महिला के अनुसार, उन्होंने 21 जुलाई को अपने बैंक खाते में रकम जमा की। इसके बाद बैंक की ओर से उन्हें लॉकर नंबर की जानकारी दी गई। हालांकि, उस दिन उनके पास लॉकर की चाबी नहीं थी, इसलिए वह लॉकर खोलकर उसकी स्थिति नहीं देख सकीं। बाद में उन्होंने बैंक से संपर्क कर लॉकर की जांच करने की प्रक्रिया पूरी की।

27 जुलाई को रश्मि अरोड़ा बैंक पहुंचीं और लॉकर खोला। आरोप है कि लॉकर के अंदर उनके रखे जेवर मौजूद नहीं थे। उन्होंने तत्काल बैंक प्रबंधन और कर्मचारियों से जानकारी मांगी। हालांकि, उनका कहना है कि उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने बैंक स्तर पर मामले को उठाया और कथित लापरवाही के खिलाफ पुलिस से शिकायत की।

पुलिस कमिश्नर के आदेश पर दर्ज हुई रिपोर्ट

बैंक प्रबंधन से अपेक्षित जवाब नहीं मिलने के बाद रश्मि अरोड़ा ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। शिकायत में उन्होंने लॉकर से करीब ₹50 लाख के जेवर गायब होने और बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की। पुलिस कमिश्नर के आदेश के बाद स्वरूपनगर पुलिस ने बैंक प्रबंधक और कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली।

अब पुलिस बैंक के लॉकर रिकॉर्ड, लॉकर संचालन से जुड़े दस्तावेज, एक्सेस रजिस्टर और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि लॉकर आखिरी बार कब खोला गया था और उसके बाद उसमें किस स्तर पर किसी अन्य व्यक्ति की पहुंच हुई। बैंक के पुराने रिकॉर्ड और विलय के बाद लॉकर से संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की जाएगी।

लॉकर की सुरक्षा को लेकर RBI का नियम

लॉकर से सामान गायब होने के मामलों में बैंक अक्सर यह तर्क देते रहे हैं कि लॉकर के भीतर रखी वस्तुओं की जानकारी बैंक को नहीं होती। ऐसे मामलों में ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक ने संशोधित लॉकर नियम लागू किए थे। जनवरी 2022 से लागू व्यवस्था के तहत कुछ परिस्थितियों में बैंक की देनदारी तय की गई है।

यदि बैंक की लापरवाही, कर्मचारियों की धोखाधड़ी, चोरी, डकैती, आग या भवन गिरने जैसी स्थिति के कारण लॉकर की सामग्री नष्ट या गायब होती है, तो बैंक की देनदारी लॉकर के वार्षिक किराये के 100 गुना तक हो सकती है। हालांकि, मुआवजे की सीमा लॉकर किराये से जुड़ी होने के कारण ग्राहकों को महंगी वस्तुएं रखते समय इस सीमा को ध्यान में रखना जरूरी है।

कानपुर में पहले भी सामने आ चुके हैं मामले

कानपुर में बैंक लॉकर से जेवर गायब होने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। फरवरी 2018 में पशुपति नगर स्थित यूनियन बैंक की शाखा के 32 लॉकरों से करोड़ों रुपये के जेवर गायब होने का मामला सामने आया था। सितंबर 2021 में किदवईनगर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में एक महिला के लॉकर से करीब ₹1.5 करोड़ के जेवर गायब होने की शिकायत हुई थी।

अप्रैल 2022 में कराची खाना स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा के 11 लॉकरों से करीब ₹4 करोड़ के जेवर गायब होने का मामला सामने आया था। इसी महीने बैंक ऑफ इंडिया की मॉल रोड शाखा में भी महिला के लॉकर से करीब ₹50 लाख के जेवर गायब होने की शिकायत हुई थी।

वर्तमान मामले में पुलिस अब लॉकर की पूरी हिस्ट्री, बैंक रिकॉर्ड और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि लॉकर से जेवर किस परिस्थिति में गायब हुए और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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