कानपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश पुलिस और साइबर सेल ने कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र में संचालित एक कथित फर्जी दस्तावेज निर्माण गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी साइबर कैफे की आड़ में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, जाति, आय, निवास प्रमाणपत्र, पहचान दस्तावेज, मैरिज सर्टिफिकेट और शैक्षणिक प्रमाणपत्र सहित विभिन्न सरकारी दस्तावेज कथित रूप से तैयार कर रहे थे। मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी। सभी आरोपियों को कानून के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तेजस पाल, नितेश कुमार और अनुराग के रूप में हुई है। संयुक्त कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से लगभग 120 जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र, 112 जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र, दो आधार अपडेट प्रमाणपत्र, बड़ी संख्या में कथित फर्जी पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र, विभिन्न सरकारी कार्यालयों की मोहरें, कंप्यूटर, प्रिंटर, अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा ₹29,220 नकद बरामद किए हैं। पुलिस का आरोप है कि कुछ दस्तावेजों पर विधायक की कथित फर्जी मोहर भी लगी हुई थी।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को आरोपियों के लैपटॉप और मोबाइल फोन से तीन संदिग्ध वेबसाइटों का पता चला है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन वेबसाइटों के तकनीकी संबंध विदेशी सर्वरों अथवा कजाकिस्तान से जुड़े नंबरों से होने के संकेत मिले हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी कथित तौर पर कजाकिस्तान से संचालित टेलीग्राम और व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से इस नेटवर्क से जुड़े थे या नहीं। इन दावों का डिजिटल फोरेंसिक परीक्षण कराया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वे निर्धारित रकम लेकर विभिन्न राज्यों के मैरिज सर्टिफिकेट, शैक्षणिक बोर्डों की मार्कशीट और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार करते थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि गिरोह लगभग एक वर्ष से सक्रिय था और इस अवधि में बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए हो सकते हैं। हालांकि, दस्तावेजों की वास्तविक संख्या और उनके उपयोग की पुष्टि अभी जांच के अधीन है।
जांच एजेंसियां अब जब्त कंप्यूटर, मोबाइल फोन, प्रिंटर, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस और ऑनलाइन संचार रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच कर रही हैं। पुलिस बैंक खातों, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और ऑनलाइन गतिविधियों का भी विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित नेटवर्क में अन्य व्यक्ति, तकनीकी सहयोगी या लाभार्थी भी शामिल थे या नहीं।
Future Crime Research Foundation से जुड़े साइबर एवं वित्तीय अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले संगठित नेटवर्क अक्सर एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, विदेशी सर्वर, डिजिटल टेम्पलेट और नकली सत्यापन तंत्र का उपयोग कर अपनी गतिविधियों को छिपाने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों में डिजिटल फोरेंसिक, सर्वर लॉग, इलेक्ट्रॉनिक संचार, बैंकिंग रिकॉर्ड और मेटाडेटा का विश्लेषण पूरे नेटवर्क तथा उसके संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि गिरफ्तारी या पुलिस के आरोप मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। अभियोजन पक्ष को न्यायालय में डिजिटल, दस्तावेजी और अन्य स्वीकार्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध करने होंगे, जबकि सभी आरोपियों को कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। यदि विवेचना के दौरान अतिरिक्त आरोपी, अन्य फर्जी वेबसाइटें, व्यापक दस्तावेज जालसाजी नेटवर्क या अंतरराज्यीय अथवा अंतरराष्ट्रीय संबंधों के साक्ष्य सामने आते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच एजेंसियां कथित फर्जी दस्तावेज रैकेट की संरचना, डिजिटल अवसंरचना और उससे जुड़े सभी व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं।
