कानपुर के फीलखाना क्षेत्र में साइबर ठगी का मामला; ठगों ने 28 अगस्त की रात 8:30 से 8:36 बजे के बीच अलग-अलग खातों में रकम भेजी, महिला का दावा- न कोई संदिग्ध लिंक खोला और न ही किसी को ओटीपी बताया

छह मिनट में महिला के खाते से 8.43 लाख पार, 10 यूपीआई लेनदेन के बाद मोबाइल नंबर भी बंद

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By Roopa
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कानपुर। फीलखाना थाना क्षेत्र में साइबर ठगों ने महज छह मिनट में एक महिला के बैंक खाते से 8.43 लाख रुपये निकाल लिए। आरोप है कि ठगों ने लगातार 10 यूपीआई लेनदेन के जरिए रकम अलग-अलग खातों में स्थानांतरित की। इसके बाद बैंक खाते में पंजीकृत महिला का मोबाइल नंबर भी बंद करा दिया गया। मोबाइल सेवा बंद होने के बाद परिवार को खाते से रकम निकलने की जानकारी हुई।

पटकापुर निवासी महिला का सिविल लाइंस स्थित बैंक में खाता है। उनके मुताबिक, खाते में करीब 14.06 लाख रुपये जमा थे। 28 अगस्त की शाम करीब 8:30 बजे से 8:36 बजे के बीच उनके खाते से कुल 8.43 लाख रुपये निकाल लिए गए। रकम कई अलग-अलग यूपीआई लेनदेन के जरिए दूसरे खातों में भेजी गई।

महिला को शुरुआत में खाते से रकम निकलने की जानकारी नहीं हुई। अगले दिन जब उनका मोबाइल नंबर बंद मिला तो परिवार के लोगों को संदेह हुआ। मोबाइल फोन की जांच करने पर खाते से रकम स्थानांतरित होने से संबंधित कई संदेश मिले। इसके बाद बैंक खाते की जानकारी जुटाई गई तो छह मिनट के भीतर हुए लगातार लेनदेन का पता चला।

पीड़िता का कहना है कि उन्होंने किसी अनजान व्यक्ति के भेजे लिंक पर क्लिक नहीं किया था। उन्होंने किसी के साथ ओटीपी साझा करने से भी इनकार किया है। ऐसे में उन्हें आशंका है कि मोबाइल या उससे जुड़ी किसी डिजिटल सेवा से छेड़छाड़ कर खाते तक पहुंच बनाई गई और इसके बाद यूपीआई के जरिए रकम निकाल ली गई।

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साइबर ठगी में मोबाइल नंबर को बंद कराने की घटना ने मामले को और गंभीर बना दिया है। आम तौर पर बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर पर लेनदेन के संदेश और अन्य सुरक्षा सूचनाएं पहुंचती हैं। नंबर बंद होने से पीड़ित को खाते में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत नहीं मिल पाती। इस मामले में भी मोबाइल सेवा बाधित होने के बाद ही परिवार ने फोन की जांच की और खाते से बड़ी रकम निकलने का पता चला।

शिकायत मिलने के बाद साइबर अपराध पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बैंक खाते से हुए लेनदेन, यूपीआई के जरिए रकम जिन खातों में पहुंची उनकी जानकारी और मोबाइल नंबर बंद होने से जुड़े विवरण जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने महिला के बैंक खाते और यूपीआई सेवा तक किस तरीके से पहुंच बनाई।

पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि छह मिनट के भीतर हुए सभी 10 लेनदेन में इस्तेमाल किए गए खाते किन लोगों के नाम पर हैं और रकम आगे किन खातों में भेजी गई। साइबर अपराध की जांच में ऐसे मामलों में लेनदेन की पूरी कड़ी खंगालकर रकम के प्रवाह और उससे जुड़े खातों की पहचान की जाती है।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल ठगी में शामिल आरोपियों की पहचान और मोबाइल नंबर बंद कराने के तरीके को लेकर जांच जारी है। महिला द्वारा ओटीपी साझा नहीं करने और किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने की बात भी जांच का अहम हिस्सा है। साइबर पुलिस बैंकिंग और दूरसंचार रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि खाते तक अनधिकृत पहुंच कैसे बनाई गई।

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