कानपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने कथित साइबर ठगी से जुड़े एक संगठित वित्तीय नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के अनुसार, आरोपी लोगों से ₹15,000 से ₹20,000 देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और चेकबुक हासिल करते थे तथा उन खातों में देशभर से साइबर ठगी की रकम मंगवाते थे। पुलिस का दावा है कि अब तक करीब ₹1.50 करोड़ की संदिग्ध राशि इन खातों में पहुंची है। मामले का कथित मास्टरमाइंड, एक ग्रेजुएशन छात्र, फिलहाल फरार है।
पुलिस के अनुसार, जांच की शुरुआत तब हुई जब विष्णुपुरी निवासी एक ग्रेजुएशन छात्र ने जानकारी दी कि उसके मित्र के बैंक खाते में लगभग ₹14 लाख की संदिग्ध राशि आने के बाद खाता फ्रीज कर दिया गया। बाद में केरल पुलिस द्वारा उस खाते से जुड़े साइबर धोखाधड़ी मामले का नोटिस दिए जाने पर पूरे नेटवर्क की जानकारी स्थानीय पुलिस को मिली।
जांच के दौरान नवाबगंज पुलिस और साइबर सेल ने आदित्य बाजपेई, अतुल सिन्हा, विराज सिंह, कृष्णा, यश प्रताप सिंह और शिवांश गुप्ता को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि वे कथित तौर पर फरार आरोपी क्षितिज द्विवेदी के निर्देश पर बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। पुलिस का आरोप है कि वही पूरे सिंडिकेट का संचालन कर रहा था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग, बेटिंग और निवेश संबंधी साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को प्राप्त करने के लिए किया जाता था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से जुड़े लगभग 35 बैंक खातों में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 50 से अधिक शिकायतें दर्ज मिली हैं।
पुलिस का आरोप है कि साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि विभिन्न खातों से एकत्र कर एक केंद्रीय खाते में जमा की जाती थी। इसके बाद कथित तौर पर Binance, Bybit, Bitget, MetaMask और Trust Wallet जैसे क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के माध्यम से USDT (Tether) खरीदा जाता था। जांच एजेंसियों के अनुसार, बाद में यह डिजिटल संपत्ति दिल्ली स्थित एक संपर्क के माध्यम से विदेश भेजी जाती थी। पुलिस इस कथित नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विदेशी संपर्कों की भी जांच कर रही है।
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जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि गिरोह बैंक खाताधारकों को स्वयं बैंक ले जाकर चेक के माध्यम से नकदी निकलवाता था। पुलिस के अनुसार, सभी एटीएम कार्डों का एक समान पासवर्ड रखा गया था ताकि संचालन आसान रहे। किसी खाते के फ्रीज होने पर उससे जुड़े एटीएम कार्ड और अन्य सामग्री को कथित तौर पर नष्ट कर दिया जाता था।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पांच एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 25 एटीएम कार्ड, तीन चेकबुक, ₹58,800 नकद, एक कार और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। जब्त डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि धन के प्रवाह और नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की पहचान की जा सके।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अब स्वयं धोखाधड़ी करने के बजाय बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर धन के स्रोत और गंतव्य को छिपाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों को किसी भी व्यक्ति को कमीशन के बदले अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या KYC दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने चाहिए, क्योंकि ऐसे मामलों में खाताधारक भी कानूनी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है। फरार आरोपी की तलाश के साथ-साथ बैंक खातों, क्रिप्टो लेनदेन, डिजिटल साक्ष्यों और संभावित अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कड़ियों की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि जांच के दौरान अतिरिक्त साक्ष्य सामने आते हैं तो मामले में आगे और गिरफ्तारियां तथा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
