कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने करीब ₹250 करोड़ के साइबर ठगी और हवाला नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि बिहार के सासाराम निवासी सुल्तान मिर्जा उर्फ अभय उर्फ जान सेना उर्फ वैलेंटाइन इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना है। पुलिस के अनुसार, गिरोह का नेटवर्क देश के कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों तक फैला हुआ है। चार प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ठगी की रकम के ₹500 करोड़ तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस ने इस मामले में राजवीर सिंह, शिवम सिन्हा और 25 हजार रुपये के इनामी अंचित गोयल को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह साइबर ठगी से हासिल रकम को हवाला के जरिए देश और विदेश में भेजता था। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, वित्तीय लेनदेन और विदेशी कनेक्शन की जांच कर रही है।
जांच में पता चला है कि सुल्तान मिर्जा गिरोह के लिए साइबर ठगी से जुटाई गई रकम को अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाने का काम किया जाता था। गिरोह ने हवाला कारोबार के लिए एक विशेष कोडवर्ड तय कर रखा था। पूछताछ में सामने आया कि ‘केजी’ शब्द का इस्तेमाल रकम ट्रांसफर के लिए किया जाता था। एक ‘केजी’ का मतलब एक लाख रुपये और दो ‘केजी’ का मतलब दो लाख रुपये ट्रांसफर करना होता था। रकम बढ़ने के साथ कोडवर्ड में भी बदलाव किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, गिरोह एक दिन में सीमित समय पर ही पैसे ट्रांसफर करता था। एक दिन में केवल दो बार और लगभग दो घंटे के अंतराल पर हवाला के जरिए रकम भेजी जाती थी, ताकि गतिविधियों पर शक न हो। जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम महाराष्ट्र, दिल्ली, छत्तीसगढ़, मुंबई समेत कई राज्यों और दुबई सहित अन्य देशों तक पहुंचाई जा रही थी।
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि वे बिहार के सासाराम निवासी सुल्तान मिर्जा को बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इसके बदले उन्हें प्रत्येक खाते के लिए हर महीने करीब ₹25 हजार रुपये दिए जाते थे। पुलिस के मुताबिक, राजवीर और शिवम ने नौ राज्यों में फैले नेटवर्क के जरिए करीब ₹250 करोड़ की साइबर ठगी में भूमिका निभाई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिवम सिन्हा इस गिरोह में फंड मैनेजर की भूमिका निभा रहा था। वह ठगी की रकम को अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने और अन्य वित्तीय लेनदेन संभालने का काम करता था। पुलिस का कहना है कि शिवम की गिरफ्तारी के बाद उसे छुड़ाने के लिए गिरोह के कई सदस्य सक्रिय हो गए थे और कानूनी मदद के लिए कई वकीलों से संपर्क किया गया था।
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जांच के दौरान पुलिस ने आगरा के फतेहपुर सीकरी निवासी अंचित गोयल को भी गिरफ्तार किया है। अंचित पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार, वह भी सुल्तान मिर्जा की तरह अलग साइबर ठगी गिरोह चला रहा था। उसका काम फर्जी बैंक खाते खुलवाना और ठगी के लिए संसाधन उपलब्ध कराना था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ बैंक कर्मचारी, अधिकारी, अधिवक्ता और अन्य प्रभावशाली लोग भी जुड़े हो सकते हैं। आरोप है कि बैंककर्मियों की मदद से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खाते खुलवाए जाते थे। पुलिस ने ऐसे कुछ संदिग्ध लोगों की पहचान कर ली है और जल्द कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
जांच में सुल्तान मिर्जा की ऐशो-आराम वाली जिंदगी के भी कई सबूत सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, वह दुबई के अलावा नेपाल, काठमांडू और थाईलैंड जैसे स्थानों पर जाता था। उसके होटल और अन्य जगहों के वीडियो फुटेज भी जांच एजेंसी को मिले हैं। पुलिस का दावा है कि सुल्तान महंगी पार्टियों और लग्जरी जीवनशैली पर ठगी की रकम खर्च करता था।
पुलिस को सुल्तान मिर्जा की लोकेशन फिलहाल दुबई में मिल रही है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, आरोपी को भारत लाने की प्रक्रिया के तहत सबसे पहले उसका पासपोर्ट निरस्त करने की कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुल्तान का नेटवर्क केवल राजवीर और शिवम तक सीमित नहीं है। गिरोह के चार अन्य शातिर सदस्य भी पुलिस के रडार पर हैं। इनके पकड़े जाने के बाद साइबर ठगी की रकम और नेटवर्क का दायरा और बड़ा सामने आ सकता है। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।
