कल्याण/ठाणे (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण क्षेत्र में रहने वाली 45 वर्षीय एक ब्यूटीशियन कथित तौर पर ‘विदेशी पार्सल’ साइबर ठगी का शिकार हो गईं। पुलिस के अनुसार साइबर ठगों ने उन्हें विदेश से विदेशी मुद्रा और सोने के आभूषणों से भरा पार्सल भेजे जाने का झांसा देकर कस्टम शुल्क, मनी लॉन्ड्रिंग क्लियरेंस और टैक्स के नाम पर अलग-अलग किश्तों में कुल ₹8.05 लाख की ठगी कर ली। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार पीड़िता से अप्रैल से 19 जुलाई 2026 के बीच मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क किया गया। शिकायत के मुताबिक एक व्यक्ति ने खुद को पार्सल भेजने वाला बताते हुए दावा किया कि उसने उनके नाम विदेश से एक कीमती पार्सल भेजा है। कुछ समय बाद एक महिला ने फोन कर स्वयं को कस्टम विभाग से जुड़ा बताते हुए कहा कि पार्सल भारत पहुंच चुका है, लेकिन उसे जारी कराने के लिए पहले ₹75,000 का कस्टम शुल्क जमा करना होगा।
जांच के अनुसार इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता को बताया कि पार्सल में विदेशी मुद्रा, सोने का हार और सोने के बिस्कुट हैं। ठगों ने दावा किया कि पार्सल जारी कराने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग क्लियरेंस सर्टिफिकेट, टैक्स और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर अतिरिक्त भुगतान करना आवश्यक है। कथित सरकारी प्रक्रिया और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़िता पर लगातार भुगतान करने का दबाव बनाया गया।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों की बातों पर विश्वास कर पीड़िता ने अलग-अलग समय पर कई बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए। इस तरह कुल ₹8.05 लाख की राशि साइबर ठगों के खातों में भेज दी गई। बाद में जब कथित पार्सल नहीं मिला और आरोपियों से संपर्क नहीं हो पाया, तब पीड़िता को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास हुआ।
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इसके बाद महिला ने पुलिस से संपर्क कर पूरी घटना की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खाते, कॉलिंग नंबर और अन्य डिजिटल माध्यम किन लोगों से जुड़े हैं तथा क्या इस गिरोह का संबंध अन्य राज्यों में सक्रिय साइबर अपराध नेटवर्क से भी है।
प्रारंभिक जांच में यह भी देखा जा रहा है कि आरोपियों ने पीड़िता से संपर्क करने के लिए किन डिजिटल प्लेटफॉर्म और संचार माध्यमों का उपयोग किया तथा ठगी की रकम किन-किन खातों में स्थानांतरित की गई। जांच एजेंसियां वित्तीय ट्रेल और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही हैं।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, विदेशी पार्सल, गिफ्ट, विदेशी मुद्रा या सोने के आभूषण मिलने का लालच देकर की जाने वाली साइबर ठगी लंबे समय से सक्रिय सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों में शामिल है। उन्होंने कहा कि कस्टम विभाग, प्रवर्तन एजेंसियां या अन्य सरकारी संस्थान किसी निजी पार्सल को जारी कराने के लिए फोन या मैसेज के माध्यम से व्यक्तिगत बैंक खातों में भुगतान करने के निर्देश नहीं देते। यदि कोई व्यक्ति कस्टम शुल्क, टैक्स या क्लियरेंस के नाम पर तत्काल भुगतान का दबाव बनाता है, तो उसकी स्वतंत्र रूप से आधिकारिक माध्यमों से पुष्टि करनी चाहिए।
पुलिस ने बताया कि मामले में अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और जांच जारी है। अधिकारी बैंकिंग रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं। मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा।
