कैथल: हरियाणा के कैथल में सोशल मीडिया पर दोस्ती कर निवेश में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर ₹9.50 लाख की कथित साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। साइबर थाना पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने फेसबुक और व्हाट्सऐप के जरिए पीड़ित को फर्जी निवेश योजना में फंसाया। जांच में सामने आया है कि पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई और बाद में फर्जी वेबसाइट पर मुनाफे के साथ ₹38.49 लाख से अधिक का बैलेंस दिखाया गया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान फतेहाबाद जिले के नकटा गांव निवासी अनिल कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस अब उसके बैंक खातों, मोबाइल फोन और कथित साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
फेसबुक पर ‘नंदिता सूद’ नाम की ID से भेजी फ्रेंड रिक्वेस्ट
गुहला निवासी अशोक कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मई 2026 में उनकी फेसबुक ID पर ‘नंदिता सूद’ नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। रिक्वेस्ट स्वीकार करने के बाद दोनों के बीच मैसेंजर पर बातचीत शुरू हुई। कुछ समय बाद कथित महिला ने व्हाट्सऐप के जरिए उनसे संपर्क किया और ऑनलाइन निवेश के जरिए अच्छा मुनाफा कमाने का भरोसा दिलाया।
शिकायत के मुताबिक, बातचीत के दौरान अशोक को एक लिंक भेजा गया, जिसके जरिए उन्होंने एक वेबसाइट पर अपना अकाउंट बनाया। शुरुआत में उन्होंने कम रकम निवेश की। वेबसाइट पर निवेश के बाद मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाई दिया और शुरुआती स्तर पर रकम निकालने में भी सफलता मिली।
इससे उन्हें वेबसाइट और निवेश योजना पर भरोसा हो गया। इसके बाद कथित आरोपियों ने उनसे बड़ी रकम निवेश करने के लिए कहा।
11 बैंक खातों में ट्रांसफर कराए ₹9.50 लाख
पुलिस के अनुसार, फर्जी वेबसाइट के कस्टमर केयर के माध्यम से पीड़ित को अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी भेजी गई। उसे निवेश के नाम पर उन्हीं खातों में रकम जमा करने के लिए कहा गया।
शिकायत के मुताबिक, जून 2026 के दौरान अशोक ने आरोपियों की ओर से बताए गए 11 अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹9.50 लाख ट्रांसफर कर दिए। रकम जमा होने के बाद वेबसाइट पर उनके निवेश को बढ़े हुए मुनाफे के साथ दिखाया गया।
आरोपियों ने वेबसाइट पर कुल ₹38,49,174 का बैलेंस दिखाया। इससे पीड़ित को लगा कि उसका निवेश काफी बढ़ चुका है और अब वह बड़ी रकम अपने बैंक खाते में निकाल सकता है।
₹38.49 लाख निकालने की कोशिश पर लगा दिया रोक
जब अशोक ने वेबसाइट पर दिखाई जा रही रकम निकालने की कोशिश की तो कथित फर्जी कस्टमर केयर ने निकासी रोक दी। इसके बाद रकम जारी करने के नाम पर उनसे अलग से भुगतान करने को कहा गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर 25 प्रतिशत भुगतान शुल्क के नाम पर ₹7,17,296 की अतिरिक्त रकम मांगी। इतनी बड़ी अतिरिक्त राशि मांगे जाने पर पीड़ित को संदेह हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है। उसने आगे रकम देने से इनकार कर दिया।
इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर उसका विड्रॉल विकल्प पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। इस पर उसने पुलिस से शिकायत की।
जांच में बैंक खातों और डिजिटल नेटवर्क पर नजर
साइबर थाना पुलिस अब उन 11 बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनमें कथित तौर पर ₹9.50 लाख ट्रांसफर किए गए थे। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन खातों के वास्तविक संचालक कौन हैं और रकम आगे किन खातों या व्यक्तियों तक पहुंचाई गई।
पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, बैंकिंग रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट और व्हाट्सऐप बातचीत की भी जांच कर सकती है। इससे कथित ‘नंदिता सूद’ ID के पीछे कौन लोग थे और आरोपी अनिल कुमार की भूमिका क्या थी, इसका पता लगाने में मदद मिल सकती है।
छोटे मुनाफे से भरोसा बनाकर बड़ी रकम फंसाने का तरीका
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, निवेश साइबर ठगी में अपराधी अक्सर शुरुआत में छोटी रकम पर मुनाफा या सफल निकासी दिखाकर पीड़ित का भरोसा जीतते हैं। इसके बाद बड़ी रकम जमा कराई जाती है और निकासी के समय टैक्स, फीस, प्रोसेसिंग चार्ज या अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त भुगतान मांगा जाता है।
उन्होंने कहा कि किसी अनजान सोशल मीडिया प्रोफाइल से मिले निवेश प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले कंपनी, वेबसाइट, बैंक खाते और निवेश प्लेटफॉर्म की स्वतंत्र रूप से जांच जरूरी है। वेबसाइट पर दिखने वाला मुनाफा वास्तविक बैंक बैलेंस होने की गारंटी नहीं होता।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी अनिल कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि ₹9.50 लाख की कथित ठगी में उसकी भूमिका क्या थी, रकम कहां गई और इस नेटवर्क में उसके साथ कितने अन्य लोग जुड़े हुए हैं।
