लखनऊ। पूर्व मंत्री आजम खां और उनके परिवार से जुड़े जौहर ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों की जांच में जल निगम की योजनाओं के प्रचार-प्रसार से जुड़े भुगतान भी जांच के दायरे में आ गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि जल निगम से प्रचार-प्रसार का काम पाने वाली कुछ फर्मों ने विभाग से भुगतान प्राप्त करने के बाद उसका बड़ा हिस्सा जौहर ट्रस्ट को दान के रूप में दिया। एजेंसी अब ऐसी 13 फर्मों के लेनदेन और उनके ट्रस्ट से संबंधों की गहन जांच कर रही है।
जांच के दौरान ईडी ने जल निगम से इन फर्मों को आवंटित किए गए प्रचार-प्रसार के कार्यों, उनके लिए किए गए भुगतान और संबंधित रिकॉर्ड का ब्योरा मांगा है। जांच के दायरे में शामिल 13 फर्मों में से चार लखनऊ की बताई जा रही हैं। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन फर्मों को किस प्रक्रिया के तहत काम मिला, उन्हें कितना भुगतान किया गया और भुगतान मिलने के बाद जौहर ट्रस्ट को कितनी रकम दान के रूप में दी गई।
जांच में यह पहलू भी सामने आया है कि इन फर्मों में से अधिकांश वर्तमान समय में भी जल निगम से जुड़ी योजनाओं के प्रचार-प्रसार का काम कर रही हैं। इस वजह से ईडी पुराने भुगतान और दान के लेनदेन के साथ मौजूदा कार्यों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड को भी जांच सकती है। इससे जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। हालांकि, फर्मों की ओर से किए गए दान और सरकारी कार्यों के बीच किसी आपराधिक साजिश या अवैध लेनदेन की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
जौहर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच पहले से चल रही है। इसी क्रम में ईडी अब ट्रस्ट के चार्टर्ड अकाउंटेंट का बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि ट्रस्ट के खातों, दान के स्रोत, भुगतान और वित्तीय रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी चार्टर्ड अकाउंटेंट के पास हो सकती है। एजेंसी ट्रस्ट की ओर से दाखिल किए गए वित्तीय दस्तावेजों और वास्तविक लेनदेन के बीच किसी संभावित अंतर की भी पड़ताल कर सकती है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
जांच का एक अहम हिस्सा ट्रस्ट को मिलने वाले दान की प्रकृति और उसके स्रोतों की पड़ताल है। ईडी यह समझने की कोशिश कर रही है कि विभिन्न फर्मों और अन्य संस्थाओं से ट्रस्ट को मिली रकम किस उद्देश्य से दी गई थी और क्या इसके बदले किसी प्रकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ जुड़ा था। इसके लिए बैंक खातों, भुगतान रिकॉर्ड और ट्रस्ट के लेखा दस्तावेजों का मिलान किए जाने की संभावना है।
इसी सिलसिले में ईडी ने इसी सप्ताह जौहर ट्रस्ट से जुड़े कुछ ट्रस्टियों को भी तलब किया है। उनसे ट्रस्ट में उनकी भूमिका, निर्णय लेने की प्रक्रिया और वित्तीय गतिविधियों के संबंध में पूछताछ कर बयान दर्ज किया जाएगा। जांच के दायरे में ऐसे ट्रस्टी भी बताए जा रहे हैं जिनकी भूमिका को एजेंसी संदिग्ध या औपचारिक मान रही है। इन्हें जांच में कथित तौर पर ‘डमी ट्रस्टी’ के रूप में देखा जा रहा है।
जल निगम से जुड़े पुराने प्रचार-प्रसार कार्यों की जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि संबंधित फर्मों और ट्रस्ट के बीच हुए वित्तीय लेनदेन का समय, रकम और उद्देश्य अब जांच एजेंसी के सामने प्रमुख सवाल हैं। एजेंसी यह भी देखेगी कि जिन फर्मों को सरकारी योजनाओं के प्रचार का काम मिला, उनके चयन और भुगतान की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
फिलहाल ईडी की जांच जारी है और 13 फर्मों, जौहर ट्रस्ट, उसके ट्रस्टियों तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों और बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। ट्रस्ट या संबंधित फर्मों के खिलाफ लगाए गए वित्तीय अनियमितताओं के आरोप जांच पूरी होने तक आरोप ही हैं और उनकी पुष्टि सक्षम कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।
