अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में साइबर ठगों ने गैस मीटर अपडेट कराने के नाम पर एक परिवार के पांच बैंक और क्रेडिट कार्ड खातों से कथित तौर पर ₹11.53 लाख निकाल लिए। ठगों ने खुद को गैस कंपनी का प्रतिनिधि बताकर पहले कनेक्शन कटने का डर दिखाया और फिर मीटर की जानकारी अपडेट करने के लिए एक संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड कराई। मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने के बाद ठगों ने कथित तौर पर डिवाइस तक पहुंच बनाई और बैंकिंग लेनदेन से जुड़े ओटीपी हासिल कर लिए।
मामला अहमदाबाद के लॉ गार्डन इलाके का है। यहां रहने वाले 32 वर्षीय रिषितभाई कपड़ों का थोक कारोबार करते हैं। उनका कारोबार कांकरिया रोड स्थित सुमेल बिजनेस पार्क-2 में है। पुलिस के अनुसार, 26 सितंबर को उनके बड़े भाई विवेकभाई के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से संदेश आया। इसमें दावा किया गया था कि पिछले महीने की गैस मीटर रीडिंग अपडेट नहीं हुई है और रात 10:30 बजे तक प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा।
संदेश का स्क्रीनशॉट मिलने के बाद रिषितभाई ने उसमें दिए नंबर पर संपर्क किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने हिंदी में बातचीत की और अपना नाम दिवेश बताया। उसने कथित तौर पर कहा कि मीटर की जानकारी अपडेट नहीं होने के कारण बिल अधिक आ सकता है और कनेक्शन कटने से बचने के लिए तत्काल प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इसके बाद आरोपी ने व्हाट्सऐप के जरिए ‘Adani Gas Bill Update.apk’ नाम की फाइल भेजी और उसे मोबाइल में इंस्टॉल करने के लिए कहा। रिषितभाई ने APK इंस्टॉल कर दिया। ऐप ने मोबाइल की लोकेशन और नोटिफिकेशन से जुड़ी अनुमति मांगी, जिसे उन्होंने दे दिया। इसके बाद उनसे पिता का नाम, पंजीकृत मोबाइल नंबर और ग्राहक आईडी जैसी जानकारी दर्ज करने को कहा गया।
ठगी का शक तब हुआ जब ऐप ने प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर ₹10 का भुगतान करने को कहा। रिषितभाई को यह प्रक्रिया संदिग्ध लगी और उन्होंने तुरंत ऐप से बाहर निकलने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने मोबाइल में कॉल फॉरवर्डिंग बंद की और संदिग्ध ऐप को डिलीट कर दिया। हालांकि, तब तक कथित तौर पर ठग मोबाइल तक पहुंच हासिल कर चुके थे।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
ऐप हटाने के कुछ ही समय बाद रिषितभाई के मोबाइल पर लगातार कई ओटीपी आने लगे। 26 और 27 सितंबर के बीच उनके परिवार के अलग-अलग खातों से कई लेनदेन किए गए। पुलिस के मुताबिक, रिषितभाई, उनकी पत्नी, पिता और मां से जुड़े बैंक और क्रेडिट कार्ड खातों से कुल ₹11.53 लाख की रकम निकाली गई। इन खातों में बैंक ऑफ इंडिया के खाते और क्रेडिट कार्ड भी शामिल थे।
परिवार को जब अनधिकृत लेनदेन का पता चला तो रिषितभाई ने तुरंत 1930 साइबर अपराध हेल्पलाइन पर संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड, मोबाइल गतिविधियों तथा संदिग्ध नंबरों की तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों ने मोबाइल तक किस तरीके से पहुंच बनाई। साइबर अपराध के मामलों में संदिग्ध APK फाइलें खतरनाक साबित हो सकती हैं। ऐसी फाइलों को इंस्टॉल करने के बाद उपयोगकर्ता द्वारा दी गई अनुमतियों और ऐप की तकनीकी क्षमताओं के आधार पर फोन में मौजूद सूचनाओं तक अनधिकृत पहुंच का जोखिम बढ़ सकता है।
पुलिस को आशंका है कि इस मामले में ठगों ने संदिग्ध APK के साथ कॉल या एसएमएस फॉरवर्डिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया। ऐसी स्थिति में बैंकिंग लेनदेन से जुड़े ओटीपी या संदेश दूसरे नंबर तक पहुंच सकते हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या किसी यूएसएसडी कोड या अन्य माध्यम से कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय की गई थी।
यह घटना बताती है कि गैस कनेक्शन, बिजली बिल, केवाईसी या मीटर अपडेट के नाम पर भेजी गई APK फाइल को डाउनलोड करना कितना जोखिमपूर्ण हो सकता है। किसी भी सरकारी या निजी सेवा के नाम पर मोबाइल में बाहरी स्रोत से ऐप इंस्टॉल करने या ओटीपी साझा करने से पहले उसकी आधिकारिकता की जांच जरूरी है। फिलहाल पुलिस लेनदेन की पूरी कड़ी और आरोपियों की पहचान पता लगाने में जुटी है।
