विदेशी ट्रेडिंग दिग्गज से मांगा जवाब; DTAA के तहत छूट के दावे पर जांच तेज, F&O सौदों से कमाई बनी विवाद की जड़

₹20,000 करोड़ F&O मुनाफे पर टैक्स घमासान: इनकम टैक्स विभाग का Jane Street को ड्राफ्ट नोटिस, संधि लाभ पर सवाल

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: भारतीय डेरिवेटिव मार्केट में बड़े पैमाने पर मुनाफा कमाने वाली विदेशी ट्रेडिंग फर्म Jane Street अब इनकम टैक्स विभाग के रडार पर आ गई है। विभाग ने कंपनी को एक ड्राफ्ट नोटिस जारी कर ₹20,000 करोड़ से अधिक के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) मुनाफे पर टैक्स देनदारी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। इस नोटिस में खासतौर पर डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के तहत मांगे गए टैक्स लाभों को चुनौती दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, विभाग का मानना है कि कंपनी ने भारत में अर्जित भारी मुनाफे पर टैक्स से बचने के लिए संधि प्रावधानों का गलत या आक्रामक तरीके से उपयोग किया है। ड्राफ्ट नोटिस में कंपनी से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उसे इन लाभों का हक किस आधार पर मिलना चाहिए, जबकि गतिविधियां भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर संचालित हुई हैं।

मामले का केंद्र F&O ट्रेडिंग से हुई आय है, जो भारतीय शेयर बाजार के डेरिवेटिव सेगमेंट में की गई हाई-फ्रीक्वेंसी और एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग से जुड़ी बताई जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के ट्रेडिंग मॉडल में भारत में “परमानेंट एस्टैब्लिशमेंट” (स्थायी व्यावसायिक उपस्थिति) की स्थिति बन सकती है, जिससे टैक्स देनदारी उत्पन्न होती है।

क्या है विवाद का मूल मुद्दा?

मुख्य सवाल यह है कि क्या विदेशी कंपनी भारत में हुए मुनाफे पर DTAA के तहत टैक्स छूट का दावा कर सकती है, या उसे घरेलू टैक्स नियमों के तहत कर देना होगा। आमतौर पर DTAA का उद्देश्य दो देशों के बीच एक ही आय पर दो बार टैक्स से बचाना होता है। लेकिन अगर यह साबित हो जाए कि कंपनी की वास्तविक आर्थिक गतिविधियां भारत में संचालित हो रही थीं, तो संधि लाभ सीमित या खारिज किए जा सकते हैं।

टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में सरकार ने ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाया है, जहां विदेशी संस्थाएं भारत में बड़े पैमाने पर कारोबार करती हैं, लेकिन टैक्स देनदारी को कम करने के लिए जटिल संरचनाओं का इस्तेमाल करती हैं। इस मामले में भी विभाग यह जांच कर रहा है कि कंपनी की ट्रेडिंग गतिविधियों का नियंत्रण और निष्पादन कहां से हो रहा था।

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F&O मार्केट पर बढ़ी निगरानी

भारत का डेरिवेटिव मार्केट दुनिया के सबसे बड़े और सक्रिय बाजारों में से एक बन चुका है। खासतौर पर F&O सेगमेंट में विदेशी निवेशकों और ट्रेडिंग फर्मों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में नियामक और टैक्स अधिकारी इस बात पर विशेष नजर रख रहे हैं कि कहीं टैक्स नियमों का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा।

सूत्र बताते हैं कि यह ड्राफ्ट नोटिस केवल एक प्रारंभिक कदम है और कंपनी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। इसके बाद विभाग अंतिम आदेश जारी करेगा, जिसमें टैक्स देनदारी, पेनल्टी और अन्य कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

संभावित असर और आगे की राह

इस मामले का असर केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रह सकता। अगर विभाग का रुख सख्त रहता है और संधि लाभों को खारिज किया जाता है, तो इससे अन्य विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) और ट्रेडिंग फर्मों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश जाएगा कि भारत में अर्जित आय पर टैक्स अनुपालन को लेकर कोई ढील नहीं दी जाएगी।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से पारदर्शिता और टैक्स अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि नियम स्पष्ट और स्थिर रहें, ताकि विदेशी निवेशकों का भरोसा बना रहे।

फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि Jane Street इस नोटिस का क्या जवाब देती है और इनकम टैक्स विभाग अंतिम निर्णय में क्या रुख अपनाता है। यह मामला आने वाले समय में भारत के टैक्स ढांचे और विदेशी निवेश के समीकरण को प्रभावित कर सकता है।

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