जाली नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र, पुलिस और सीआईडी सत्यापन दस्तावेज तैयार कर बेरोजगारों को बनाया शिकार; आर्थिक अपराध शाखा ने श्रीनगर अदालत में आरोपपत्र किया पेश

फर्जी नियुक्ति पत्र से सरकारी नौकरी का झांसा: ₹23 लाख की ठगी मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

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By Roopa
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जम्मू: जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र और जाली सरकारी दस्तावेज तैयार कर ₹23 लाख की कथित ठगी करने के मामले में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने तीन आरोपियों के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) श्रीनगर की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से सरकारी भर्ती का झांसा देकर शिकायतकर्ताओं से बड़ी रकम वसूली और नकली दस्तावेजों के जरिए पूरे भर्ती प्रक्रिया को वास्तविक दिखाने की कोशिश की।

आर्थिक अपराध शाखा के अनुसार, आरोपपत्र जिन तीन आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया गया है, उनमें गुलाम मोहम्मद शेख उर्फ गुलजार, मोहम्मद यूसुफ वानी और मोहम्मद अब्दुल्ला मीर शामिल हैं। जांच पूरी होने और पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद अदालत में चार्जशीट प्रस्तुत की गई है। अब मामले की आगे की सुनवाई न्यायालय में होगी।

पुलिस के अनुसार, इस मामले की शुरुआत एक शिकायत मिलने के बाद हुई थी। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि गुलाम मोहम्मद शेख ने सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनसे कुल ₹23 लाख की राशि प्राप्त की। आरोप था कि उन्हें विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्ति का आश्वासन दिया गया और विश्वास पैदा करने के लिए कई आधिकारिक दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए।

जांच के दौरान आर्थिक अपराध शाखा को ऐसे साक्ष्य मिले, जिनसे पता चला कि आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी नियुक्ति आदेश, नकली पहचान पत्र, जाली लाइसेंस, नियुक्ति पत्र तथा पुलिस और सीआईडी सत्यापन से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। इन दस्तावेजों का उद्देश्य नौकरी के प्रस्तावों को पूरी तरह वैध और सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा दिखाना था, ताकि शिकायतकर्ता किसी प्रकार का संदेह न करें।

जांच एजेंसी का कहना है कि दस्तावेजों के सत्यापन, संबंधित रिकॉर्ड की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद शिकायतों को प्रथम दृष्टया सही पाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि तीनों आरोपी कथित तौर पर आपसी मिलीभगत से काम कर रहे थे और शिकायतकर्ताओं को धोखा देकर उनकी मेहनत की कमाई हड़पने की साजिश में शामिल थे।

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आर्थिक अपराध शाखा ने मामले की जांच पूरी होने के बाद सभी उपलब्ध दस्तावेजी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। हालांकि जांच एजेंसी ने इस कथित फर्जी नौकरी रैकेट से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों या नेटवर्क के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि मामले में जिन अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है, उनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

जांच एजेंसी अब अदालत में प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष को मजबूत करने की तैयारी में है। यदि सुनवाई के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं या किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो मामले में आगे भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। आर्थिक अपराध शाखा का कहना है कि सरकारी नौकरी के नाम पर होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में कठोर कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का लालच देकर ठगी करने वाले गिरोह अक्सर फर्जी नियुक्ति पत्र, नकली सरकारी पहचान पत्र और जाली सत्यापन दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हैं ताकि पीड़ितों का विश्वास आसानी से जीता जा सके। ऐसे मामलों में दस्तावेजों की डिजिटल और फोरेंसिक जांच जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित होती है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि सरकारी नौकरी के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी में अपराधी फर्जी नियुक्ति पत्र, नकली पहचान पत्र और जाली सत्यापन दस्तावेजों का उपयोग कर युवाओं को भ्रमित करते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत कार्यालय से अवश्य करें। यदि कोई व्यक्ति नियुक्ति के बदले धन की मांग करता है या संदिग्ध दस्तावेज उपलब्ध कराता है तो तुरंत पुलिस या संबंधित जांच एजेंसी को इसकी सूचना दें, क्योंकि समय पर शिकायत ही ऐसे संगठित फर्जीवाड़े पर प्रभावी अंकुश लगाने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है।

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