पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जैसे हालात के बीच इजरायल में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां महज 14 साल के एक किशोर पर ईरान के लिए जासूसी करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, नाबालिग ने कथित तौर पर एक विदेशी एजेंट के संपर्क में आकर कई संवेदनशील गतिविधियों को अंजाम दिया और इसके बदले क्रिप्टोकरेंसी के रूप में भुगतान हासिल किया।
मामला तेल अवीव की जुवेनाइल कोर्ट में पहुंच चुका है, जहां किशोर के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए हैं। अभियोजकों का कहना है कि आरोपी ने पिछले साल अप्रैल में टेलीग्राम के जरिए एक ईरानी एजेंट से संपर्क स्थापित किया था। इसके बाद उसे अलग-अलग तरह के ‘टास्क’ दिए जाने लगे, जिनमें खुफिया जानकारी जुटाने से लेकर वीडियो रिकॉर्डिंग और प्रचार गतिविधियां शामिल थीं।
जांच के दौरान सामने आया कि किशोर ने तेल अवीव स्थित किर्या सैन्य मुख्यालय के आसपास वीडियो शूट किया। यह स्थान इजरायल के रक्षा ढांचे का बेहद अहम केंद्र माना जाता है। इसके अलावा उसने शहर के अन्य संवेदनशील इलाकों—जिनमें एक प्रमुख अस्पताल परिसर और रमत गन क्षेत्र शामिल हैं—की भी फुटेज रिकॉर्ड की। रमत गन वही इलाका है, जहां हाल ही में हुए मिसाइल हमले में एक बुजुर्ग दंपति की मौत हुई थी, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी को इन गतिविधियों के बदले अब तक करीब 1,170 अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹97,000) की राशि क्रिप्टोकरेंसी के रूप में प्राप्त हुई। यह भुगतान अलग-अलग चरणों में किया गया, ताकि किशोर को लगातार सक्रिय रखा जा सके और वह निर्देशों का पालन करता रहे। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें युवाओं को छोटी-छोटी रकम के लालच में फंसाकर बड़े सुरक्षा जोखिम पैदा किए जाते हैं।
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मामले का एक और पहलू यह है कि आरोपी को शहर के अलग-अलग हिस्सों में भड़काऊ और उकसावे वाले संदेश लिखने के निर्देश भी दिए गए थे। उसने कथित तौर पर कई दीवारों पर ऐसे नारे लिखे, जिनका उद्देश्य सामाजिक तनाव को भड़काना था। इनमें कुछ संदेशों में बदले और वैचारिक उकसावे के संकेत भी शामिल थे, जिससे माहौल को अस्थिर करने की कोशिश की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि किशोर ने अपने हैंडलर को स्पष्ट रूप से बताया था कि वह स्कूल के दौरान इन गतिविधियों को अंजाम नहीं दे पाएगा और केवल छुट्टियों में ही काम कर सकता है। इससे संकेत मिलता है कि यह संपर्क आकस्मिक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध और निरंतर था, जो समय के साथ गहराता गया।
सबसे गंभीर पहलुओं में से एक यह भी है कि आरोपी ने किर्या सैन्य मुख्यालय के पास एक अपार्टमेंट किराए पर लेने की कोशिश की थी। हालांकि वह इसमें सफल नहीं हो सका, लेकिन जांच एजेंसियों का मानना है कि अगर यह प्रयास सफल हो जाता, तो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता था, क्योंकि इससे उसे और अधिक संवेदनशील जानकारी जुटाने का मौका मिल सकता था।
अदालत में दाखिल आरोपों में विदेशी एजेंट के साथ संपर्क बनाए रखना, दुश्मन को खुफिया जानकारी देना और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालना जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। नाबालिग होने के कारण मामले की सुनवाई जुवेनाइल न्याय प्रणाली के तहत की जा रही है, लेकिन आरोपों की प्रकृति को देखते हुए इसे अत्यंत संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के बढ़ते इस्तेमाल के कारण इस तरह के मामलों में तेजी आई है। खासकर किशोरों और युवाओं को निशाना बनाकर उन्हें छोटे-छोटे कार्यों के जरिए बड़े नेटवर्क का हिस्सा बनाया जा रहा है। यह मामला इसी प्रवृत्ति का उदाहरण माना जा रहा है।
फिलहाल, मामले की जांच जारी है और एजेंसियां इस नेटवर्क के अन्य संभावित कड़ियों को खंगालने में जुटी हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह की गतिविधियों में और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
