बेंगलुरु: इंडियन प्रीमियर लीग यानी Indian Premier League के मैचों को लेकर बढ़ते उत्साह और टिकटों की भारी मांग के बीच एक बड़ा साइबर ठगी का मामला सामने आया है। शहर में फर्जी वेबसाइट बनाकर क्रिकेट प्रेमियों को निशाना बनाया गया, जहां उन्हें टिकट दिलाने के नाम पर ठगा गया। इस मामले में साइबर धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने Royal Challengers Bengaluru के आधिकारिक टिकटिंग प्लेटफॉर्म की हूबहू नकल करते हुए एक फर्जी वेबसाइट तैयार की। इस वेबसाइट को इस तरह डिजाइन किया गया था कि आम उपयोगकर्ता असली और नकली के बीच फर्क नहीं कर सके। खासतौर पर शहर में होने वाले मैचों के लिए जब टिकटों की मांग चरम पर थी, उसी समय इस फर्जी प्लेटफॉर्म को सक्रिय किया गया।
पुलिस के अनुसार, बेंगलुरु में 5, 15, 18 और 24 अप्रैल को मैच निर्धारित थे, जिनमें 5 अप्रैल को Chennai Super Kings के खिलाफ मुकाबला भी शामिल था। इन मैचों के टिकट पहले ही आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर बिक चुके थे। लेकिन इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए ठगों ने ऑनलाइन सर्च करने वाले लोगों को निशाना बनाया।
फर्जी वेबसाइट पर “एम चिन्नास्वामी स्टेडियम बेंगलुरु, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, आईपीएल 2026 टिकट ऑन सेल” जैसे आकर्षक संदेश दिखाए जाते थे। जैसे ही कोई उपयोगकर्ता इस वेबसाइट पर पहुंचता, उसे सीट चयन, टिकट श्रेणी और भुगतान विकल्प दिए जाते थे, जिससे पूरी प्रक्रिया बिल्कुल असली लगती थी।
पीड़ितों को भरोसा दिलाने के लिए वेबसाइट पर पेमेंट गेटवे भी जोड़े गए थे। लोग टिकट बुक करने के लिए भुगतान करते, लेकिन जैसे ही लेनदेन पूरा होता, वेबसाइट का लिंक तुरंत निष्क्रिय हो जाता। इसके बाद न तो टिकट मिलता और न ही संपर्क का कोई माध्यम बचता।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
अब तक कम से कम तीन लोगों ने इस धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं ने ₹7,196, ₹11,991 और ₹7,497 की ठगी होने की बात कही है। हालांकि जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआती आंकड़े हैं और वास्तविक रकम इससे कहीं अधिक हो सकती है।
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इस फर्जी नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये के लेनदेन हो चुके हैं। संबंधित बैंक खातों को ब्लॉक करने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से ऐसे लिंक हटाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि अधिकारियों ने यह भी माना कि इस तरह के फर्जी लिंक को हटाने में समय लगता है, जिससे ठगों को मौका मिल जाता है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ठग विशेष रूप से उन लोगों को निशाना बना रहे थे जो “बंपर टिकट सेल” या “लास्ट मिनट टिकट” जैसे कीवर्ड्स के जरिए ऑनलाइन खोज करते हैं। ऐसे में कई लोग जल्दबाजी और उत्साह में बिना सत्यापन किए भुगतान कर देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के साइबर अपराधों में सोशल इंजीनियरिंग का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “साइबर अपराधी लोगों की भावनाओं और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। लोकप्रिय आयोजनों के दौरान फर्जी वेबसाइट बनाना अब एक आम रणनीति बन चुकी है।”
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही टिकट खरीदें और किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। खासकर जब टिकट पहले ही ‘सोल्ड आउट’ घोषित हो चुके हों, तब किसी अन्य वेबसाइट पर उपलब्धता का दावा संदिग्ध माना जाना चाहिए।
यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। थोड़ी सी लापरवाही न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ा देती है।
