ED ने ₹103.42 करोड़ के इंदौर नगर निगम फर्जी बिल घोटाले में 20,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर 32 आरोपियों को नामजद किया है।

₹103.42 करोड़ के IMC फर्जी बिल घोटाले में ED की 20,000 पन्नों की चार्जशीट, 32 आरोपी नामजद

Team The420
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इंदौर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ₹103.42 करोड़ के इंदौर नगर निगम (IMC) फर्जी बिल घोटाले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत विशेष अदालत में 20,000 पन्नों की अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है। इस मामले में 32 आरोपियों को नामजद किया गया है। आरोपियों में ठेकेदार, इंदौर नगर निगम के अधिकारी, स्थानीय निधि लेखा परीक्षा/रेजिडेंट ऑडिट कार्यालय के अधिकारी तथा अन्य निजी व्यक्ति शामिल हैं, जिन पर अपराध से अर्जित धन को छिपाने, स्थानांतरित करने, परतदार (लेयरिंग) करने और उपयोग करने में भूमिका निभाने का आरोप है।

ईडी ने यह जांच एमजी रोड थाना, इंदौर में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इन मामलों में आरोप था कि इंदौर नगर निगम के कोषागार से फर्जी बिल, कूटरचित कार्यादेश (वर्क ऑर्डर), फर्जी मापन पुस्तिकाएं (मेजरमेंट बुक), झूठे पूर्णता प्रमाणपत्र, हेरफेर की गई नोटशीट और अन्य जाली दस्तावेजों के जरिए सरकारी धन का अवैध भुगतान कराया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, जिन कार्यों के नाम पर भुगतान लिया गया, उनमें से कई या तो कभी किए ही नहीं गए थे या पहले ही वास्तविक कार्यादेशों के तहत पूरे हो चुके थे।

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ईडी की जांच में सामने आया कि कई ठेकेदार फर्मों ने कथित तौर पर नगर निगम के अधिकारियों और ऑडिट विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी कार्यादेश फाइलें और नकली बिल तैयार किए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर नगर निगम के खजाने से लगभग ₹103.42 करोड़ की राशि कथित रूप से निकाल ली गई। एजेंसी का आरोप है कि यह पूरी धोखाधड़ी सुनियोजित तरीके से सरकारी अधिकारियों और निजी लाभार्थियों की मिलीभगत से संचालित की गई।

जांच के अनुसार, फर्जी तरीके से प्राप्त धनराशि का एक हिस्सा नकद निकाला गया और उसे ठेकेदारों, सरकारी कर्मचारियों तथा अन्य लाभार्थियों के बीच बांटा गया। इसके अलावा बड़ी रकम को संबंधित कंपनियों और सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से वैध कारोबारी लेनदेन का स्वरूप देकर विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इस धन का इस्तेमाल चल और अचल संपत्तियां खरीदने तथा व्यक्तिगत खर्चों में भी किया गया, ताकि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके।

मामले की जांच के दौरान ईडी ने 5 और 6 अगस्त 2024 को 20 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान लगभग ₹22.04 करोड़ मूल्य की संपत्तियां जब्त या फ्रीज की गईं। इनमें नकदी, बैंक खातों की राशि, फिक्स्ड डिपॉजिट, डीमैट होल्डिंग्स और म्यूचुअल फंड निवेश शामिल हैं। तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए, जिन्हें जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

इसके बाद ईडी ने पीएमएलए के तहत दो अस्थायी कुर्की आदेश जारी कर 52 अचल संपत्तियां भी कुर्क कीं, जिनकी अनुमानित कीमत ₹37.14 करोड़ है। इन संपत्तियों में व्यावसायिक प्रतिष्ठान, आवासीय मकान, भूखंड और कृषि भूमि शामिल हैं, जो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। अब तक इस मामले में कुल ₹59.18 करोड़ मूल्य की संपत्तियां कुर्क, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं।

जांच के दौरान ईडी ने कथित मास्टरमाइंड अभय सिंह राठौर को मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा के साथ पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि इन तीनों ने कथित धोखाधड़ी की योजना बनाने और अपराध से अर्जित धन को वैध दिखाने में केंद्रीय भूमिका निभाई।

ईडी ने 24 जुलाई को विशेष पीएमएलए अदालत, इंदौर में अभियोजन शिकायत दाखिल करते हुए कुर्क, जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों को जब्त (कन्फिस्केट) करने की मांग भी की है। अदालत ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को नोटिस और समन जारी किए हैं तथा मामले की अगली सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित कर दी है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में कूटरचना कर किए जाने वाले बड़े आर्थिक अपराधों में दस्तावेजों में हेरफेर, वित्तीय लेयरिंग और कई व्यक्तियों की संगठित भूमिका देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग रिकॉर्ड और संपत्तियों की फॉरेंसिक जांच से धन के प्रवाह का पता लगाने और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में मदद मिलती है। उनके अनुसार, सरकारी भुगतानों की डिजिटल निगरानी, मजबूत आंतरिक ऑडिट व्यवस्था और पारदर्शी वित्तीय नियंत्रण ऐसे आर्थिक अपराधों की रोकथाम के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

ईडी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है। एजेंसी अन्य संभावित लाभार्थियों की पहचान करने, अपराध से अर्जित शेष धन का पता लगाने और यह जांचने में जुटी है कि इस कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क में अन्य व्यक्ति या संस्थाएं भी शामिल थीं या नहीं।

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