इंदौर में 74 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार होकर जेल भेजा गया; गुजरात में डीलर/डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिलाने का झांसा देकर रकम लेने का आरोप, फरार बेटे की तलाश भी जारी

डीलरशिप के नाम पर ₹1 करोड़ की ठगी, अब बैंक खातों की जांच; रकम कहां गई खंगालेगी क्राइम ब्रांच

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By Roopa
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इंदौर: गुजरात क्षेत्र में डीलरशिप और डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिलाने का झांसा देकर करीब ₹1 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार 74 वर्षीय आरोपी मनोहरलाल गुप्ता के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद अब जांच टीम उसके बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिकायतकर्ता से कथित तौर पर हासिल की गई रकम किन खातों में गई और उसका इस्तेमाल कहां किया गया।

मामले में क्राइम ब्रांच ने मनोहरलाल गुप्ता पिता स्वर्गीय उमाशंकर गुप्ता, निवासी जानकी नगर एक्सटेंशन, भंवरकुआं, इंदौर को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर इंदौर स्थित आईएचएल मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड और इन्फुटेक हेल्थकेयर लिमिटेड में निदेशक और मुख्य संचालक के रूप में काम करते हुए कथित धोखाधड़ी करने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

गुजरात की डीलरशिप के नाम पर रकम लेने का आरोप

मामले की शिकायत गुजरात के झालोद, जिला दाहोद निवासी कमलेश अग्रवाल ने की थी। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने गुजरात क्षेत्र में डीलरशिप और डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिलाने का भरोसा देकर उनसे अलग-अलग चरणों में रकम ली। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुल ₹1 करोड़ की राशि 50-50 लाख रुपये के दो हिस्सों में जमा कराई गई।

शिकायत के अनुसार, शुरुआत में जुलाई 2022 तक डिस्ट्रीब्यूटर मार्जिन मनी के नाम पर करीब ₹28.50 लाख दिए गए थे। इसके बाद भी कथित तौर पर न तो तय मार्जिन मनी का भुगतान किया गया और न ही कारोबार शुरू करने के लिए माल उपलब्ध कराया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उसने अपनी मूल रकम वापस मांगी तो उसे भी वापस नहीं किया गया।

आरोप है कि रकम वापस मांगने पर शिकायतकर्ता के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। इसके बाद उसने मामले की शिकायत क्राइम ब्रांच से की।

बैंक स्टेटमेंट और दस्तावेजों की जांच

शिकायत मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने मामले से जुड़े बैंक स्टेटमेंट, लेजर, पत्राचार और अन्य दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान सामने आए रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और अमानत में खयानत से जुड़े आरोपों को सही पाया। इसके बाद कानूनी राय लेने की प्रक्रिया पूरी कर मामला दर्ज किया गया और जांच आगे बढ़ाई गई।

अब जांच का मुख्य फोकस कथित तौर पर ठगी गई रकम के प्रवाह पर है। पुलिस आरोपी के बैंक खातों की जानकारी जुटाकर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शिकायतकर्ता से मिली रकम किन खातों में जमा हुई, वहां से किन लोगों या संस्थाओं को भेजी गई और उसका इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया।

रकम की रिकवरी पर भी फोकस

जांच टीम यह भी पता लगाएगी कि कथित धोखाधड़ी से प्राप्त रकम का कोई हिस्सा संपत्ति खरीदने, कारोबार, व्यक्तिगत खर्च या अन्य वित्तीय गतिविधियों में लगाया गया या नहीं। बैंक खातों के लेनदेन से कथित रकम के पूरे वित्तीय रास्ते का पता लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

क्राइम ब्रांच का प्रयास शिकायतकर्ता की रकम की अधिक से अधिक रिकवरी कराने का भी है। इसके लिए बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और आरोपी से जुड़े अन्य लेनदेन की जांच की जा रही है। यदि जांच में रकम किसी अन्य व्यक्ति या खाते में स्थानांतरित होने की पुष्टि होती है तो उस दिशा में भी कार्रवाई की जा सकती है।

आरोपी के बेटे की तलाश जारी

मामले में आरोपी मनोहरलाल गुप्ता के बेटे की भी तलाश की जा रही है। पुलिस के अनुसार, वह फिलहाल फरार है और उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। उसकी तलाश के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

जांच में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि डीलरशिप दिलाने के नाम पर रकम लेने की पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित हुई और इसमें आरोपी के बेटे समेत अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। पुलिस कथित लेनदेन और दस्तावेजों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

फिलहाल मनोहरलाल गुप्ता जेल में है और मामले की वित्तीय जांच जारी है। बैंक खातों की पड़ताल, दस्तावेजों के सत्यापन और फरार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही कथित ₹1 करोड़ की धोखाधड़ी में रकम के वास्तविक इस्तेमाल और सभी संबंधित लोगों की भूमिका की तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।

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