कोच्चि: Indian Bank से जुड़े कथित ₹32 करोड़ के NRI होम लोन फर्जीवाड़े की जांच Crime Branch को सौंपे जाने की संभावना है। मामले की गंभीरता, कथित फर्जीवाड़े की रकम और जांच की जटिलता को देखते हुए Ernakulam Central पुलिस ने प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर Kochi City Police Chief को जांच Crime Branch को सौंपने की सिफारिश की है।
इस मामले में Ernakulam Central पुलिस थाने में बैंक अधिकारियों की शिकायत के आधार पर अब तक तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए जा चुके हैं। आरोप है कि NRI हाउसिंग लोन हासिल करने के लिए रोजगार प्रमाणपत्र, निवास संबंधी दस्तावेज और विदेश स्थित भारतीय मिशनों से जारी या सत्यापित किए गए दस्तावेजों की कथित तौर पर जालसाजी की गई।
मामला उस समय सामने आया जब कई कर्जदारों ने लोन की किस्तों का भुगतान करना बंद कर दिया। इससे बैंक को बड़ी वित्तीय क्षति होने लगी। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने लोन मंजूरी के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की जांच की। जांच में कई दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी पाए गए, जिसके बाद बैंक अधिकारियों ने पुलिस से शिकायत की।
पुलिस की अब तक की जांच के अनुसार, कथित फर्जीवाड़े में अलग-अलग चरणों में NRI होम लोन हासिल किए गए। आरोप है कि लोन आवेदनों के साथ फर्जी रोजगार प्रमाणपत्र और रेजिडेंट परमिट लगाए गए। इनमें कुछ दस्तावेज ऐसे तैयार किए गए थे, जिनसे यह प्रतीत होता था कि वे विदेश स्थित भारतीय राजनयिक मिशनों की ओर से जारी या सत्यापित किए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने Riyadh स्थित भारतीय मिशन के नाम पर कथित तौर पर फर्जी रोजगार प्रमाणपत्र और रेजिडेंट परमिट का इस्तेमाल किया। इसके अलावा Riyadh, Muscat और Doha स्थित भारतीय राजनयिक मिशनों से जारी होने का दावा करने वाले कथित फर्जी अटेस्टेशन दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल आवेदकों की विदेश में नौकरी और NRI के रूप में लोन लेने की पात्रता साबित करने के लिए किए जाने का आरोप है।
Kochi स्थित एक वित्तीय सेवा कंपनी के Managing Director Midhun Michel Manuel और Director Mable Mary को कथित फर्जीवाड़े में अहम भूमिका निभाने का आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार, दोनों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर लोन आवेदन जमा कराने और आवेदकों के नाम पर कथित फर्जी दस्तावेज तैयार या व्यवस्थित करने में भूमिका निभाई।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि 25 लोगों के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर कुल 12 लोन हासिल किए गए। Midhun और Mable भी आरोपियों में शामिल हैं। Ernakulam Central थाने में दर्ज FIR में कुल 28 आरोपियों के नाम हैं। पुलिस के अनुसार, इन लोन की रकम ₹50 लाख से लेकर ₹3.30 करोड़ तक थी और कुल कथित वित्तीय जोखिम करीब ₹32 करोड़ का है।
शुरुआत में पुलिस ने वित्तीय सेवा कंपनी के प्रतिनिधियों और चार अन्य लोगों को आरोपी बनाया था। हालांकि, जांच आगे बढ़ने पर कथित फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई। इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कुछ और लोगों को मामले में आरोपी बनाया गया।
Ernakulam Central थाने में 7 अगस्त को दर्ज FIR में Indian Penal Code की धारा 406, 420, 463, 464, 465, 467, 471 और 34 के तहत आरोप लगाए गए हैं। FIR के मुताबिक कथित अपराध 13 मई 2022 से 21 दिसंबर 2024 के बीच हुए।
Crime Branch को जांच सौंपे जाने के बाद कथित फर्जीवाड़े के पूरे वित्तीय नेटवर्क की पड़ताल किए जाने की संभावना है। जांच में बैंक खातों, लोन के भुगतान, रकम के हस्तांतरण, किस्तों और अन्य वित्तीय लेनदेन की जांच की जा सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि लोन की रकम कहां गई और इससे किस-किस व्यक्ति को लाभ हुआ।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित फर्जी दस्तावेजों की तैयारी और इस्तेमाल भी होगा। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि रोजगार प्रमाणपत्र, रेजिडेंट परमिट और राजनयिक मिशनों के कथित अटेस्टेशन दस्तावेज कैसे तैयार किए गए और क्या इन्हें उपलब्ध कराने में किसी बिचौलिए या अन्य व्यक्ति की भूमिका थी।
Crime Branch यह भी जांच कर सकती है कि कथित नेटवर्क केवल Indian Bank तक सीमित था या अन्य बैंकों में भी इसी तरीके से लोन हासिल किए गए। यदि समान दस्तावेज, नाम या प्रक्रिया से जुड़े अन्य मामलों के प्रमाण मिलते हैं, तो जांच का दायरा बढ़ सकता है।
फिलहाल पुलिस लोन रिकॉर्ड, दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। आरोपों की पुष्टि अभी अदालत में नहीं हुई है। आगे की जांच से आरोपियों की वास्तविक भूमिका, दस्तावेजों की प्रामाणिकता और कथित फर्जीवाड़े के पीछे किसी बड़े संगठित नेटवर्क की मौजूदगी स्पष्ट होगी।
