नई दिल्ली। देश में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर बड़ा अलर्ट जारी हुआ है। ड्रग रेगुलेटर ने 90 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के सैंपल बिना मंजूरी के पाए जाने के बाद देशभर में जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इनमें पैरासिटामोल, मल्टीविटामिन, फोलिक एसिड, विभिन्न सिरप और क्रीम जैसी आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये दवाएं ‘न्यू ड्रग’ की श्रेणी में आती हैं, जिनके निर्माण और बिक्री से पहले केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण से मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद इनका उत्पादन और वितरण किए जाने के संकेत मिले हैं। इसी के मद्देनजर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट्रोलर्स को निर्देश दिया गया है कि वे इन दवाओं की स्थिति की तत्काल जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि इन्हें आवश्यक अनुमोदन प्राप्त है या नहीं।
FCRF Launches Premier CISO Certification Amid Rising Demand for Cybersecurity Leadership
रेगुलेटर द्वारा भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि SUGAM पोर्टल के तहत वर्ष 2025 के लैब परीक्षण डेटा में बड़ी संख्या में ऐसे FDC सैंपल सामने आए हैं, जो बिना मंजूरी के पाए गए। नियमों के अनुसार, कोई भी ‘न्यू ड्रग’ तब तक बाजार में नहीं लाई जा सकती, जब तक उसे संबंधित प्राधिकरण से स्वीकृति न मिल जाए। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन और शुल्क जमा करना अनिवार्य होता है।
जांच एजेंसियों ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है। बिना मंजूरी वाली दवाएं न केवल मरीजों के इलाज पर असर डाल सकती हैं, बल्कि इनके साइड इफेक्ट्स और गुणवत्ता को लेकर भी कोई स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं होती। ऐसे में इन दवाओं की मौजूदगी स्वास्थ्य प्रणाली में एक बड़ी खामी की ओर इशारा करती है।
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि संबंधित निर्माता, मार्केटर और अन्य हितधारकों के खिलाफ उचित जांच और नियामकीय कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर सख्ती से रोक लगे। राज्यों को यह भी कहा गया है कि वे जल्द से जल्द ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATR) प्रस्तुत करें।
मामले में एक अहम बिंदु यह भी है कि यदि किसी निर्माता ने नई दवा के लिए आवश्यक अनुमति का आवेदन पहले ही दिया है, तो उसकी प्रति भी उपलब्ध कराई जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं प्रक्रिया के दौरान नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि FDC दवाओं का उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में आम है, लेकिन इनके संयोजन की वैज्ञानिकता और सुरक्षा का परीक्षण बेहद जरूरी होता है। यदि बिना परीक्षण या मंजूरी के ऐसी दवाएं बाजार में पहुंचती हैं, तो यह मरीजों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस कार्रवाई से दवा उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही, यह संदेश भी जाएगा कि नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।
फिलहाल, पूरे देश में इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर लिया गया है और संबंधित एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। आने वाले दिनों में जांच के दायरे में और भी दवाएं आ सकती हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो इसमें शामिल कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम दवा नियमन प्रणाली के लिए एक अहम परीक्षा की तरह है। मरीजों की सुरक्षा और भरोसे को बनाए रखने के लिए यह जरूरी होगा कि ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि बाजार में केवल सुरक्षित और प्रमाणित दवाएं ही उपलब्ध हों
