नई दिल्ली: देश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। केंद्र सरकार ने राज्यसभा को बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान जांचे गए 1.41 लाख दवा नमूनों में से 3,012 नमूने मानक गुणवत्ता (Not of Standard Quality-NSQ) पर खरे नहीं उतरे, जबकि 283 दवाएं नकली (Spurious) पाई गईं। इन मामलों में नकली दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण में कथित संलिप्त लोगों के खिलाफ 779 अभियोजन (Prosecution Cases) दर्ज किए गए हैं। सरकार का कहना है कि राज्यों के औषधि नियंत्रक लगातार निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई कर रहे हैं ताकि बाजार में असुरक्षित और नकली दवाओं की आपूर्ति पर रोक लगाई जा सके।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्यों के औषधि नियंत्रकों द्वारा नियमित निरीक्षण, सैंपलिंग और प्रयोगशाला परीक्षण के माध्यम से दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी की जाती है। जिन मामलों में दवाएं मानकों के अनुरूप नहीं पाई जातीं या नकली होने की पुष्टि होती है, वहां संबंधित प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है।
सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में 1,16,323 दवा नमूनों की जांच की गई थी, जिनमें 3,104 नमूने मानक गुणवत्ता से कम पाए गए, जबकि 245 दवाएं नकली थीं। उस वर्ष नकली और घटिया दवाओं के निर्माण, बिक्री तथा वितरण से जुड़े मामलों में 961 अभियोजन दर्ज किए गए थे।
इसी प्रकार 2023-24 के दौरान 1,06,150 दवा नमूनों की जांच में 2,988 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जबकि 282 दवाएं नकली पाई गईं। इस अवधि में 604 अभियोजन दर्ज किए गए। वहीं 2022-23 में 96,713 नमूनों में से 3,053 नमूने मानकों के अनुरूप नहीं थे और 424 दवाएं नकली मिलीं, जिनसे जुड़े 663 मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2021-22 में 88,844 नमूनों की जांच में 2,545 नमूने मानक गुणवत्ता से कम और 379 दवाएं नकली पाई गईं, जबकि 592 अभियोजन दर्ज हुए।
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि Drugs and Cosmetics Act, 1940 में “Counterfeit Medicines” शब्द की अलग से परिभाषा नहीं दी गई है। हालांकि कानून में Spurious Drugs (नकली दवाएं), Adulterated Drugs (मिलावटी दवाएं) और Misbranded Drugs (भ्रामक लेबल वाली दवाएं) की स्पष्ट परिभाषा मौजूद है, जिसके दायरे में नकली दवाएं भी शामिल होती हैं। ऐसे मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है।
सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान समय में देश में नकली दवाओं के कुल कारोबार या उनके अनुमानित बाजार आकार का आकलन करने के लिए कोई अलग राष्ट्रीय अध्ययन उपलब्ध नहीं है। हालांकि नियमित सैंपलिंग, प्रयोगशाला परीक्षण और प्रवर्तन कार्रवाई के माध्यम से बाजार की निगरानी की जा रही है।
दवा सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मानक गुणवत्ता से कम दवाएं और नकली दवाएं मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। ऐसी दवाओं से उपचार विफल होने, संक्रमण बढ़ने, दवा प्रतिरोध (Drug Resistance) विकसित होने और कई मामलों में जानलेवा जटिलताएं उत्पन्न होने का जोखिम रहता है। इसलिए निर्माण इकाइयों, वितरण श्रृंखला और खुदरा विक्रेताओं की नियमित निगरानी अत्यंत आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नकली दवाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए केवल प्रयोगशाला परीक्षण पर्याप्त नहीं है। दवाओं की पूरी सप्लाई चेन की निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग, बैच सत्यापन, लाइसेंसधारी विक्रेताओं से खरीद, उपभोक्ता जागरूकता और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मरीजों को दवा खरीदते समय हमेशा अधिकृत मेडिकल स्टोर से बिल लेना, पैकेजिंग, बैच नंबर, निर्माण एवं समाप्ति तिथि तथा निर्माता की जानकारी की जांच करनी चाहिए। सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि राज्यों के औषधि नियंत्रक नियमित जांच अभियान जारी रखेंगे और नकली तथा घटिया दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
