नाबालिग और युवाओं के जरिए संवेदनशील स्थानों पर कैमरे लगाए गए; केंद्रीय एजेंसियों ने ऑडिट का आदेश दिया

पाकिस्तान लिंक्ड जासूसी रैकेट का खुलासा, देशभर में सुरक्षा कैमरों की समीक्षा

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली। गाजियाबाद पुलिस द्वारा पाकिस्तान समर्थित जासूसी रैकेट के पर्दाफाश के बाद, देश के प्रमुख शहरों में सीसीटीवी नेटवर्क की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी गई है। केंद्रीय एजेंसियों ने सभी राज्य पुलिस बलों और स्थानीय प्रशासनिक निकायों को आदेश दिया है कि वे अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी कैमरों का तुरंत भौतिक सत्यापन करें और किसी भी अनधिकृत या पंजीकृत नहीं किए गए यूनिट की पहचान करें।

अधिकारियों ने बताया कि यह कदम भारतीय सुरक्षा ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पिछले वर्षों में लिए गए सबसे महत्वपूर्ण निर्देशों में से एक है। ऑडिट में न केवल दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों के संवेदनशील क्षेत्रों को शामिल किया गया है, बल्कि प्रमुख सड़क मार्गों, हाईवे और रणनीतिक गलियारों की भी समीक्षा की जाएगी।

जांच में सामने आया कि पकड़े गए पाकिस्तान-लिंक्ड जासूसी रैकेट ने केवल मौजूदा कैमरों का दुरुपयोग नहीं किया, बल्कि संवेदनशील स्थानों पर अपने खुद के कैमरे भी छिपकर लगाए। इनमें दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन और सोनीपत रेलवे स्टेशन शामिल हैं। ये कैमरे सोलर पावर से संचालित थे और कथित तौर पर लाइव फुटेज सीधे पाकिस्तान स्थित ISI हैंडलरों को भेजा जा रहा था। जांचकर्ताओं के अनुसार, नेटवर्क ने देश के अन्य शहरों में इसी तरह के कई कैमरे लगाने की योजना बनाई थी।

सेंटरल एजेंसियों ने यह भी पाया कि रैकेट ने नाबालिगों और स्थानीय युवाओं को काम में लगाया। उनके जरिए कैमरे लगवाए गए और भुगतान भी किया गया। मुख्य आरोपी, मेरठ के सोहैल मलिक, कथित रूप से ₹10,000 में वीडियो क्लिप सौंपने के लिए जिम्मेदार था, जबकि अन्य आरोपी युवाओं की भर्ती और उनके भुगतान की व्यवस्था संभाल रहे थे। छापेमारी में फोन, दस्तावेज और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए।

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देश के बड़े शहरों में वर्षों में हजारों सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं, जिन्हें नगर निगम, रेलवे प्राधिकरण, पुलिस विभाग और निजी ठेकेदारों ने अलग-अलग मानकों और प्रोटोकॉल के साथ लगाया। इसके चलते कैमरों में कई तरह की कमजोरियां और ब्लाइंड स्पॉट पैदा हो गए। केंद्रीय एजेंसियों का उद्देश्य यह है कि कोई भी कैमरा सुरक्षा अधिकारियों की जानकारी और निगरानी के बिना न चले।

ऑडिट का दायरा केवल संवेदनशील क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि सभी कैमरों का रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा और उन यूनिट को चिन्हित किया जाएगा जिन्हें ट्रैक नहीं किया जा सकता। रेलवे स्टेशन, कैंटोनमेंट क्षेत्र, हाईवे और सैन्य गतिविधियों वाले मार्गों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, मौजूदा नेटवर्क के एक्सेस कंट्रोल की समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लाइव फीड को किसी भी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा इंटरसेप्ट या रीडायरेक्ट न किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑडिट देश में मानकीकृत राष्ट्रीय निगरानी प्रोटोकॉल स्थापित करने की दिशा में पहला कदम है, जो अब तक औपचारिक रूप से लागू नहीं हुआ था। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अनियंत्रित कैमरे को केवल प्रशासनिक अंतराल नहीं, बल्कि रणनीतिक कमजोरी माना जाना चाहिए, जिसे शत्रु आसानी से भुना सकता है।

इस ऑपरेशन से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियां समय रहते विदेशी जासूसी प्रयासों को पहचान, निरस्त और समाप्त करने में सक्षम हैं। केंद्रीय एजेंसियों की इस पहल से देश के संवेदनशील स्थानों और नागरिक सुरक्षा में नए सुरक्षा मानक स्थापित होने की उम्मीद है।

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