नई दिल्ली। ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के बढ़ते नेटवर्क पर केंद्र सरकार ने एक बड़ा डिजिटल प्रहार करते हुए 300 से अधिक ऐप और वेबसाइटों को ब्लॉक कर दिया है। यह कार्रवाई ऐसे प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ की गई है, जो देशभर में अवैध रूप से ऑनलाइन सट्टा, कसीनो गेम्स और बेटिंग एक्सचेंज का संचालन कर रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बड़े पैमाने पर आम लोगों को लुभाकर अवैध लेनदेन और वित्तीय धोखाधड़ी को बढ़ावा दिया जा रहा था।
सरकार की इस कार्रवाई का दायरा केवल स्पोर्ट्स सट्टेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ऑनलाइन कसीनो, कार्ड गेम्स और ‘रियल-मनी’ गेमिंग ऐप्स भी शामिल हैं। जांच में सामने आया कि कई प्लेटफॉर्म खुद को वैध गेमिंग ऐप के रूप में पेश कर रहे थे, लेकिन भीतर ही भीतर सट्टा बाजार की तरह काम कर रहे थे। इन ऐप्स के जरिए यूजर्स को भारी मुनाफे का लालच देकर पैसा निवेश कराया जाता था और बाद में उन्हें नुकसान उठाना पड़ता था।
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सूत्रों के मुताबिक, ब्लॉक किए गए अधिकांश प्लेटफॉर्म विदेशी सर्वर से संचालित हो रहे थे, जिससे उन पर सीधे कानूनी कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद सरकार ने तकनीकी माध्यमों का उपयोग करते हुए इनकी पहुंच भारत में पूरी तरह बंद कर दी है। साथ ही, इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े वित्तीय लेनदेन और बैंकिंग ट्रेल की भी जांच शुरू कर दी गई है, ताकि इनके पीछे सक्रिय नेटवर्क तक पहुंचा जा सके।
इस कार्रवाई के पीछे ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए नए कानूनी ढांचे की अहम भूमिका है। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि ‘गेम ऑफ स्किल’ और ‘गेम ऑफ चांस’ के बीच अंतर को ध्यान में रखते हुए अवैध सट्टेबाजी पर सख्त रोक लगाई जाएगी। इसी दिशा में अब सख्ती बढ़ाते हुए ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई तेज की गई है, जो कानून की आड़ में अवैध गतिविधियां चला रहे थे।
अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब इतने बड़े पैमाने पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक किया गया है। अब तक कुल 8,400 से अधिक वेबसाइटों और ऐप्स को बंद किया जा चुका है। इनमें से लगभग 4,900 प्लेटफॉर्म्स उस समय बंद किए गए, जब ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित नया कानून लागू हुआ था। ताजा कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें लगातार निगरानी के आधार पर संदिग्ध प्लेटफॉर्म्स की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के नेटवर्क केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से भी जुड़े होते हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए पैसे को विभिन्न खातों और डिजिटल वॉलेट्स में घुमाकर ट्रैक करना मुश्किल बना दिया जाता है। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि यूजर्स के निजी डेटा का दुरुपयोग कर उन्हें बार-बार निवेश के लिए उकसाया जाता है।
डिजिटल सुरक्षा से जुड़े एक विशेषज्ञ का कहना है कि सट्टेबाजी ऐप्स अब सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और फर्जी विज्ञापनों के जरिए तेजी से फैल रहे हैं। “यूजर्स को फ्री बोनस, गारंटीड जीत और हाई रिटर्न का लालच देकर इन प्लेटफॉर्म्स की ओर आकर्षित किया जाता है। एक बार पैसा लगाने के बाद बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है,” उन्होंने कहा।
सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान या संदिग्ध गेमिंग ऐप या वेबसाइट पर पैसा निवेश करने से बचें। इसके अलावा, अगर किसी प्लेटफॉर्म की वैधता को लेकर संदेह हो तो उसकी जानकारी संबंधित प्राधिकरण को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह की कार्रवाई और तेज हो सकती है, क्योंकि डिजिटल इकोनॉमी के विस्तार के साथ ही साइबर अपराध के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम न केवल अवैध सट्टेबाजी पर लगाम लगाने की दिशा में अहम है, बल्कि आम यूजर्स के वित्तीय हितों की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
