इचलकरंजी के उद्योगपति को बिजनेस ई-मेल कॉम्प्रोमाइज (BEC) साइबर हमले का बनाया शिकार; फर्जी इनवॉइस भेजकर अमेरिका के बैंक खाते में ट्रांसफर कराए रुपये, डिजिटल ट्रेल और वित्तीय लेनदेन की जांच तेज

कंपनी का ई-मेल हैक कर ₹19.33 लाख की साइबर ठगी: विदेशी सप्लायर बनकर भुगतान दूसरी बैंक में कराया, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच शुरू

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By Roopa
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कोल्हापुर: महाराष्ट्र के इचलकरंजी में बिजनेस ई-मेल कॉम्प्रोमाइज (Business Email Compromise-BEC) साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें एक उद्योगपति से ₹19.33 लाख की ऑनलाइन ठगी कर ली गई। आरोप है कि साइबर अपराधियों ने कंपनी का आधिकारिक ई-मेल हैक कर विदेशी व्यावसायिक साझेदार का रूप धारण किया और बैंक खाते में बदलाव का झांसा देकर वैध अंतरराष्ट्रीय भुगतान को अपने नियंत्रण वाले खाते में ट्रांसफर करा लिया। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस के अनुसार, रामकृष्णनगर निवासी और मिरेकल इंडस्ट्रीज के संचालक रजत राजेंद्रकुमार राठी ने शिकायत दर्ज कराई है कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने उनकी कंपनी के आधिकारिक ई-मेल अकाउंट में अनधिकृत रूप से प्रवेश कर विदेशी सप्लायर के साथ होने वाले नियमित व्यावसायिक संवाद पर नजर रखी। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपियों ने पहले कंपनी के व्यापारिक लेनदेन, भुगतान की प्रक्रिया और ई-मेल संचार का अध्ययन किया, जिसके बाद पूरी योजना को अंजाम दिया गया ताकि फर्जी संदेश भी वास्तविक प्रतीत हों।

जांच में सामने आया है कि 29 जून से 15 जुलाई के बीच आरोपियों ने कंपनी के नियमित विदेशी सप्लायर की ओर से ई-मेल भेजे जाने का आभास कराया। ई-मेल में दावा किया गया कि सप्लायर के बैंक खाते में तकनीकी समस्या आ गई है और भविष्य के सभी भुगतान नए बैंक खाते में किए जाएं। इसके साथ ही “डीके इंटरप्राइजेज एलएलसी” के नाम से नया प्रोफॉर्मा इनवॉइस तथा बैंक ऑफ अमेरिका के खाते का विवरण भी भेजा गया, जिससे यह पूरा लेनदेन सामान्य व्यावसायिक प्रक्रिया जैसा लगे।

ई-मेल को वास्तविक मानते हुए राठी ने 22,225 अमेरिकी डॉलर, जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत लगभग ₹19.33 लाख है, बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। उस समय उन्हें किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ क्योंकि भुगतान कंपनी के नियमित अंतरराष्ट्रीय व्यापार का हिस्सा था और सभी दस्तावेज पहली नजर में वैध दिखाई दे रहे थे।

ठगी का खुलासा तब हुआ जब तय समय के भीतर माल की आपूर्ति नहीं हुई। इसके बाद राठी ने स्वतंत्र माध्यम से वास्तविक विदेशी सप्लायर से संपर्क किया, जहां पता चला कि कंपनी ने कभी भी बैंक खाते में बदलाव का अनुरोध नहीं किया था और न ही नया प्रोफॉर्मा इनवॉइस जारी किया था। आगे की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि भुगतान संबंधी सभी ई-मेल फर्जी थे और कंपनी की ई-मेल प्रणाली से छेड़छाड़ कर साइबर ठगी को अंजाम दिया गया था।

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पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने ई-मेल हैकिंग, ई-मेल स्पूफिंग या बिजनेस ई-मेल कॉम्प्रोमाइज जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर गोपनीय व्यावसायिक जानकारी हासिल की। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या अपराधियों ने मूल ई-मेल सर्वर से समझौता किया था या फिर हूबहू मिलते-जुलते ई-मेल पते बनाकर पूरे संचार तंत्र को भ्रमित किया।

साइबर विशेषज्ञ ई-मेल हेडर, सर्वर लॉग, आईपी एड्रेस, डोमेन रिकॉर्ड और बैंकिंग लेनदेन का फोरेंसिक विश्लेषण कर धन के प्रवाह का पता लगाने में जुटे हैं। साथ ही संबंधित वित्तीय संस्थानों के सहयोग से यह भी जांच की जा रही है कि ट्रांसफर की गई राशि को आगे अन्य खातों में भेजा गया या अभी उसे ट्रैक अथवा फ्रीज किया जा सकता है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि बिजनेस ई-मेल कॉम्प्रोमाइज आज अंतरराष्ट्रीय वित्तीय साइबर अपराध का सबसे तेजी से बढ़ता तरीका बन चुका है, क्योंकि इसमें तकनीकी कमजोरी से अधिक मानवीय विश्वास का फायदा उठाया जाता है। उन्होंने सलाह दी कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने वाली कंपनियां बैंक खाते में बदलाव संबंधी किसी भी अनुरोध का भुगतान करने से पहले आधिकारिक फोन कॉल या अन्य सुरक्षित माध्यम से स्वतंत्र रूप से सत्यापन अवश्य करें। उनके अनुसार मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, ई-मेल सुरक्षा की नियमित निगरानी और कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण ऐसे हमलों से बचाव के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इसी गिरोह ने अन्य भारतीय कंपनियों को भी इसी तरह निशाना बनाया है। डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ डोमेन पंजीकरण, ई-मेल संचार, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर संभावित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और यदि किसी संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने आती है तो मामले में आगे और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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