नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुरक्षा और साइबर अपराध से जुड़ी चिंताओं के मद्देनजर ब्लूटूथ आधारित मैसेजिंग एप्लिकेशन Bitchat को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। गृह मंत्रालय के तहत कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (Indian Cyber Crime Coordination Centre-I4C) ने माइक्रोसॉफ्ट की सहायक कंपनी GitHub को नोटिस जारी कर इस एप्लिकेशन को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध के दौरान ब्लूटूथ आधारित मैसेजिंग एप्लिकेशन के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई थी।
23 जुलाई 2026 की तारीख वाले नोटिस के अनुसार, I4C ने GitHub से Bitchat से संबंधित सामग्री हटाने को कहा है। इस नोटिस को ऐप के डेवलपर और ट्विटर (अब X) के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैक डोर्सी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया। डोर्सी ने अपने पोस्ट में दावा किया कि भारत सरकार Bitchat जैसी तकनीकों को पसंद नहीं करती और इसी कारण इसे हटाने की मांग की गई है। हालांकि, सरकार की ओर से इस मामले में विस्तृत सार्वजनिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है।
Bitchat एक ब्लूटूथ आधारित मैसेजिंग एप्लिकेशन बताया जाता है, जो पारंपरिक इंटरनेट कनेक्शन या मोबाइल डेटा के बिना निकटवर्ती डिवाइसों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करने की क्षमता प्रदान करता है। ऐसे एप्लिकेशन विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोग किए जा सकते हैं, जहां इंटरनेट सेवाएं बाधित हों या अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हों। यही विशेषता सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि इससे सामान्य इंटरनेट निगरानी तंत्र के बाहर भी संचार संभव हो जाता है।
सूत्रों के अनुसार, हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ प्रतिभागियों को ब्लूटूथ आधारित मैसेजिंग एप्लिकेशन का उपयोग करते हुए देखा गया था। इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध लागू होने के बाद वैकल्पिक संचार माध्यमों के इस्तेमाल की यह जानकारी सुरक्षा एजेंसियों के संज्ञान में आई। इसके बाद संबंधित एजेंसियों ने ऐसे प्लेटफॉर्मों की समीक्षा शुरू की और सुरक्षा जोखिमों का आकलन किया।
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भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र देश में साइबर अपराधों की रोकथाम, डिजिटल सुरक्षा और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए कार्य करता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऐसे उपकरण, जिनका दुरुपयोग अपराध, अवैध गतिविधियों या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली परिस्थितियों में किया जा सकता है, उन पर समय-समय पर संबंधित एजेंसियां कार्रवाई करती रही हैं। हालांकि, किसी तकनीक के उपयोग और उसके संभावित दुरुपयोग के बीच संतुलन बनाए रखना भी नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती माना जाता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑफलाइन या पीयर-टू-पीयर संचार तकनीकों के बढ़ते उपयोग के साथ नियामक संस्थाओं के सामने नई चुनौतियां उभर रही हैं। ऐसी तकनीकों का उपयोग आपदा, आपातकाल या सीमित नेटवर्क वाले क्षेत्रों में उपयोगी हो सकता है, लेकिन यदि उनका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों या कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के उद्देश्य से किया जाए, तो सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं। इसलिए ऐसी तकनीकों के नियमन और उनके वैध उपयोग के बीच संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक माना जाता है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि GitHub ने सरकारी नोटिस पर क्या कार्रवाई की है या ऐप को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है या नहीं। साथ ही, यह भी सामने नहीं आया है कि इस मामले में ऐप के डेवलपर की ओर से कोई औपचारिक कानूनी जवाब दिया गया है या नहीं। आने वाले दिनों में इस मामले में सरकार, GitHub और डेवलपर की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी। यह मामला डिजिटल संचार तकनीकों, साइबर सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर नई बहस भी खड़ी कर सकता है।
