फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग ऐप के जाल में फंसे टेक प्रोफेशनल; ऑनलाइन निवेश योजनाओं में धोखाधड़ी का बढ़ता खतरा

हैदराबाद के टेक पेशेवर से 1.55 करोड़ की ठगी, साइबर पुलिस ने चेताया निवेश स्कैम के प्रति सावधानी बरतने को

Roopa
By Roopa
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हैदराबाद: हैदराबाद के गोलकुंडा में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर पेशेवर वैंकटा नागा भरत सिमा गुप्ता को फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग निवेश स्कैम में ₹1.55 करोड़ का चूना लगाया गया। धोखेबाजों ने ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर गुप्ता का विश्वास जीतने के बाद उन्हें बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित किया।

पुलिस के अनुसार, गुप्ता को फरवरी की शुरुआत में एक व्हाट्सएप लिंक मिला, जिसमें ‘एक्सपर्ट ट्रेडिंग टिप्स’ का दावा किया गया। इसके बाद वह एक ग्रुप में शामिल हो गए, जहां अन्य सदस्यों ने मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा किए। इससे गुप्ता में विश्वास और आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ।

इसके बाद, धोखेबाजों ने गुप्ता को एक मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा। गुप्ता ने उनके निर्देशों का पालन किया और 3 मार्च से 23 मार्च के बीच लगातार पैसे ट्रांसफर किए। इस अवधि के दौरान ऐप ने लगभग ₹2.40 करोड़ का वर्चुअल मुनाफा दिखाया, लेकिन बाद में कोई राशि निकालना संभव नहीं हुआ। इससे गुप्ता को शक हुआ और उन्होंने अधिकारियों से शिकायत की।

हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि वे धोखेबाजों द्वारा इस्तेमाल किए गए तरीकों और डिजिटल ट्रेल की पड़ताल कर रहे हैं।

साइबर क्राइम पुलिस ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऑनलाइन निवेश योजनाओं में फंसने से बचें, जो त्वरित और उच्च रिटर्न का दावा करती हैं। ऐसे स्कैम अक्सर नकली डेटा और मनिपुलेटेड स्क्रीनशॉट का उपयोग करके निवेशकों को भ्रमित करते हैं।

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अधिकारियों ने कहा कि निवेश प्लेटफॉर्म का सत्यापन किए बिना किसी भी धनराशि का ट्रांसफर न करें। साथ ही, अज्ञात लिंक और संदिग्ध ऐप्स से दूर रहने की सलाह दी। इस मामले ने निवेश स्कैम और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते जोखिम को स्पष्ट किया है, और निवेशकों के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामले दिखाते हैं कि साइबर अपराध और निवेश धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और लोगों को ऑनलाइन वित्तीय प्रस्तावों में सावधानी बरतनी चाहिए।

गुप्ता का अनुभव यह भी दिखाता है कि साइबर अपराधी कैसे तकनीकी और मनोवैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर लोगों को फंसा सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण करके अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

इस घटना ने निवेशकों और आम जनता को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि ऑनलाइन निवेश के मामलों में सतर्कता आवश्यक है। यदि कोई निवेश योजना अत्यधिक रिटर्न का वादा करती है और स्रोत अस्पष्ट है, तो उसे तुरंत गंभीरता से जांचना चाहिए और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट संबंधित साइबर सेल को करनी चाहिए।

यह मामला साइबर क्राइम के बढ़ते स्वरूप को उजागर करता है और अन्य राज्यों में निवेशक सुरक्षा के लिए प्रशासन और पुलिस के लिए एक मार्गदर्शक चेतावनी के रूप में काम करेगा।

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