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‘रेंट-ए-बॉयफ्रेंड’ के नाम पर साइबर ठगी का नया जाल, हैदराबाद पुलिस ने महिलाओं को किया सतर्क

Roopa
By Roopa
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हैदराबाद: सोशल मीडिया पर ‘रेंट-ए-बॉयफ्रेंड’ सेवा के नाम से सामने आ रहे विज्ञापनों को लेकर हैदराबाद पुलिस ने महिलाओं को सतर्क किया है। पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और फेसबुक पर आकर्षक विज्ञापन और फर्जी प्रोफाइल बनाकर महिलाओं को निशाना बना रहे हैं। इन विज्ञापनों में कॉफी डेट, फिल्म देखने, शॉपिंग कंपैनियन, शादी और अन्य कार्यक्रमों में साथ जाने जैसी सेवाओं की पेशकश की जाती है। संपर्क करने वाली महिलाओं को बाद में निजी चैट में ले जाकर बुकिंग कन्फर्मेशन, एडवांस भुगतान या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर रकम मांगी जाती है।

पुलिस के मुताबिक, कुछ विज्ञापनों में छोटी मुलाकात के लिए कुछ सौ रुपये और पूरे दिन साथ रहने के लिए कई हजार रुपये तक के पैकेज दिखाए जाते हैं। ठग इन ऑफर्स को आकर्षक बनाने के लिए ‘50 प्रतिशत छूट’, ‘स्पेशल ऑफर’ और सीमित अवधि की छूट जैसे दावे भी कर सकते हैं। कम कीमत और आकर्षक प्रोफाइल के कारण लोग बिना पर्याप्त जांच के ऐसे प्रस्तावों पर भरोसा कर सकते हैं।

एआई से बनाई तस्वीरों से तैयार होते हैं फर्जी प्रोफाइल

हैदराबाद पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी आकर्षक दिखने वाले पुरुषों की तस्वीरों का इस्तेमाल करके भरोसेमंद प्रोफाइल तैयार कर सकते हैं। इनमें कुछ तस्वीरें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाई गई हो सकती हैं, जबकि कुछ तस्वीरें इंटरनेट से उठाई गई हो सकती हैं।

ऐसे विज्ञापनों पर प्रतिक्रिया देने वाली महिलाओं को पहले सार्वजनिक कमेंट या संदेश के जरिए संपर्क किया जाता है और फिर निजी चैट में ले जाया जाता है। बातचीत के दौरान आरोपी विश्वास कायम करने की कोशिश करते हैं। भरोसा बनने के बाद बुकिंग फीस, एडवांस भुगतान या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर रकम मांगी जाती है।

क्यूआर कोड और डिजिटल वॉलेट से भुगतान का दबाव

पुलिस ने बताया कि पीड़ितों को भुगतान के लिए क्यूआर कोड या डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल करने के लिए कहा जा सकता है। रकम ट्रांसफर होने के बाद आरोपी बातचीत बंद कर सकते हैं, नंबर ब्लॉक कर सकते हैं या फर्जी प्रोफाइल को ही हटा सकते हैं। ऐसी स्थिति में पीड़ित को न तो वादा की गई सेवा मिलती है और न ही भुगतान की गई रकम वापस मिलती है।

पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि इस तरह की ठगी का खतरा केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है। बातचीत के दौरान साझा किए गए फोन नंबर, तस्वीरें, पता, सोशल मीडिया प्रोफाइल और अन्य निजी जानकारी का इस्तेमाल उत्पीड़न, ब्लैकमेल या दूसरे साइबर अपराधों के लिए किया जा सकता है।

निजी तस्वीरों से ब्लैकमेल का खतरा

साइबर अपराधी बातचीत के दौरान निजी तस्वीरें या संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। बाद में इन्हीं सामग्री का इस्तेमाल पीड़ित को धमकाने या ब्लैकमेल करने में किया जा सकता है। पुलिस ने महिलाओं से अनजान लोगों के साथ ऑनलाइन बातचीत के दौरान निजी तस्वीरें और संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करने की अपील की है।

पुलिस ने ऑनलाइन बातचीत के आधार पर किसी अनजान व्यक्ति से व्यक्तिगत मुलाकात को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा है। व्यक्ति की पहचान और सेवा की वास्तविकता की पर्याप्त पुष्टि के बिना ऐसी मुलाकात सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है।

आकर्षक ऑनलाइन ऑफर देखकर जल्दबाजी न करें

पुलिस ने नागरिकों को सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले बेहद सस्ते या आकर्षक ऑफर्स पर तुरंत भरोसा नहीं करने की सलाह दी है। किसी भी सेवा की वास्तविकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने के बाद ही भुगतान करना चाहिए।

उपयोगकर्ता सोशल मीडिया खाते की पुरानी गतिविधियों, उपलब्ध संपर्क विवरण और प्रोफाइल से जुड़े अन्य संकेतों की जांच कर सकते हैं। हालांकि, केवल इन संकेतों के आधार पर किसी प्रोफाइल को वास्तविक मानना पर्याप्त नहीं है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि रोमांस और डेटिंग आधारित साइबर ठगी में अपराधी शुरुआत में भरोसा कायम करने और बातचीत को निजी बनाने की कोशिश करते हैं। इसके बाद इसी भरोसे का इस्तेमाल पैसे, निजी तस्वीरें या संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए किया जा सकता है।

प्रो. सिंह ने कहा कि केवल आकर्षक तस्वीर या भरोसेमंद दिखने वाली प्रोफाइल के आधार पर किसी ऑनलाइन ऑफर को वास्तविक नहीं मानना चाहिए। एडवांस भुगतान या निजी जानकारी साझा करने से पहले स्वतंत्र रूप से सत्यापन जरूरी है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बार-बार भुगतान का दबाव, गोपनीयता बनाए रखने की मांग या तत्काल व्यक्तिगत मुलाकात के लिए दबाव संभावित साइबर ठगी का संकेत हो सकता है।

ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें

हैदराबाद पुलिस की साइबर अपराध टीम ऐसे संदिग्ध विज्ञापनों की निगरानी कर रही है। पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि इस तरह की ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 साइबर अपराध हेल्पलाइन पर संपर्क करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

समय पर शिकायत करने से संदिग्ध लेनदेन को ट्रैक करने और जांच के लिए जरूरी डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित करने में मदद मिल सकती है।

‘रेंट-ए-बॉयफ्रेंड’ जैसे ऑनलाइन ऑफर्स का इस्तेमाल यह दिखाता है कि साइबर अपराधी अब पारंपरिक बैंकिंग और निवेश धोखाधड़ी के साथ-साथ सोशल मीडिया के लोकप्रिय ट्रेंड और लोगों की व्यक्तिगत जरूरतों को भी ठगी का माध्यम बना रहे हैं। ऐसे में आकर्षक प्रोफाइल, भारी छूट और कंपैनियनशिप ऑफर पर भरोसा करने से पहले सत्यापन करना और अनजान व्यक्ति को भुगतान या निजी जानकारी देने से बचना जरूरी है।

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