हैदराबाद: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निवेश ठगी के बढ़ते मामलों के बीच हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए Meta को तलब किया है। पुलिस ने कंपनी से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook, WhatsApp और Instagram पर AI से तैयार किए गए फर्जी वीडियो और निवेश घोटालों को रोकने के लिए अब तक क्या तकनीकी और सुरक्षा उपाय अपनाए गए हैं। यह कदम उन कई शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिनमें लोगों ने दावा किया कि वे नेताओं और मशहूर हस्तियों के नाम पर बनाए गए नकली वीडियो देखकर निवेश के झांसे में आ गए और लाखों रुपये गंवा बैठे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में ऐसे मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिनमें साइबर अपराधियों ने AI तकनीक का उपयोग कर प्रसिद्ध व्यक्तियों के डीपफेक वीडियो तैयार किए। इन वीडियो में निवेश योजनाओं का प्रचार कर लोगों को अधिक मुनाफे का लालच दिया गया और बाद में उनसे बड़ी रकम ठग ली गई। जांच एजेंसियां अब यह भी परख रही हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसे फर्जी कंटेंट को समय रहते पहचानने और हटाने में कितने प्रभावी रहे हैं।
पुलिस के नोटिस के बाद Meta का एक प्रतिनिधि हाल ही में हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस के समक्ष उपस्थित हुआ। अधिकारियों ने बैठक के दौरान कंपनी के प्रतिनिधि को ऐसे कई मामलों के उदाहरण दिखाए, जिनमें पीड़ितों ने Meta के प्लेटफॉर्म पर प्रसारित फर्जी विज्ञापनों और पोस्ट पर भरोसा कर करोड़ों रुपये का नुकसान उठाया। पुलिस ने Meta से अपनी तकनीकी टीम को बुलाने और यह विस्तार से बताने को कहा है कि ऐसे धोखाधड़ी वाले कंटेंट की पहचान, निगरानी और रोकथाम के लिए कौन-कौन से सुरक्षा तंत्र लागू हैं।
जांच में सामने आया है कि साइबर ठग AI तकनीक की मदद से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, अभिनेता अमिताभ बच्चन और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी सहित कई चर्चित हस्तियों के फर्जी वीडियो तैयार कर रहे थे। इन वीडियो को Facebook और WhatsApp सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर लोगों को कथित निवेश प्लेटफॉर्म में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था।
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यह मामला उस समय और गंभीर हो गया जब जून में सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि अज्ञात लोगों ने AI की मदद से उनके नाम और पहचान का दुरुपयोग करते हुए फर्जी वीडियो बनाए तथा उन्हें एक निवेश योजना का समर्थन करते हुए दिखाया। इसके बाद पुलिस ने डीपफेक तकनीक के जरिए फैलाए जा रहे निवेश घोटालों की जांच तेज कर दी।
इससे पहले साइबराबाद पुलिस ने एक अलग मामले में Google India के नोडल अधिकारी के खिलाफ कथित लापरवाही का मामला दर्ज किया था। आरोप था कि एक 58 वर्षीय व्यक्ति ने Google Play Store पर उपलब्ध एक फर्जी निवेश एप के जरिए शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ₹7.95 लाख गंवा दिए। इस मामले में भी Google के प्रतिनिधि से पूछताछ की गई और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों तथा तकनीकी विशेषज्ञों को सुरक्षा उपायों की जानकारी देने के लिए बुलाया गया है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि AI आधारित डीपफेक वीडियो साइबर अपराध का तेजी से उभरता हुआ खतरा हैं। उनका कहना है कि जब किसी प्रसिद्ध नेता, अभिनेता या सार्वजनिक हस्ती का चेहरा और आवाज कृत्रिम रूप से तैयार कर निवेश या वित्तीय उत्पादों का प्रचार किया जाता है, तो आम लोग आसानी से उस पर विश्वास कर लेते हैं। ऐसे मामलों में सोशल मीडिया कंपनियों को AI आधारित कंटेंट की सक्रिय निगरानी, त्वरित पहचान और तत्काल हटाने की मजबूत व्यवस्था विकसित करनी होगी। साथ ही उपयोगकर्ताओं को भी किसी वीडियो या विज्ञापन के आधार पर निवेश करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से उसकी पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।
पुलिस का कहना है कि जांच केवल ठगी करने वाले गिरोहों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अपने उपयोगकर्ताओं को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए निर्धारित जिम्मेदारियों का कितनी प्रभावी ढंग से पालन कर रहे हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि Meta और Google जैसे बड़े तकनीकी मंचों के साथ समन्वय बढ़ने से AI आधारित निवेश ठगी पर अंकुश लगाने और ऐसे साइबर अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
