हैदराबाद: नागोले पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने लगभग 290 निवेशकों को करीब ₹30 करोड़ की ठगी की। आरोपियों—किच्छा वीरभद्र राव, 51, बंडलगुडा निवासी, उनकी पत्नी राज्यालक्ष्मी और उनके सहायक वेंकट दुर्गा प्रसाद—ने जून 2024 से जुलाई 2025 तक “वीरभद्र ट्रेडिंग” के नाम से यह उच्च-लाभ निवेश योजना चलाई। निवेशकों को असामान्य रूप से उच्च मासिक रिटर्न का लालच देकर योजना में शामिल किया गया।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपियों ने प्रत्येक ₹1 लाख निवेश पर ₹10,000 की मासिक वापसी का वादा किया। भरोसा बनाने के लिए, उन्होंने कुछ निवेशकों को प्रारंभिक भुगतान किया। इससे और लोग योजना में शामिल हुए, और कुल 290 निवेशकों ने मिलकर करीब ₹30 करोड़ जमा किए। हालांकि, जल्दी ही भुगतान बंद हो गया और अधिकांश निवेशकों को राशि नहीं मिली।
जांच में सामने आया कि यह योजना मई 2025 में गुड़गांव में किच्छा वीरभद्र राव के खिलाफ साइबर अपराध केस दर्ज होने के बाद उजागर हुई। राव को वहां गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल एक अन्य निवेश घोटाले में म्यूल अकाउंट के रूप में किया गया था। जांच में ₹43 लाख जब्त किए गए। इसके बाद केवल करीब ₹15 करोड़ निवेशकों को लौटाए गए, जबकि ₹15 करोड़ बकाया रहे।
धोखाधड़ी का एहसास होने पर पीड़ित नागोले पुलिस के पास पहुंचे, जिसके बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई। अधिकारियों ने कहा कि अब सभी बैंक खातों की जांच की जा रही है और खाताधारकों की पहचान की जा रही है। जांच में वित्तीय लेन-देन और आरोपियों द्वारा उपयोग किए गए तकनीकी और डिजिटल निशानों का भी अध्ययन किया जा रहा है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “धोखेबाज अक्सर सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर निवेशकों का भरोसा जीतते हैं। वे शुरुआत में छोटी रकम देकर विश्वास पैदा करते हैं और धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करते हैं। निवेशकों को किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म पर तकनीकी और कानूनी पहलुओं की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए और अत्यधिक लाभ के लालच वाले वादों से सतर्क रहना चाहिए।”
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साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऑनलाइन ट्रेडिंग या उच्च लाभ वाली योजना में निवेश करने से पहले कंपनी की वैधता की पुष्टि करें। केवाईसी और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन की पुष्टि करें और दबाव बनाने वाली रणनीतियों या असामान्य रूप से आकर्षक मासिक रिटर्न की पेशकश पर ध्यान न दें।
नागोले मामला यह दर्शाता है कि एक बार भरोसा बन जाने पर उच्च-लाभ योजनाएं जल्दी ही धोखाधड़ी में बदल सकती हैं। आरोपियों ने प्रारंभिक भुगतान का इस्तेमाल निवेशकों को लुभाने और बड़ी संख्या में लोगों से पैसे जुटाने के लिए किया। योजना में विश्वास पैदा करने के लिए झूठे वादे और नकली प्रतिष्ठा का भरपूर इस्तेमाल किया गया।
पुलिस वर्तमान में सभी लेन-देन रिकॉर्ड इकट्ठा कर रही है और बैंक के साथ मिलकर फंड के प्रवाह का पता लगा रही है। जांच का उद्देश्य आरोपियों के नेटवर्क और संभावित सहयोगियों को भी उजागर करना है, ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोका जा सके। अधिकारियों ने निवेशकों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध निवेश प्रस्ताव की तुरंत सूचना देने की चेतावनी दी है।
यह घटना पूरे देश के निवेशकों के लिए एक चेतावनी के रूप में सामने आई है। साइबर और वित्तीय क्षेत्र में धोखेबाज लगातार नई तकनीकों का प्रयोग कर रहे हैं और वैध लगने वाले प्लेटफॉर्म भी बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का माध्यम हो सकते हैं। निवेशकों से आग्रह है कि निवेश से पहले पूरी तरह से due diligence करें और किसी भी योजना पर संदेह करें जो अत्यधिक उच्च रिटर्न का दावा करती है।
नागोले पुलिस इस मामले की जांच तेजी से कर रही है। गिरफ्तारी और संपत्ति फ्रीजिंग की संभावना है। वहीं, निवेशकों को सभी प्रस्तावों को संदेह के साथ देखने और निवेश योजनाओं के तकनीकी और कानूनी प्रमाणों की पुष्टि करने की सलाह दी जा रही है।
