जयपुर SOG ने फर्जी FMGE सर्टिफिकेट घोटाला उजागर किया। ₹20-25 लाख लेकर डॉक्टर बनाया, RMC के राजेश शर्मा समेत 18 गिरफ्तार। पीयूष त्रिवेदी, यश पुरोहित जैसे फर्जी डॉक्टरों की पहचान। 90+ संदिग्ध चिन्हित।

‘₹10 लाख लगाओ, करोड़ों कमाओ’: हैदराबाद में मनी सर्कुलेशन रैकेट का भंडाफोड़, 32 आरोपी गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
5 Min Read

हैदराबाद। मल्टी-लेवल मार्केटिंग और निवेश के नाम पर चल रहे एक बड़े मनी सर्कुलेशन रैकेट का खुलासा करते हुए 32 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि यह नेटवर्क लोगों को कम समय में करोड़ों कमाने का लालच देकर उनसे ₹5 लाख से ₹10 लाख तक निवेश करवाता था और बाद में रकम को एक अवैध चेन सिस्टम में घुमा देता था।

गिरफ्तार आरोपियों में रोहित कुमार, संदीप रेड्डी समेत कई अन्य शामिल हैं। इनमें 11 महिलाएं भी बताई जा रही हैं। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क में शामिल कई लोग सॉफ्टवेयर कंपनियों में कार्यरत थे या पूर्व आईटी प्रोफेशनल रहे हैं, जिन्होंने अपने पेशेवर बैकग्राउंड का इस्तेमाल भरोसा जीतने के लिए किया।

जांच के अनुसार, आरोपी खासतौर पर सॉफ्टवेयर कर्मचारियों, बेरोजगार युवाओं, छोटे कारोबारियों और गृहिणियों को निशाना बनाते थे। उन्हें पार्ट-टाइम जॉब और ऑनलाइन बिजनेस के नाम पर मीटिंग्स में बुलाया जाता था, जहां उन्हें बड़े मुनाफे के सपने दिखाए जाते थे। इन मीटिंग्स का आयोजन अक्सर हाईटेक सिटी के होटलों में किया जाता था ताकि स्कीम को वैध और आकर्षक दिखाया जा सके।

पीड़ितों को बताया जाता था कि यदि वे ₹5 लाख से ₹10 लाख तक निवेश करते हैं, तो दो साल के भीतर ₹3 करोड़ से ₹4 करोड़ तक की कमाई संभव है। इस दौरान उत्पाद खरीदने का भी झांसा दिया जाता था, जिसे ‘गिफ्ट’ या ‘पैकेज’ के रूप में पेश किया जाता था। आरोप है कि असल में यह रकम सीधे मनी सर्कुलेशन स्कीम में डाली जाती थी, जिसकी जानकारी निवेशकों को नहीं दी जाती थी।

जांच में यह भी सामने आया कि यह नेटवर्क एक बाइनरी मॉडल पर काम करता था, जिसमें हर सदस्य को कम से कम दो नए लोगों को जोड़ना होता था। इस तरह एक चेन बनती जाती थी और ऊपर के स्तर पर बैठे लोगों को नए निवेशकों के जरिए कमीशन मिलता था। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली अवैध मनी सर्कुलेशन स्कीम की श्रेणी में आती है, जिस पर कानून के तहत प्रतिबंध है।

FutureCrime Summit 2026 Calls for Speakers From Government, Industry and Academia

अब तक 11 पीड़ितों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिन्होंने कुल मिलाकर करीब ₹75 लाख के नुकसान की जानकारी दी है। हालांकि, जांच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क से प्रभावित लोगों की संख्या कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई पीड़ित अभी सामने नहीं आए हैं।

यह मामला देशभर में फैले एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें हजारों करोड़ रुपये के लेन-देन की आशंका जताई जा रही है। आरोपियों पर यह भी आरोप है कि वे खुद को वैध ई-कॉमर्स और ट्रैवल पैकेज बेचने वाली कंपनी से जुड़ा बताते थे, जबकि असल में उनका उद्देश्य लोगों को स्कीम में जोड़ना और उनसे पैसा इकट्ठा करना था।

जांच के दौरान कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें अलग-अलग राज्यों तक फैले इस नेटवर्क के कनेक्शन सामने आए। अधिकारियों के अनुसार, फरार आरोपियों की तलाश जारी है और इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जा रही है।

इस बीच, लोगों को ऐसे स्कीमों से सावधान रहने की सलाह दी गई है, जिनमें कम समय में अत्यधिक मुनाफे का वादा किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी स्कीम में कमाई मुख्य रूप से नए सदस्यों को जोड़ने पर निर्भर हो, तो वह अक्सर धोखाधड़ी का संकेत होती है।

यह कार्रवाई एक बार फिर यह दिखाती है कि डिजिटल और नेटवर्क आधारित फ्रॉड के नए तरीके तेजी से फैल रहे हैं, जहां तकनीकी और पेशेवर छवि का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसाया जा रहा है। ऐसे में निवेश से पहले पूरी जानकारी और सत्यापन बेहद जरूरी हो गया है।

हमसे जुड़ें

Share This Article