सिंगापुर की महिला बनकर रचा गया प्लान, नकली ट्रेडिंग ऐप में दिखाए गए फर्जी मुनाफे; पैसे निकालने पर खुली सच्चाई

फेसबुक दोस्ती, फर्जी ऐप और ‘प्रॉफिट का जाल’: हैदराबाद के इंजीनियर से ₹2.36 करोड़ की साइबर ठगी

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By Roopa
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हैदराबाद: सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुई एक साधारण दोस्ती कैसे करोड़ों की ठगी में बदल सकती है, इसका ताजा उदाहरण हैदराबाद से सामने आया है। शहर के कोंडापुर इलाके में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को साइबर ठगों ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर ₹2.36 करोड़ का चूना लगा दिया। ठगी का यह जाल फेसबुक, फर्जी पहचान और नकली मोबाइल ऐप के जरिए बेहद सुनियोजित तरीके से बुना गया।

पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला अगस्त 2025 में शुरू हुआ, जब पीड़ित को फेसबुक पर एक महिला की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। खुद को “कोरा” बताने वाली इस महिला ने दावा किया कि वह सिंगापुर की निवासी है और Mumbai में काम करती है। धीरे-धीरे दोनों के बीच नियमित बातचीत शुरू हुई और विश्वास का माहौल तैयार किया गया।

‘फेसबुक स्टोर’ ग्रुप से बनाया भरोसा

कुछ ही समय में आरोपी महिला ने पीड़ित को “Facebook Store” नामक एक ग्रुप में जोड़ दिया। इस ग्रुप में कई अन्य सदस्य भी मौजूद बताए गए, जो लगातार ट्रेडिंग से मुनाफा कमाने के स्क्रीनशॉट और संदेश साझा करते थे। इससे पीड़ित को यह विश्वास हो गया कि यह एक वैध और लाभदायक निवेश प्लेटफॉर्म है।

इसके बाद महिला ने पीड़ित को ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में छोटे निवेश से भरोसा बढ़ाया गया और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम लगाने के लिए उकसाया गया।

APK फाइल से डाउनलोड कराया गया फर्जी ऐप

जब पीड़ित पूरी तरह भरोसे में आ गया, तब उसे एक APK फाइल भेजी गई, जिसके जरिए एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करने को कहा गया। यह ऐप देखने में बिल्कुल असली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसा था और फेसबुक जैसे इंटरफेस की नकल करता था, जिससे किसी को भी शक न हो।

इस दौरान पीड़ित को एक दूसरी महिला “बेला” से भी मिलवाया गया, जिसने खुद को जर्मनी में रहने वाली ट्रेडिंग विशेषज्ञ बताया। दोनों महिलाओं के निर्देश पर पीड़ित ने निवेश करना शुरू किया, यह सोचकर कि वह अलग-अलग प्रोडक्ट्स में ट्रेडिंग कर रहा है।

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तीन महीने में ₹2.3 करोड़ से ज्यादा ट्रांसफर

जांच के अनुसार, पीड़ित ने 1 सितंबर से 12 दिसंबर 2025 के बीच करीब ₹2.3 करोड़ की राशि अलग-अलग ट्रांजेक्शनों के जरिए इन ठगों को भेजी। ऐप पर लगातार बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जाता रहा, जिससे उसे यह यकीन हो गया कि उसका निवेश तेजी से बढ़ रहा है।

हालांकि, जब उसने अपनी रकम निकालने की कोशिश की, तो उसे बार-बार तकनीकी कारणों और अतिरिक्त शुल्क का बहाना बनाकर रोका गया। अंततः जब पैसे वापस नहीं मिले, तब उसे समझ आया कि वह ठगी का शिकार हो चुका है।

शिकायत के बाद मामला दर्ज

धोखाधड़ी का एहसास होने के बाद पीड़ित ने साइबर अपराध पुलिस से संपर्क किया। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है, जिनमें धोखाधड़ी, प्रतिरूपण, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क देश के भीतर संचालित हो रहा था या इसके अंतरराष्ट्रीय लिंक भी हैं। शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह संगठित साइबर गिरोह हो सकता है, जो सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों को निशाना बनाता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: सोशल इंजीनियरिंग का बढ़ता खतरा

इस तरह के मामलों पर टिप्पणी करते हुए प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “आज के समय में साइबर अपराधी तकनीक से ज्यादा लोगों की भावनाओं और भरोसे का इस्तेमाल कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर बन रही वर्चुअल पहचानें बेहद खतरनाक साबित हो रही हैं।”

उन्होंने आगाह किया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर निवेश करना, खासकर APK फाइल के जरिए ऐप डाउनलोड करना, बेहद जोखिम भरा है।

सतर्कता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर ठग अब बेहद पेशेवर तरीके से काम कर रहे हैं और आम लोगों को बड़े स्तर पर निशाना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की वैधता की जांच करना और अनजान स्रोतों से ऐप डाउनलोड करने से बचना बेहद जरूरी है।

हैदराबाद की यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की ठगी नहीं, बल्कि बढ़ते साइबर अपराध के खतरे की गंभीर चेतावनी है।

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