हैदराबाद: ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी करने वाले संगठित साइबर गिरोहों पर साइबराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने बड़ा प्रहार किया है। पिछले एक सप्ताह के दौरान देशभर में फैले नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए 12 अलग-अलग मामलों में कुल 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस ऑपरेशन ने न केवल करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया, बल्कि साइबर ठगों के काम करने के संगठित तंत्र को भी उजागर कर दिया।
अधिकारियों के मुताबिक, इन मामलों में सबसे बड़ा खुलासा उस केस में हुआ, जिसमें एक व्यक्ति से ₹2.93 करोड़ की ठगी की गई थी। इस मामले में दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ के दौरान इनके पास से मिली जानकारी के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनके ऑपरेशन के तरीकों का पता चला है। शुरुआती जांच से स्पष्ट हुआ है कि यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग ऐप्स और फर्जी निवेश वेबसाइट्स के जरिए लोगों को टारगेट करता था।
जांच में सामने आया कि ठग पहले संभावित पीड़ितों से संपर्क कर उन्हें शेयर बाजार, फॉरेक्स या क्रिप्टो ट्रेडिंग में कम समय में अधिक मुनाफे का भरोसा दिलाते थे। इसके बाद उन्हें एक नकली ऐप या वेबसाइट पर रजिस्टर कराया जाता था, जहां शुरुआती निवेश पर फर्जी मुनाफा दिखाकर उनका विश्वास जीता जाता था। जैसे ही पीड़ित बड़ी रकम निवेश करता, प्लेटफॉर्म अचानक बंद हो जाता या उसका अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता।
संगठित नेटवर्क, मल्टी-लेयर ऑपरेशन
अधिकारियों ने बताया कि यह गिरोह बेहद सुनियोजित और बहु-स्तरीय तरीके से काम करता था। इसके सदस्य देश के अलग-अलग राज्यों में बैठे होते थे और डिजिटल माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े रहते थे। ठगी की रकम को कई बैंक खातों, वॉलेट्स और तथाकथित ‘म्यूल अकाउंट्स’ के जरिए घुमाया जाता था, जिससे जांच एजेंसियों के लिए पैसे का ट्रेल पकड़ना मुश्किल हो जाता था।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई संदिग्ध बैंक खातों को चिन्हित कर उन्हें फ्रीज कराया है। साथ ही, मोबाइल नंबर, IP एड्रेस और डिजिटल ट्रांजैक्शन के तकनीकी विश्लेषण के जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई गई। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क के और भी कड़ियों की जांच जारी है।
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अदालत से 884 रिफंड ऑर्डर, पीड़ितों को बड़ी राहत
इस ऑपरेशन की सबसे अहम उपलब्धि पीड़ितों को राहत पहुंचाना रही। 125 मामलों में अदालत से 884 रिफंड ऑर्डर हासिल किए गए हैं, जिनके जरिए ₹4,35,58,181 की राशि पीड़ितों को वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। साइबर फ्रॉड के मामलों में इतनी बड़ी संख्या में रिफंड ऑर्डर मिलना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती समय में ही शिकायत दर्ज कराई जाए, तो बड़ी रकम को फ्रीज कर रिकवर किया जा सकता है। इस मामले में भी त्वरित कार्रवाई के कारण नुकसान को सीमित करने में सफलता मिली है।
सोशल इंजीनियरिंग बना सबसे बड़ा हथियार
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में तकनीक के साथ-साथ ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का व्यापक इस्तेमाल किया जाता है। प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, “साइबर ठग लोगों के लालच और भरोसे का फायदा उठाते हैं। वे पहले छोटे मुनाफे का झांसा देकर विश्वास बनाते हैं और फिर बड़ी रकम ठग लेते हैं। यह पूरी तरह मनोवैज्ञानिक खेल होता है।”
उन्होंने आगाह किया कि किसी भी अनजान लिंक, ऐप या कॉल के जरिए निवेश करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है और निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता की जांच जरूरी है।
कैसे बचें ऐसे फ्रॉड से?
अधिकारियों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे केवल प्रमाणित और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें। किसी भी ऐसे ऑफर से बचें, जिसमें कम समय में अधिक मुनाफे का दावा किया जा रहा हो। साथ ही, किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक के जरिए निवेश करने से परहेज करें।
अगर किसी को ठगी का संदेह हो, तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। शुरुआती घंटों में की गई कार्रवाई से पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
यह कार्रवाई एक बार फिर यह दर्शाती है कि ऑनलाइन निवेश के बढ़ते चलन के साथ साइबर अपराधी भी अपने तरीकों को लगातार अपडेट कर रहे हैं। ऐसे में सतर्कता, जागरूकता और समय पर कार्रवाई ही इस तरह के फ्रॉड से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
