प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा सरकार के पूर्व सुपरिंटेंडेंट अधिकारी नरेश कुमार को एक बड़े बैंकिंग घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। यह मामला IDFC First Bank से जुड़े कथित ₹645 करोड़ के सरकारी फंड हेरफेर से संबंधित बताया जा रहा है, जिसमें सरकारी खातों से धन निकालकर शेल कंपनियों और निजी नेटवर्क के जरिए हेरफेर किया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार नरेश कुमार को 10 जून को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें चार दिन की हिरासत और आगे ED कस्टडी में भेजा गया। यह मामला धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत दर्ज किया गया है।
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ED की जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी प्रशासन और दो निजी स्कूलों के बैंक खातों से बड़े पैमाने पर सरकारी धन का गबन किया गया। यह धन IDFC बैंक में रखे खातों से ट्रांसफर कर विभिन्न शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया।
जांच रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में कई शेल संस्थाओं का उपयोग किया गया, जिनमें Capco Fintech Services, Swastik Desh Projects, RS Traders और SRR Planning Gurus Pvt Ltd जैसी इकाइयाँ शामिल हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से सरकारी फंड को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर उसकी असली उत्पत्ति को छिपाने की कोशिश की गई।
ED ने बताया कि इस घोटाले में मुख्य आरोपी विक्रम वाधवा, रिभव ऋषि और अभय कुमार ने मिलकर एक संगठित नेटवर्क तैयार किया, जिसमें बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है। इस नेटवर्क के जरिए सरकारी धन को पहले शेल कंपनियों में भेजा गया, फिर उसे अलग-अलग खातों और नकद लेनदेन के जरिए “लेयरिंग” किया गया।
सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया कि शेल कंपनियों से निकाले गए करोड़ों रुपये बाद में ज्वेलर्स को भेजे गए, जहां से बदले में नकद राशि प्राप्त की गई। इस कैश को फिर विभिन्न सरकारी अधिकारियों और अन्य मध्यस्थों तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य धन के स्रोत को छिपाना और अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को वैध बनाना था।
ED के अनुसार नरेश कुमार पर आरोप है कि उन्होंने न केवल अपने खातों में सीधे अवैध धन प्राप्त किया, बल्कि इस पूरे नेटवर्क में एक प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका भी निभाई। उनके बैंक खातों और उनके परिवार के खातों में लगभग ₹1.20 करोड़ की अवैध राशि पाए जाने की पुष्टि हुई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई सरकारी खातों से निकाले गए धन को “स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट” नामक शेल इकाई के माध्यम से डायवर्ट किया गया। इसके बाद यह पैसा अलग-अलग चरणों में विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया गया और अंततः कैश में बदल दिया गया।
ED ने बताया कि इस मामले में पहले ही कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसी अब पूरे धन प्रवाह (money trail) का पता लगाने और अन्य लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक बैंक फ्रॉड नहीं बल्कि संगठित वित्तीय अपराध का बड़ा उदाहरण है, जिसमें सरकारी सिस्टम और बैंकिंग चैनलों का दुरुपयोग किया गया। जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।
