चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी विभागों से जुड़े करीब ₹550 करोड़ के कथित वित्तीय घोटाले के मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 चंडीगढ़ शाखा के पूर्व प्रबंधक रिभव ऋषि की पहली नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि मामला बड़े पैमाने पर आर्थिक अपराध से जुड़ा है और जांच एजेंसी ने प्रथम दृष्टया आरोपी की कथित साजिश में सक्रिय भूमिका की ओर संकेत किया है।
विशेष सीबीआई न्यायाधीश विजयंत सहगल ने 21 अगस्त को जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि इस स्तर पर अदालत को साक्ष्यों की विस्तृत जांच नहीं करनी है, लेकिन जांच के दौरान सामने आई सामग्री को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। अदालत ने कथित तौर पर बड़ी मात्रा में सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
सरकारी खातों और एफडीआर में मिली गड़बड़ी
यह मामला हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में रखे धन और सावधि जमा रसीदों यानी एफडीआर में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद शुरू हुआ। विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक के खातों में गड़बड़ी मिलने के बाद तीन सदस्यीय जांच समिति ने मामले की जांच की।
इसके बाद बैंक अधिकारियों और अज्ञात लोगों के खिलाफ प्रारंभिक मामला दर्ज किया गया। पहली प्राथमिकी 23 फरवरी 2026 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दर्ज की थी। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 8 अप्रैल को जांच अपने हाथ में ले ली। आगे की जांच में हरियाणा के अन्य सरकारी विभागों के खातों में भी इसी तरह की कथित विसंगतियां सामने आने का दावा किया गया।
बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों के नेटवर्क का आरोप
सीबीआई के अनुसार, सरकारी धन को कथित तौर पर धोखाधड़ी के जरिए निकालकर फर्जी कंपनियों और संस्थाओं के माध्यम से अलग-अलग खातों में भेजा गया। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस कथित नेटवर्क में बैंक अधिकारियों, निजी लोगों और कुछ सरकारी कर्मचारियों की भूमिका थी।
रिभव ऋषि पर शाखा प्रबंधक के रूप में अपने पद का कथित दुरुपयोग कर पूरी योजना को अंजाम देने का आरोप है। सीबीआई ने उसे कथित साजिश का “मुख्य सूत्रधार” बताया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि ऋषि ने जरूरी मंजूरी के बिना हरियाणा सरकार के कुछ खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 चंडीगढ़ शाखा में खुलवाए। इसके बाद कथित तौर पर फर्जी डेबिट नोट, चेक और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल सरकारी खातों से रकम स्थानांतरित करने के लिए किया गया।
25 कथित फर्जी लेनदेन में ₹187.3 करोड़
सीबीआई ने आरोप लगाया कि सरकारी खातों से रकम निकालने के लिए फर्जी दस्तावेजों और बैंकिंग प्रक्रिया का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। जांच के मुताबिक, ऋषि ने अलग-अलग सरकारी खातों से कम से कम 25 संदिग्ध डेबिट लेनदेन को मंजूरी दी, जिनकी कुल राशि करीब ₹187.3 करोड़ थी।
जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि सरकारी विभागों को यह दिखाने के लिए फर्जी एफडीआर और तैयार किए गए बैंक विवरण उपलब्ध कराए गए कि उनका पैसा बैंक में सुरक्षित है। इसके बाद कथित तौर पर वास्तविक धन को दूसरी संस्थाओं की ओर स्थानांतरित किया गया।
फर्जी कंपनियों के जरिए रकम खपाने का आरोप
सीबीआई के अनुसार, एसआरआर प्लानिंग गुरुस समेत कुछ फर्जी कंपनियों का कथित तौर पर इस्तेमाल घोटाले की रकम हासिल करने और उसे अलग-अलग खातों के जरिए घुमाने के लिए किया गया। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि ऋषि और उसकी पत्नी के निजी बैंक खातों में कथित घोटाले से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से पर्याप्त रकम पहुंची।
जांच एजेंसी ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत से कहा कि ऋषि को रिहा किए जाने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है, साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है और आगे की जांच में बाधा डाल सकता है। सीबीआई ने अपने आरोपों के समर्थन में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, व्हाट्सऐप बातचीत, कॉल विवरण और ईमेल का भी हवाला दिया।
बचाव पक्ष ने जांच पर उठाए सवाल
ऋषि की ओर से पेश वकील ने आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि जांच जल्दबाजी में की गई और आरोपी कथित घोटाले के लिए जिम्मेदार नहीं है। बचाव पक्ष ने अदालत के सामने तर्क दिया कि मामले में साक्ष्य मुख्य रूप से दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक प्रकृति के हैं, जिन्हें आरोपी आसानी से प्रभावित नहीं कर सकता।
वकील ने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई पूरी होने में काफी समय लग सकता है और आरोपी को लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं होगा।
गंभीर आर्थिक अपराध मानकर जमानत से इनकार
अदालत ने कहा कि जमानत के चरण में साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन नहीं किया जा सकता, लेकिन अभियोजन की ओर से पेश सामग्री को इस स्तर पर पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि आरोप साबित होने की स्थिति में मामला बड़े पैमाने पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है और अपराध की गंभीरता जमानत देने के खिलाफ जाती है।
रिभव ऋषि को 24 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि उसके और अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच काफी आगे बढ़ चुकी है तथा अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है। हालांकि, मामले के कुछ पहलुओं पर आगे की जांच अभी जारी है।
विशेष सीबीआई अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत पर फैसला लेने के उद्देश्य से हैं। इन टिप्पणियों का मुख्य मुकदमे की सुनवाई के दौरान मामले के अंतिम निष्कर्ष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
