हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद नगर पालिका में भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है, जहां अधिशासी अधिकारी (ईओ) कृष्ण कुमार सोनकर को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई लखनऊ स्थित एंटी करप्शन संगठन (भ्रष्टाचार निवारण संगठन) की टीम ने सोमवार को उनके सरकारी आवास पर की। गिरफ्तारी के बाद नगर पालिका कार्यालय में हड़कंप मच गया और पूरे परिसर में सन्नाटा फैल गया।
जानकारी के अनुसार, मामला नगर पालिका में बिजली सामग्री, उपकरणों की आपूर्ति और उनके इंस्टॉलेशन कार्य से जुड़ा हुआ है, जो हरदोई की ‘लक्ष्मी इलेक्ट्रिकल्स’ फर्म द्वारा किया जा रहा था। इस फर्म के संचालक और ठेकेदार सुदेश गुप्ता, निवासी सदर बाजार के खजांची टोला, का नगर पालिका से काफी बकाया भुगतान लंबित था। इसी भुगतान को जारी करने के एवज में कथित तौर पर ईओ द्वारा रिश्वत की मांग की गई थी।
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शिकायत के अनुसार, अधिशासी अधिकारी कृष्ण कुमार सोनकर ने बकाया बिल पास करने के लिए ठेकेदार से दो लाख रुपये की मांग की थी। ठेकेदार सुदेश गुप्ता रिश्वत देने के इच्छुक नहीं थे, जिसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत लखनऊ स्थित एंटी करप्शन संगठन में दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद टीम ने पूरे मामले का सत्यापन किया और कार्रवाई के लिए जाल बिछाने की योजना तैयार की।
सोमवार को एंटी करप्शन की टीम तय योजना के अनुसार शाहाबाद पहुंची। दोपहर करीब 2:30 बजे शिकायतकर्ता सुदेश गुप्ता दो लाख रुपये लेकर ईओ के सरकारी आवास पर पहुंचे। जैसे ही ईओ ने राशि स्वीकार की, पहले से मौजूद टीम ने उन्हें मौके पर ही रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान ईओ ने खुद को अस्वस्थ बताकर बचने की कोशिश की और बीमारी का हवाला दिया। हालांकि, टीम ने उनकी बातों को नजरअंदाज करते हुए कानूनी प्रक्रिया पूरी की और उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बाद आरोपी अधिकारी को पहले पुलिस लाइन ले जाया गया, जहां आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं, और फिर उन्हें लखनऊ स्थित संबंधित सतर्कता इकाई के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (लखनऊ सेक्टर) में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आगे की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस मामले में अन्य कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल थे या नहीं।
गिरफ्तारी की खबर फैलते ही नगर पालिका शाहाबाद में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कार्यालय में कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई और कई कर्मचारी अचानक चुप्पी साधते नजर आए। पूरे दिन कार्यालय का माहौल सामान्य कार्य दिवस जैसा नहीं रहा, बल्कि लगभग ठहर सा गया। अधिकारी और कर्मचारी मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका में विभिन्न कार्यों और बकाया भुगतानों की जिम्मेदारी संबंधित लेखा और लिपिकीय विभागों के पास होती है, लेकिन इस पूरे मामले के बाद कई स्तरों पर जांच की संभावना जताई जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि भुगतान प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर अनियमितताएं हुईं।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय निकायों में बकाया भुगतान और ठेकेदारों के बिल पास कराने के नाम पर भ्रष्टाचार की शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में एंटी करप्शन एजेंसियों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फिलहाल आरोपी ईओ के खिलाफ विधिक कार्रवाई जारी है और जांच एजेंसियां पूरे भुगतान प्रकरण, दस्तावेजों और संबंधित फाइलों की गहन जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे और भी खुलासे संभव हैं।
